क्या तमिलनाडु का निवेश जा रहा है आंध्र प्रदेश? जानें दावों का सच
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क्या तमिलनाडु का निवेश जा रहा है आंध्र प्रदेश? जानें दावों का सच

सीएम विजय के शपथ लेते ही प्रोजेक्ट्स आंध्र प्रदेश शिफ्ट होने के विपक्ष के आरोपों को उद्योग विभाग ने नकारा; टाइमलाइंस के साथ सामने रखी हर बड़े सौदे की हकीकत.


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Tamil Nadu Politics: अभिनेता से राजनेता बने सी जोसेफ विजय और उनकी पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) के नेतृत्व वाली नई सरकार को सत्ता संभाले अभी कुछ ही हफ्ते हुए हैं, लेकिन राज्य में औद्योगिक निवेश को लेकर एक बड़ा सियासी संग्राम छिड़ गया है. तमिलनाडु के विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि 10 मई 2026 को विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही राज्य से कई बड़े और हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट्स पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में शिफ्ट हो गए हैं.


हालांकि, तमिलनाडु उद्योग विभाग के अधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. सरकारी आंकड़ों और टाइमलाइंस के मुताबिक, जिन प्रोजेक्ट्स को विजय सरकार की नाकामी बताया जा रहा है, वे महीनों या सालों पहले ही आंध्र प्रदेश को आवंटित हो चुके थे.


दावा बनाम हकीकत: प्रमुख प्रोजेक्ट्स की असली टाइमलाइन
विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे बड़े प्रोजेक्ट्स और उनकी असल हकीकत इस प्रकार है:

रिलायंस सोलर बैटरी प्रोजेक्ट (₹56,300 करोड़):
विपक्ष का आरोप है कि यह बड़ा प्रोजेक्ट हाथ से निकल गया. हकीकत: आंध्र प्रदेश सरकार ने इस प्रोजेक्ट को 6 मई 2026 को ही मंजूरी दे दी थी, यानी सीएम विजय के कार्यभार संभालने से चार दिन पहले.

अडानी पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो प्रोजेक्ट (₹12,000 करोड़): हकीकत: इस प्रोजेक्ट का समझौता (MoU) साल 2022 में ही आंध्र प्रदेश के साथ साइन हो गया था. 20 मई 2026 को इसे सिर्फ अंतिम मंजूरी मिली है, यह तमिलनाडु से शिफ्ट नहीं हुआ.

गूगल (₹1.5 लाख करोड़) और ग्रीन एनर्जी वेव (₹2 लाख करोड़): हकीकत: गूगल ने विशाखापत्तनम के लिए अप्रैल 2025 में और ग्रीन एनर्जी ने 2024 में ही आंध्र प्रदेश के साथ डील पक्की कर ली थी. इसका नई सरकार के गठन से कोई लेना-देना नहीं है.

रॉयल एनफील्ड (₹2,200 करोड़) और अपोलो टायर्स (₹5,000 करोड़): इन दोनों कंपनियों के विस्तार प्रोजेक्ट्स को भी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही आंध्र प्रदेश में जमीन और मंजूरी मिल चुकी थी.

मझागांव और DRDO प्रोजेक्ट: जहां फंसा तमिलनाडु का पेंच
दस्तावेजों के मुताबिक, दो ऐसे प्रोजेक्ट्स जरूर हैं जहां तमिलनाडु की पिछली डीएमके (DMK) सरकार की प्रशासनिक सुस्ती का फायदा आंध्र प्रदेश को मिला:

मझागांव डॉक शिपयार्ड (₹15,000-18,000 करोड़): सितंबर 2025 में तत्कालीन डीएमके सरकार ने थूथुकुडी में इस शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट के लिए समझौता किया था. लेकिन जमीन आवंटन में देरी और विदेशी कंपनी हुंडई को प्राथमिकता देने के आरोपों के चलते यह प्रोजेक्ट अंततः आंध्र प्रदेश चला गया.

DRDO डिफेंस एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट: डीआरडीओ ने 2023 में तमिलनाडु से जमीन मांगी थी, लेकिन समय पर जमीन न मिलने के कारण 6 मई 2026 को आंध्र प्रदेश ने तुरंत 600 एकड़ जमीन आवंटित कर इस बड़े निवेश को अपने नाम कर लिया.

आगे की राह: विजय सरकार का काउंटर-प्लान
जहां एक तरफ विपक्ष लगातार हमलावर है, वहीं सीएम विजय की नई सरकार ने भी मोर्चेबंदी शुरू कर दी है. सरकार ने अपनी शुरुआती कामयाबी के तौर पर देश की दिग्गज इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के साथ ₹18,600 करोड़ के एक बड़े निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

औद्योगिक विश्लेषकों का मानना है कि आंध्र प्रदेश में मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, तुरंत जमीन की उपलब्धता और आक्रामक नीतियों के कारण निवेश तेजी से बढ़ रहा है. अब देखना यह होगा कि आने वाले महीनों में सीएम विजय तमिलनाडु की औद्योगिक साख को बचाने के लिए क्या नई रणनीति अपनाते हैं.

(ऊपर दिया गया कंटेंट एक फाइन-ट्यून्ड AI मॉडल का इस्तेमाल करके वीडियो से ट्रांसक्राइब किया गया है। एक्यूरेसी, क्वालिटी और एडिटोरियल इंटीग्रिटी पक्का करने के लिए, हम ह्यूमन-इन-द-लूप (HITL) प्रोसेस का इस्तेमाल करते हैं। AI शुरुआती ड्राफ्ट बनाने में मदद करता है, जबकि हमारी अनुभवी एडिटोरियल टीम पब्लिकेशन से पहले कंटेंट को ध्यान से रिव्यू, एडिट और बेहतर बनाती है। द फेडरल में, हम भरोसेमंद और इनसाइटफुल जर्नलिज़्म देने के लिए AI की एफिशिएंसी को ह्यूमन एडिटर्स की एक्सपर्टीज़ के साथ मिलाते हैं।)


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