गाजियाबाद कांड पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, SIT जांच का आदेश
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गाजियाबाद कांड पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, SIT जांच का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद बच्ची केस में SIT जांच के आदेश दिए। यूपी पुलिस जांच पर असंतोष जताते हुए दो हफ्ते में रिपोर्ट मांगी और ट्रायल पर अस्थायी रोक लगाई।


सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि गाजियाबाद में पिछले महीने चार साल की बच्ची के कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पीड़िता के माता-पिता गाजियाबाद पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि SIT का गठन शुक्रवार तक या अधिकतम शनिवार सुबह 11 बजे तक कर दिया जाए।

महिला अधिकारियों की टीम करेगी जांच

पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली भी शामिल थे, ने कहा कि SIT में महिला पुलिस अधिकारियों को शामिल किया जाए और इसकी अगुवाई कमिश्नर या इंस्पेक्टर जनरल स्तर के अधिकारी द्वारा की जाए।अदालत ने यह भी कहा कि SIT पीड़िता के माता-पिता द्वारा उठाई गई सभी शिकायतों की जांच करेगी। साथ ही उन दो निजी अस्पतालों की भूमिका की भी जांच की जाएगी, जिन्होंने कथित तौर पर बच्ची को इलाज देने से मना कर दिया था।

दो हफ्ते में रिपोर्ट, ट्रायल पर अस्थायी रोक

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि SIT दो सप्ताह के भीतर अपनी पूरक रिपोर्ट संबंधित ट्रायल कोर्ट में पेश करे। तब तक ट्रायल कोर्ट को मामले की कार्यवाही स्थगित रखने को कहा गया है।

पिता की याचिका पर सुनवाई

यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जो पीड़िता के पिता ने दाखिल की थी। उन्होंने मामले की जांच SIT या CBI से कराने और कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की थी।सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और ट्रायल शुरू हो चुका है।

पुलिस की भूमिका पर पहले भी उठे सवाल

इससे पहले 13 अप्रैल को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस की एफआईआर दर्ज करने और जांच में “हिचकिचाहट” पर सवाल उठाए थे।घटना 16 मार्च की है, जब एक पड़ोसी कथित तौर पर बच्ची को चॉकलेट दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। बच्ची के वापस न आने पर पिता ने तलाश शुरू की और उसे खून से लथपथ बेहोश अवस्था में पाया।

अस्पतालों के रवैये पर नाराजगी

10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच में गाजियाबाद पुलिस के “संवेदनहीन रवैये” की कड़ी आलोचना की थी। अदालत ने यह भी नाराजगी जताई कि गाजियाबाद के दो निजी अस्पतालों ने खून से लथपथ बच्ची को भर्ती करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उसे सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

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