
सिर्फ समर्थन नहीं, सत्ता चाहिए! VCK की दो टूक 'सही फैसला लें CM विजय
सांसद डी. रविकुमार का बड़ा बयान सामने आया है। उनका कहना है कि 'दलित मुख्यमंत्री के लिए अभी तैयार नहीं है तमिलनाडु का समाज', गठबंधन बदलने पर दी स्पष्ट राय।
विदुथलाई चिरुथैगल कच्ची (VCK) के वरिष्ठ नेता और विल्लुपुरम से सांसद डी. रविकुमार ने तमिलनाडु की नई राजनीतिक परिस्थितियों पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने जोर देकर कहा कि वीसीके अब केवल बाहर से समर्थन देने के बजाय टीवीके (TVK) के नेतृत्व वाली नई सरकार में सक्रिय भागीदारी और कैबिनेट पद चाहती है। रविकुमार ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी अब मूकदर्शक बनकर किनारे पर नहीं बैठ सकती। उन्होंने कहा कि "बाहरी समर्थन" का विचार उन्हें व्यक्तिगत रूप से पसंद नहीं है। क्योंकि ऐसी स्थिति में पार्टी सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की भूमिका निभाने की कोशिश करती है, जो स्वस्थ राजनीति नहीं है। उनके अनुसार, यदि आप किसी सरकार का समर्थन करते हैं तो आपको उसमें शामिल होना चाहिए। उन्होंने यह बात अपनी पार्टी के प्रमुख थोल थिरुमावलवन तक भी पहुँचा दी है।
डीएमके से गठबंधन तोड़ने और टीवीके के साथ आने पर रुख
रविकुमार ने गठबंधन बदलने की चुनौतियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वीसीके लंबे समय से द्रमुक (DMK) गठबंधन का हिस्सा रही है। लेकिन पिछली सरकार में उन्हें कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकी थी। अब पार्टी उस अवसर को दोबारा नहीं खोना चाहती। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीवीके और डीएमके दोनों के साथ एक साथ संबंध रखना संभव नहीं है। टीवीके का समर्थन करने का सीधा अर्थ है गठबंधन को पूरी तरह बदलना। चूंकि पार्टी के विधायक एक अलग जनादेश के तहत चुने गए थे। इसलिए इस बदलाव के लिए राजनीतिक सुविधा के बजाय एक ईमानदार और तार्किक आधार की आवश्यकता है। विशेषकर आगामी स्थानीय निकाय और 2029 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए।
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के लिए सलाह: अन्नाद्रमुक विद्रोहियों का प्रवेश वर्जित
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय को सलाह देते हुए सांसद रविकुमार ने स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी कैबिनेट में अन्नाद्रमुक (AIADMK) से अलग हुए नेताओं को जगह नहीं देनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि टीवीके पहले ही विश्वास मत जीत चुकी है और उसके पास पर्याप्त संख्या बल है। यदि विजय ऐसे नेताओं को शामिल करते हैं तो इससे उनकी छवि खराब हो सकती है और सरकार का नाम भी धूमिल हो सकता है। हालांकि, उन्होंने एएमएमके (AMMK) जैसे छोटे संगठनों के नेताओं के व्यक्तिगत रूप से शामिल होने और किसी पूरे गुट को शामिल करने के बीच अंतर बताया और कहा कि इन्हें एक समान नहीं माना जाना चाहिए।
तमिलनाडु में सामाजिक न्याय और दलित मुख्यमंत्री का प्रश्न
तमिलनाडु की सामाजिक संरचना पर टिप्पणी करते हुए रविकुमार ने काफी कड़वा सच साझा किया। उन्होंने कहा कि भले ही तमिलनाडु सामाजिक न्याय की बात गर्व से करता हो लेकिन यह समाज आज भी गहरे जातिवाद से ग्रस्त है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि दलित समुदाय की आबादी 20 प्रतिशत से अधिक होने के बावजूद, समाज अभी भी एक दलित मुख्यमंत्री को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि गठबंधन की राजनीति के विचार को हकीकत बनने में एक दशक लगा और संभवतः एक दलित मुख्यमंत्री को स्वीकार करने में समाज को अगले दो या तीन दशक और लग सकते हैं।
विजय की राजनीति और द्रविड़ विचारधारा पर संदेह
रविकुमार ने जोसेफ विजय के उदय को तमिलनाडु की सिनेमा-नायक पूजा की परंपरा (एमजीआर और जयललिता की तरह) से जोड़कर देखा। उन्होंने विजय को एक अन्य द्रविड़ राजनीतिज्ञ के रूप में देखा जो पेरियार, अंबेडकर और अन्ना का नाम लेते हैं और भाजपा से दूरी बनाए रखते हैं। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विजय का द्रविड़ प्रेम केवल प्रतीकात्मक है या वास्तविक? उन्होंने कहा कि विजय की प्रतिबद्धता का फैसला इस बात से होगा कि वह हिंदी थोपे जाने का विरोध कैसे करते हैं, केंद्र के दबाव का सामना कैसे करते हैं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) तथा PM SHRI समझौतों पर क्या रुख अपनाते हैं।
मीडिया कवरेज और भविष्य की राजनीति
सांसद ने पिछले 10 दिनों में वीसीके की स्थिति को लेकर मीडिया में चली खबरों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा बिना किसी सबूत के वीसीके पर 'हॉर्स-ट्रेडिंग' (विधायकों की खरीद-फरोख्त) के आरोप लगाना दर्दनाक था। भविष्य की राजनीति पर उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में त्रिकोणीय मुकाबला ही वीसीके जैसे छोटे दलों के लिए राजनीतिक स्थान और प्रभाव सुनिश्चित करता है। उन्हें नहीं लगता कि अन्नाद्रमुक इतनी आसानी से गायब हो जाएगी। क्योंकि उसका ग्रामीण ढांचा अभी भी मजबूत है।

