
बागी लिस्ट में नाम आने पर भड़के शत्रुघ्न सिन्हा; बोले- मैं गद्दार नहीं
TMC के बागी सांसदों की सूची में नाम आने के बाद 'शॉटगन' की सफाई. ममता बनर्जी को बताया 'स्ट्रीट फाइटर'; कहा बुरे दिनों में अकेला नहीं छोड़ सकता.
Shatrughan Sinha On Mamata Banerjee: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संसदीय दल में मची ऐतिहासिक बगावत और 20 लोकसभा सांसदों के गायब होने की खबरों के बीच आसनसोल से टीएमसी सांसद और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने एक बड़ा बयान देकर सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है. कल तक बागी गुट के साथ दिखाई दे रहे 'शॉटगन' ने अब पूरी तरह यू-टर्न लेते हुए साफ कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ने वाले हैं.
गौरतलब है कि कल ही दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजने वाले और एनडीए (NDA) के साथ जाने की इच्छा जताने वाले टीएमसी के 19 बागी सांसदों की जो सूची सामने आई थी, उसमें शत्रुघ्न सिन्हा का नाम भी प्रमुखता से शामिल था. लेकिन चौतरफा अटकलों और बगावत के दावों के बीच आज सिन्हा ने अचानक अपना रुख बदल लिया है, जिसके अब पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं.
'दीदी स्ट्रीट फाइटर हैं, उनके बुरे दिनों में मैं उनके साथ खड़ा हूँ'- सिन्हा का भावुक बयान
अपने आधिकारिक बयान में शत्रुघ्न सिन्हा ने खुद को टीएमसी के विरोधी या बागी गुट से पूरी तरह अलग करते हुए ममता बनर्जी के प्रति अपनी अटूट निष्ठा जाहिर की. उन्होंने कहा:
"पिछले कुछ दिनों से मेरे बारे में मीडिया और राजनैतिक हलकों में कई तरह की अफवाहें और चीजें चलाई जा रही हैं. यह दावा किया जा रहा है कि मैं पार्टी छोड़ रहा हूँ और टीएमसी के विरोधी गुट के साथ हूँ. लेकिन मैं आज पूरी दुनिया के सामने यह बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूँ कि मैं ममता बनर्जी के साथ हूँ और मैं उन्हें इस मोड़ पर अकेला नहीं छोड़ सकता हूँ. ममता बनर्जी एक असली 'स्ट्रीट फाइटर' हैं."
सिन्हा ने आगे भावुक होते हुए कहा कि जब राजनीति में उनका बुरा दौर चल रहा था, तब ममता बनर्जी ही थीं जो उनके साथ मजबूती से खड़ी रही थीं और उनके आग्रह पर ही उन्होंने आसनसोल से चुनाव लड़ा था. ऐसे में आज जब ममता दीदी खुद अपनी पार्टी के सबसे बड़े संकट और बुरे दिनों से जूझ रही हैं, तो वे एक सच्चे साथी की तरह उनके साथ खड़े हैं.
भगदड़ के बीच 'शॉटगन' के पलटने से बागी गुट की रणनीति को झटका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के वरिष्ठ लोकसभा सांसदों को तोड़कर संसद में नया गुट बनाने या सामूहिक इस्तीफे के जरिए ममता-अभिषेक को पस्त करने की जो रणनीति बागी खेमे ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर शुभेंदु अधिकारी के साथ मिलकर तैयार की थी, उसे शत्रुघ्न सिन्हा के इस यू-टर्न से एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका लगा है:
सांसदों की संख्या का फेरबदल: कल तक जहां 20 लोकसभा सांसदों के गायब होने और बगावत की बात कही जा रही थी, सिन्हा के पीछे हटने के बाद अब बागी गुट में संख्या बल को लेकर नए सिरे से गणित बैठाना होगा.
अभिषेक बनर्जी को राहत: फर्जी हस्ताक्षर मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट से 3 हफ्ते का अंतरिम संरक्षण मिलने के बाद अभिषेक बनर्जी के लिए दिल्ली से यह दूसरी बड़ी राहत है, क्योंकि सिन्हा जैसे कद्दावर चेहरे का साथ बने रहने से बगावत की धार कुछ हद तक कमजोर पड़ सकती है.
हालांकि, अभी भी सुखेंदु शेखर रे के इस्तीफे और अन्य 19 सांसदों के रुख को लेकर सस्पेंस पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. ऐसे में 'शॉटगन' का यह पासा पलटना टीएमसी के भीतर जारी इस हाई-वोल्टेज ड्रामा में कौन सा नया मोड़ लेकर आता है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा.
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