
पिंक पेट्रोल से आगे बढ़ा तमिलनाडु, अब सिंगापेन फोर्स संभालेगी मोर्चा
तमिलनाडु सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए 354 करोड़ रुपये की सिंगापेन स्पेशल फोर्स शुरू की है, जो त्वरित कार्रवाई और निगरानी पर काम करेगी।
तमिलनाडु सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से एक नई पहल की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ‘सिंगापेन स्पेशल फोर्स’ नामक एक विशेष महिला सुरक्षा इकाई लॉन्च की है। इसे पूरी तरह महिला कर्मियों वाली एक त्वरित प्रतिक्रिया (रैपिड रिस्पॉन्स) इकाई के रूप में पेश किया गया है, जो महिलाओं की सुरक्षा के लिए राज्य की लंबे समय से चली आ रही महिला-केंद्रित पुलिसिंग परंपरा को आगे बढ़ाएगी।
इस पहल का औपचारिक शुभारंभ मंगलवार (9 जून) को चेन्नई के एग्मोर स्थित राजा रथिनम स्टेडियम में किया गया। सरकार का कहना है कि यह बल महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रोकथाम आधारित कार्रवाई, त्वरित प्रतिक्रिया, सामुदायिक सहभागिता और उन्नत निगरानी प्रणाली पर विशेष ध्यान देगा।
महिला सुरक्षा में तमिलनाडु की पुरानी पहल
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर तमिलनाडु लंबे समय से देश में अग्रणी राज्यों में गिना जाता रहा है। राज्य ने दशकों पहले महिला पुलिस थानों की शुरुआत की थी और समय-समय पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई विशेष योजनाएं लागू की हैं।
‘अम्मा पेट्रोल’ की शुरुआत
वर्ष 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के कार्यकाल में ‘अम्मा पेट्रोल’ योजना शुरू की गई थी। इसके तहत गुलाबी रंग की टोयोटा इनोवा गाड़ियों को महिलाओं की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था। इन वाहनों में महिला पुलिसकर्मी मौजूद रहती थीं और आधुनिक निगरानी तकनीक से लैस थीं।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर त्वरित प्रतिक्रिया देना था। चेन्नई सहित कई क्षेत्रों में इसे केंद्र सरकार के निर्भया फंड के सहयोग से संचालित किया गया।
‘पिंक पेट्रोल’ का विस्तार
बाद में द्रमुक (डीएमके) सरकार के दौरान मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस पहल का विस्तार करते हुए ‘पिंक पेट्रोल’ कार्यक्रम शुरू किया।इसके तहत कोयंबटूर, मदुरै और अन्य प्रमुख शहरों में अतिरिक्त वाहन तैनात किए गए, जिससे चौबीसों घंटे गश्त और आपातकालीन कॉल पर तेज प्रतिक्रिया संभव हो सकी।इन दोनों पहलों ने तमिलनाडु में महिला सुरक्षा के मौजूदा ढांचे को मजबूत किया और सिंगापेन स्पेशल फोर्स की नींव तैयार की।
क्या है सिंगापेन स्पेशल फोर्स?
सरकार ने सिंगापेन स्पेशल फोर्स को एक विशेष, उच्च प्रशिक्षित और पूरी तरह महिला कर्मियों वाली त्वरित प्रतिक्रिया इकाई के रूप में पेश किया है।लॉन्च कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विजय ने कहा, "सिंगापेन स्पेशल फोर्स के लिए पहले चरण में 354 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। दूसरे चरण में 2,500 रोजगार अवसर सृजित किए जाएंगे। महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। यह बल महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली मौजूदा संस्थाओं के लिए अतिरिक्त सहयोगी तंत्र के रूप में कार्य करेगा।"
सरकार के अनुसार यह बल स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों और अपराध संभावित क्षेत्रों में रोकथाम आधारित कार्रवाई करेगा। साथ ही सीसीटीवी निगरानी, सामुदायिक जुड़ाव और अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई को भी मजबूत बनाया जाएगा।इसकी प्रशासनिक संरचना में पुलिस मुख्यालय स्तर पर नए पद सृजित किए जाएंगे और इसका नेतृत्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। इसमें पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के. भवानीश्वरी प्रमुख भूमिका निभाएंगी।
पहले की योजनाओं से कैसे अलग है यह फोर्स?
सरकार का दावा है कि सिंगापेन स्पेशल फोर्स केवल वाहन आधारित गश्ती व्यवस्था तक सीमित नहीं होगी, जैसा कि अम्मा पेट्रोल और पिंक पेट्रोल मॉडल में था।इसकी सबसे बड़ी विशेषता मुख्यमंत्री स्तर पर प्रत्यक्ष निगरानी है। अधिकारियों का मानना है कि इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया, संसाधनों के आवंटन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय में सुधार होगा।
इसके अलावा यह बल केवल आपातकालीन प्रतिक्रिया पर केंद्रित नहीं रहेगा, बल्कि स्कूल सुरक्षा, अपराध की रोकथाम और सामुदायिक जागरूकता पर भी विशेष जोर देगा।एक अन्य महत्वपूर्ण अंतर इसका राज्यव्यापी स्वरूप है। जहां पहले की योजनाएं मुख्य रूप से चुनिंदा शहरी क्षेत्रों तक सीमित थीं, वहीं सिंगापेन स्पेशल फोर्स को पूरे तमिलनाडु में व्यापक अधिकार और जिम्मेदारियों के साथ स्थापित किया जा रहा है।
उठ रहे हैं कुछ सवाल भी
हालांकि इस पहल का स्वागत किया गया है, लेकिन कुछ वर्गों ने इसकी आलोचना भी की है।आलोचकों का कहना है कि यह कार्यक्रम काफी हद तक पहले से मौजूद ढांचे और संसाधनों पर आधारित है, लेकिन इसे नई पहल के रूप में पेश किया जा रहा है। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या यह वास्तव में कोई बड़ा सुधार है या फिर पुराने कार्यक्रमों की नई ब्रांडिंग भर है।
महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध चिंता का विषय
यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब तमिलनाडु में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर चिंता बढ़ रही है।राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में महिलाओं के खिलाफ दर्ज अपराधों में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई और मामलों की संख्या 11,000 से अधिक पहुंच गई। महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर 29.4 प्रति लाख महिला आबादी दर्ज की गई।
छेड़छाड़, पॉक्सो (POCSO) कानून से जुड़े मामले और यौन हिंसा जैसी घटनाएं अब भी गंभीर चुनौती बनी हुई हैं, जबकि आरोप-पत्र दाखिल करने की दर अपेक्षाकृत अधिक है।
सफलता का असली पैमाना क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि दृश्यमान पुलिसिंग, विशेष प्रतिक्रिया दल और त्वरित हस्तक्षेप अपराधियों को हतोत्साहित करने तथा जनता का भरोसा बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।हालांकि उनका यह भी कहना है कि इस योजना की दीर्घकालिक सफलता पर्याप्त पुलिस बल, बेहतर प्रशिक्षण, निरंतर वित्तीय सहायता, जन-जागरूकता और सामाजिक सोच में बदलाव पर निर्भर करेगी।
अब जब तमिलनाडु सरकार सिंगापेन स्पेशल फोर्स को लागू कर रही है, तो इसकी वास्तविक सफलता का आकलन जमीनी नतीजों के आधार पर होगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह नई पहल राज्य की महिलाओं को पहले से अधिक सुरक्षित महसूस करा पाएगी और अपराधों में वास्तविक कमी ला सकेगी।

