
भगवंत मान की मुश्किलें बढ़ी, SGPC ने भी गुरु द्रोही दिया करार
एसजीपीसी ने भी अकाल तख़्त के फैसले को माना सही, मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु द्रोही' और 'पंथ विरोधी' बताने के फैसले पर मुहर लगाई।
SGPC on Bhagwant Mann: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने एक विशेष आम बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ अकाल तख्त साहिब द्वारा जारी धार्मिक आदेश (Edict) का पूर्ण समर्थन किया है। एसजीपीसी ने मुख्यमंत्री को 'गुरु द्रोही' (गुरु का विरोधी) और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित करने के फैसले की पुष्टि की है। यह पूरा विवाद एक कथित वीडियो क्लिप से जुड़ा हुआ है।
अमृतसर के तेजा सिंह समुद्री हॉल में आयोजित इस विशेष बैठक में यह निष्कर्ष निकाला गया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और पुलिस मामला दर्ज कराया जाएगा। समिति का कहना है कि इस घोषणा के बाद अब मुख्यमंत्री के पास अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं रह गया है।
5 जुलाई को पंथक इकट्ठा और जन-जागरूकता अभियान
सिख परंपराओं के अनुसार, अकाल तख्त साहिब के इस आदेश से सिख समुदाय को अवगत कराने के लिए एसजीपीसी ने कई बड़े फैसलों की घोषणा की है:
बड़े पंथक इकट्ठ का आयोजन: आगामी 5 जुलाई को गुरुद्वारा मंजी साहिब दीवान हॉल में एक विशाल पंथक सभा का आयोजन किया जाएगा।
क्षेत्रीय अभियान: एसजीपीसी पंजाब के हर निर्वाचन क्षेत्र में एक बड़ा अभियान शुरू करेगी। इसके तहत प्रचारक जत्थों (Preaching Groups) को भेजा जाएगा, जो सिख समुदाय को सर्वोच्च धार्मिक पीठ के इस आदेश का पालन करने के लिए प्रेरित करेंगे।
इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता एसजीपीसी अध्यक्ष हरजंदर सिंह धामी ने की। इसमें विभिन्न सिख धार्मिक नेता, जत्थेदार, पांचों तख्तों के प्रतिनिधि और श्री हरिमंदर साहिब के ग्रंथी शामिल हुए।
'सिख संस्थाओं पर नियंत्रण की कोशिश' - जत्थेदार गर्गर्ज
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गर्ज ने सभा को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च संस्था है और इसके आदेशों का पालन करना हर सिख का कर्तव्य है।
संस्थाओं को खतरा: जत्थेदार ने मुख्यमंत्री द्वारा अकाल तख्त को दी गई चुनौती को संस्था का अपमान बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकारें लगातार सिख संस्थाओं पर प्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने इस मोड़ पर पूरे पंथ से एकजुट होने की अपील की।
सरकार का एजेंडा: एसजीपीसी अध्यक्ष हरजंदर सिंह धामी ने भी आरोप लगाया कि पंजाब की वर्तमान सरकार का एजेंडा 'पंथक' संस्थाओं को निशाना बनाना है।
क्या है पूरा विवाद और वीडियो की सच्चाई?
एसजीपीसी द्वारा पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर आए वीडियो के कारण सिख समुदाय में भारी रोष है। प्रस्ताव के अनुसार, "मुख्यमंत्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय लगातार झूठे बयान दे रहे हैं और सर्वोच्च धार्मिक पीठ का अनादर कर रहे हैं।"
15 जून का धार्मिक आदेश: अकाल तख्त साहिब ने 15 जून को मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ यह आदेश जारी किया था। सर्वोच्च पीठ का दावा है कि दो अलग-अलग फोरेंसिक प्रयोगशालाओं (Forensic Labs) ने उस वीडियो को 'प्रामाणिक' (Authentic) पाया है, जिसमें मुख्यमंत्री से मिलता-जुलता एक व्यक्ति कथित तौर पर ऐसी गतिविधियों में शामिल है जिसे मर्यादा के खिलाफ माना गया है।
जनवरी का समन: यह मामला इस साल जनवरी में तब शुरू हुआ था जब अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री को 'गुरु की गोलक' (गुरुद्वारा दान पात्र) पर टिप्पणी करने और सिख गुरुओं तथा जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक कृत्य करने के आरोप में तलब किया था।
मुख्यमंत्री भगवंत मान का पक्ष
दूसरी ओर, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने दोहराया है कि वह उस कथित वीडियो में मौजूद नहीं हैं। मुख्यमंत्री का दावा है कि वीडियो क्लिप में दिख रहा व्यक्ति उनके चेहरे से मिलता-जुलता 'मास्क' (मुखौटा) पहने हुए है और यह उन्हें बदनाम करने की एक साजिश है।
(एजेंसी इनपुट के साथ )
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