शुभेंदु अधिकारी का ममता सरकार पर हमला, बंगाल पर थोपी जा रही है अरबी संस्कृति
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शुभेंदु अधिकारी का ममता सरकार पर हमला, 'बंगाल पर थोपी जा रही है अरबी संस्कृति'

बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल से लव जिहाद जैसे मुद्दों को खत्म करने का संकल्प लिया। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विरासत का हवाला देते हुए राज्य की आध्यात्मिक गरिमा को बहाल करने की बात कही।


पश्चिम बंगाल में सियासी सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी सरकार पर बड़ा वैचारिक हमला बोला। बंगाली नववर्ष यानी 'पोइला बैशाख' के खास मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में शुभेंदु ने टीएमसी पर बंगाल की पहचान बदलने का गंभीर आरोप लगाया।

"अरबी संस्कृति थोपने की कोशिश"

शुभेंदु अधिकारी ने 'मातृ शक्ति भरोसा कार्ड' (Matri Shakti Bharosa Card) लॉन्च करते हुए मीडिया से कहा कि मौजूदा सरकार राज्य की सनातन विरासत को व्यवस्थित रूप से कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा, "हम देख रहे हैं कि स्वामी विवेकानंद और श्री चैतन्य की इस पवित्र धरती पर उर्दू भाषा और एक ऐसी संस्कृति थोपी जा रही है जो महिलाओं को पर्दों में रखती है। यह हमारी बंगाली अस्मिता पर सीधा प्रहार है।"

श्यामा प्रसाद मुखर्जी और 1947 का जिक्र

अपने संबोधन में अधिकारी ने जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और स्वामी प्रणवानंद महाराज के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि 1947 में जिन्ना इस पूरे हिस्से को पाकिस्तान में मिलाना चाहते थे, लेकिन यह मुखर्जी के ही प्रयास थे कि पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना रहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि बीजेपी बंगाल को "बंगाली हिंदुओं की मातृभूमि" के रूप में सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

महिलाओं की सुरक्षा और 'लव जिहाद'

शुभेंदु ने टीएमसी की कल्याणकारी योजनाओं के जवाब में बीजेपी के 'मातृ शक्ति भरोसा कार्ड' को पेश किया। उन्होंने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा की गारंटी बताया। अधिकारी ने कड़े शब्दों में कहा, "इस नववर्ष पर हम अपनी माताओं और बहनों के खिलाफ होने वाले 'लव जिहाद' जैसे अत्याचारों को स्थायी रूप से समाप्त करने का संकल्प लेते हैं।"

सांस्कृतिक पुनरुत्थान का संकल्प

बीजेपी के 'संकल्प पत्र' (घोषणापत्र) का जिक्र करते हुए शुभेंदु ने इसे बंगाल की "खोई हुई गरिमा" को वापस लाने वाला दस्तावेज बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी का हवाला देते हुए कहा कि दक्षिणेश्वर और कालीघाट की आध्यात्मिक चेतना को फिर से जीवित किया जाएगा। गौर करने वाली बात यह है कि कालीघाट वही इलाका है जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आवास भी स्थित है।

शुभेंदु का यह बयान बंगाल में ध्रुवीकरण की राजनीति को और तेज कर सकता है, क्योंकि उन्होंने स्पष्ट रूप से सांस्कृतिक और भाषाई मुद्दों को आने वाले चुनावों के केंद्र में रख दिया है।

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