शुभव्रत से चंद्रनाथ तक… शुभेंदु अधिकारी के ‘इनर सर्कल’ की मौतों ने बढ़ाई हलचल
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शुभव्रत से चंद्रनाथ तक… शुभेंदु अधिकारी के ‘इनर सर्कल’ की मौतों ने बढ़ाई हलचल

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद बंगाल की राजनीति गरमा गई है। बीजेपी और टीएमसी एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।


भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी और निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की बुधवार (7 मई) रात हत्या ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब वर्षों पहले शुभेंदु अधिकारी की सुरक्षा टीम और करीबी राजनीतिक दायरे से जुड़े दो अन्य रहस्यमय मौतों के मामले भी विवादों में रहे हैं। पुलिस के अनुसार रथ की हत्या उनके मध्यग्राम स्थित घर के पास सुनियोजित तरीके से की गई।

यह घटना 2018 के उस चर्चित मामले की याद भी दिलाती है, जिसमें शुभेंदु अधिकारी की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी शुभव्रत चक्रवर्ती की गोली लगने से मौत हो गई थी। शुरुआत में इसे आत्महत्या माना गया था, लेकिन बाद में मामले की दोबारा जांच शुरू हुई।

पहले भी हो चुकी हैं संदिग्ध मौतें

चंद्रनाथ रथ की हत्या से पहले भी शुभेंदु अधिकारी के एक पूर्व करीबी सहयोगी की रहस्यमय मौत हो चुकी है। अगस्त 2013 में टीएमसी युवा कार्यकर्ता प्रदीप झा, जो पहले शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक और राजनीतिक सचिव रह चुके थे, को कोलकाता के स्ट्रैंड रोड पर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया था।

पुलिस ने उन्हें एक रेस्तरां के पास बेहोशी की हालत में पाया था, जिसके बाद अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उस समय झा के परिवार ने हत्या की आशंका जताई थी।

शुभव्रत चक्रवर्ती केस फिर चर्चा में

शुभव्रत चक्रवर्ती का मामला भी कई वर्षों बाद बंगाल की राजनीति में बड़ा मुद्दा बना। चक्रवर्ती राज्य सशस्त्र पुलिस के जवान थे और जब शुभेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस सांसद थे, तब से उनकी सुरक्षा टीम का हिस्सा थे। अक्टूबर 2018 में कंटाई स्थित पुलिस बैरक में वह गोली लगने की हालत में मिले थे और अगले दिन कोलकाता के अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी।हालांकि शुरुआत में पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया, लेकिन बाद में उनकी पत्नी ने घटनाक्रम पर सवाल उठाए और विस्तृत जांच की मांग की।

शुभेंदु अधिकारी दिसंबर 2020 में टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे, ठीक 2021 विधानसभा चुनाव से पहले।2021 में टीएमसी के लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद पश्चिम बंगाल सीआईडी ने मामले की जांच अपने हाथ में ली। जांच के दौरान शुभेंदु अधिकारी की सुरक्षा और राजनीतिक दायरे से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की गई।

बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले में शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ किसी भी कठोर कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। इसी पृष्ठभूमि में अब चंद्रनाथ रथ की हत्या ने फिर से अधिकारी के करीबी लोगों की अस्वाभाविक मौतों को चर्चा में ला दिया है।

सुनियोजित हत्या का शक

पुलिस और भाजपा सूत्रों के अनुसार यह हत्या पूरी तरह योजनाबद्ध थी। चंद्रनाथ रथ बुधवार शाम तक नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी के साथ थे। इसके बाद वह कोलकाता के पास स्थित अपने मध्यग्राम आवास के लिए निकले थे।जांचकर्ताओं को शक है कि हमलावरों को पहले से ही रथ की आवाजाही, रास्ते और समय की जानकारी थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक दोहारिया इलाके की एक संकरी गली में, उनके घर से कुछ ही मीटर दूर, एक अन्य वाहन ने उनकी एसयूवी का रास्ता रोक दिया।

इसके बाद हथियारबंद हमलावर वाहन से उतरे और करीब से गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। जांचकर्ताओं के अनुसार 12 से 15 राउंड फायरिंग हुई, जिनमें से कम से कम पांच गोलियां रथ को लगीं।गाड़ी में मौजूद एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ। पुलिस का कहना है कि हमलावर यह सुनिश्चित करने के बाद कि रथ की मौत हो चुकी है, पहले से तैयार रखी गई मोटरसाइकिलों पर फरार हो गए।

पुलिस सीसीटीवी फुटेज और हमले में इस्तेमाल वाहनों की जांच कर रही है। जिस कार से रथ की एसयूवी को रोका गया था, उसे पुलिस ने जब्त कर लिया है। सूत्रों के अनुसार वाहन पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थी और उसके इंजन नंबर में भी छेड़छाड़ की गई थी।

शुभेंदु अधिकारी ने बताया ‘प्री-प्लांड मर्डर’

चंद्रनाथ रथ 2019 से शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी थे और उन्हें अधिकारी के राजनीतिक एवं संगठनात्मक दायरे का अहम हिस्सा माना जाता था।शुभेंदु अधिकारी ने इस हत्या को “पूर्व नियोजित हत्या” करार दिया। उन्होंने कहा कि हमले से पहले कई दिनों तक रेकी की गई थी और इसके पीछे राजनीतिक साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता।अधिकारी ने दावा किया कि गोलीबारी से पहले रथ पर “दो से तीन दिनों” तक नजर रखी जा रही थी।

भाजपा के वरिष्ठ नेता कौस्तव बागची ने मीडिया से बात करते हुए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को राज्य के मौजूदा राजनीतिक माहौल के लिए जिम्मेदार ठहराया।बागची ने आरोप लगाया कि हमले से पहले रथ की गाड़ी का पीछा किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती, भाजपा अपना विरोध और तेज करेगी।

टीएमसी ने भी मांगी CBI जांच

टीएमसी ने इस हत्या की निंदा करते हुए कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की।पार्टी ने बयान जारी कर कहा, “हम मध्यग्राम में चंद्रनाथ रथ की निर्मम हत्या की कड़ी निंदा करते हैं। पिछले तीन दिनों में चुनाव बाद की हिंसा में टीएमसी के तीन कार्यकर्ताओं की भी हत्या हुई है, जबकि आदर्श आचार संहिता लागू है। हम इस मामले में सख्त कार्रवाई और कोर्ट मॉनिटरिंग में सीबीआई जांच की मांग करते हैं ताकि दोषियों की जल्द पहचान कर उन्हें सजा दिलाई जा सके। लोकतंत्र में हिंसा और राजनीतिक हत्याओं की कोई जगह नहीं है।”

कांग्रेस ने भी जताई चिंता

पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने भी हत्या की निंदा करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।उन्होंने बयान में कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया, मतदान के दोनों चरणों और चुनाव परिणाम आने के बाद जो “खूनखराबा” देखने को मिला है, उसे तुरंत रोका जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि चुनाव अवधि के दौरान कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे चुनाव आयोग राज्य में बने “अशांत और तनावपूर्ण माहौल” से अपनी जिम्मेदारी नहीं टाल सकता।

शुभंकर सरकार ने पूरे बंगाल में सर्वदलीय शांति बैठकों की अपील करते हुए कहा कि लगातार जारी हिंसा जनता के लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर कर रही है।

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