
राम मंदिर चढ़ावा मामले में खुल सकते हैं कई राज, एसआईटी ने सौंपी रिपोर्ट
राम मंदिर दान विवाद में एसआईटी ने सरकार को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। जांच में कई लोगों से पूछताछ हुई, रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई संभव है।
राम मंदिर दान विवाद मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मांग के बाद गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने छह दिनों तक अयोध्या में रहकर मामले की गहन जांच की।
जांच टीम ने इस दौरान पांच दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की और कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की पड़ताल की। अब प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई रिपोर्ट
राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित हेरफेर और चोरी के आरोपों की जांच कर रही एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) एवं मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद को सौंपी है। रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दी गई है।एसआईटी की अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। टीम में आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन भी शामिल हैं।
ट्रस्ट की मांग पर हुई थी जांच
राम मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके बाद 13 जून को राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया।जांच टीम ने 15 जून से अयोध्या में जांच शुरू की और 20 जून तक प्रथम चरण की जांच पूरी कर लखनऊ लौट आई। इसके बाद से रिपोर्ट को लेकर लगातार चर्चाओं का दौर जारी था।
रिपोर्ट के आधार पर हो सकती है कार्रवाई
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर सरकार जल्द ही आगे की कार्रवाई का फैसला कर सकती है। यदि जांच में वित्तीय अनियमितताओं या गबन के आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। साथ ही प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
नए नामों की चर्चा तेज
जांच के दौरान कुछ ऐसे नाम भी सामने आने की चर्चा है, जो आधिकारिक रूप से राम जन्मभूमि परिसर के कर्मचारी नहीं हैं, लेकिन उनका संबंध ट्रस्ट से जुड़े प्रभावशाली लोगों से बताया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि एसआईटी जांच के अगले चरण में ऐसे लोगों से भी पूछताछ कर सकती है।माना जा रहा है कि प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद एसआईटी दोबारा अयोध्या पहुंचकर विस्तृत जांच कर सकती है।
केवल चढ़ावे तक सीमित नहीं रहा मामला
शुरुआत में आरोप केवल मंदिर के चढ़ावे की रकम में कथित हेरफेर तक सीमित थे, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ कई अन्य मुद्दे भी सामने आए। इनमें दान में मिली बहुमूल्य धातुओं के उपयोग, रिकॉर्ड के रखरखाव और मंदिर निर्माण कार्यों में कथित कमीशनखोरी जैसे आरोप शामिल बताए जा रहे हैं।हालांकि, प्रारंभिक रिपोर्ट में मुख्य रूप से चढ़ावे की रकम और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन पर फोकस किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अध्ययन के बाद यदि किसी स्तर पर अनियमितता या गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो मामले में एफआईआर, विभागीय कार्रवाई और अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं एसआईटी की विस्तृत जांच से कई और अहम खुलासे होने की संभावना भी जताई जा रही है।

