तमिलनाडु में सरकार गठन संग्राम के बीच, अचानक हटाई गई विजय की सुरक्षा
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फाइल फोटो।

तमिलनाडु में सरकार गठन संग्राम के बीच, अचानक हटाई गई विजय की सुरक्षा

TVK नेताओं के अनुसार, 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद विजय को मुख्यमंत्री स्तर की सुरक्षा प्रदान की गई थी...


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तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक खींचतान के बीच अभिनेता-राजनेता विजय की सुरक्षा अचानक वापस ले ली गई है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) 2026 विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बाद सरकार बनाने की कोशिश कर रही है।

TVK नेताओं के अनुसार, 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद विजय को मुख्यमंत्री स्तर की सुरक्षा प्रदान की गई थी।

तमिलनाडु में चुनाव बाद का राजनीतिक घटनाक्रम अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। अभिनेता-राजनेता विजय को दी गई विशेष सुरक्षा अचानक वापस लिए जाने के बाद राजनीतिक अटकलें और सार्वजनिक बहस तेज हो गई है। यह फैसला उस महत्वपूर्ण समय में लिया गया, जब उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार बनाने की दिशा में प्रयास कर रही है।

विधानसभा चुनाव में TVK ने 107 सीटें जीती थीं। बाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के समर्थन के बाद पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़कर 112 हो गई। हालांकि सरकार बनाने के लिए आवश्यक 118 सीटों के बहुमत के आंकड़े से पार्टी अब भी छह सीट पीछे है।

इसी बीच चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद विजय के लिए की गई विशेष सुरक्षा व्यवस्था अचानक हटा ली गई, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा और अटकलों का दौर शुरू हो गया।

TVK नेताओं का कहना है कि 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद विजय को मुख्यमंत्री स्तर की सुरक्षा दी गई थी। उनके आवास के बाहर आठ से अधिक एस्कॉर्ट वाहन तैनात किए गए थे और चेन्नई में उनकी आवाजाही के लिए विशेष पुलिस व्यवस्था की गई थी।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जब भी विजय अपने कार्यालय और आवास के बीच यात्रा करते थे, उनके साथ वही सुरक्षा काफिला चलता था जो किसी कार्यरत मुख्यमंत्री को उपलब्ध कराया जाता है।

हालांकि 6 मई की रात कांग्रेस द्वारा औपचारिक रूप से TVK को समर्थन देने की घोषणा के तुरंत बाद यह अतिरिक्त सुरक्षा हटा ली गई।

काफिले के वाहन वापस बुला लिए गए, अतिरिक्त पुलिस बल हटा दिया गया और अगले ही दिन विजय के आवास के बाहर लगाया गया मेटल डिटेक्टर भी कथित रूप से हटा लिया गया।

बताया गया कि उसी रात जब विजय अपने सैंथोम स्थित आवास से ईस्ट कोस्ट रोड स्थित घर गए, तब वे बिना किसी सुरक्षा काफिले के केवल एक निजी वाहन में यात्रा करते दिखे।

बाद में TVK नेताओं ने कहा कि अतिरिक्त सुरक्षा हटाने का अनुरोध स्वयं विजय ने किया था। हालांकि फैसले के अचानक समय ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार, राजभवन के अधिकारियों ने सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले विजय को मुख्यमंत्री स्तर की सुरक्षा दिए जाने को लेकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से सवाल पूछे।

बताया गया कि अधिकारियों से यह भी पूछा गया कि आदर्श आचार संहिता लागू रहने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने से पहले चुनाव आयोग और राज्यपाल कार्यालय को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।

इन घटनाक्रमों ने तमिलनाडु में जारी सरकार गठन प्रक्रिया को लेकर राजभवन और राजनीतिक दलों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

अनिश्चितता को और बढ़ाते हुए ऐसी खबरें भी सामने आईं कि दो IAS अधिकारियों का तबादला व्यापक प्रशासनिक परामर्श के बिना कर दिया गया, जिससे राज्य की नौकरशाही के कुछ हिस्सों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।

इसी बीच TVK बहुमत साबित करने के लिए आवश्यक समर्थन जुटाने हेतु कई दलों के साथ बातचीत जारी रखे हुए है।

बताया जा रहा है कि राज्यपाल ने विजय से औपचारिक रूप से सरकार गठन का निमंत्रण देने से पहले 118 विधायकों के समर्थन का स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है।

तमिलनाडु में जारी यह राजनीतिक अनिश्चितता अब तीखी बहस का विषय बन चुकी है। विपक्षी दल राजभवन पर प्रक्रिया में देरी करने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि राजभवन समर्थकों का कहना है कि संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।

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