
TET की तलवार लटकी, लाखों शिक्षकों को राहत कब मिलेगी?
टेट परीक्षा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षकों के सामने चुनौती बढ़ गई है। शिक्षक संघों की मांग है कि राज्य और केंद्र सरकार उनकी मदद के लिए रास्ते तलाशे।
शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले ने देशभर के लाखों शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि सेवा में बने रहने के लिए सभी शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। इस फैसले के बाद विभिन्न राज्यों में कार्यरत उन शिक्षकों की नौकरी और पेंशन पर सवाल खड़े हो गए हैं, जिन्होंने अभी तक टीईटी पास नहीं किया है।
बताया जा रहा है कि इस फैसले का असर देशभर में 20 लाख से अधिक शिक्षकों पर पड़ सकता है। इनमें उत्तर प्रदेश के करीब 1.86 लाख, मध्य प्रदेश के 1.5 लाख, छत्तीसगढ़ के 85 हजार और झारखंड के लगभग 40 हजार शिक्षक शामिल हैं।
शिक्षकों को राहत देने के लिए सरकारें तलाश रहीं समाधान
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकारें और शिक्षा विभाग प्रभावित शिक्षकों को राहत देने के लिए संभावित विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विशेष रूप से छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग समेत कई राज्यों में तीन प्रमुख प्रस्तावों पर गंभीर मंथन चल रहा है।
विभागीय सीमित पात्रता परीक्षा का विकल्प
शिक्षक संगठनों की मांग है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए सामान्य टीईटी के बजाय एक विशेष विभागीय सीमित शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की जाए।
संघों का तर्क है कि वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों का मूल्यांकन अलग तरीके से किया जाना चाहिए। सरकार इस प्रस्ताव के कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा कर रही है।
पासिंग मार्क्स में छूट देने पर विचार
दूसरा विकल्प टीईटी परीक्षा के न्यूनतम उत्तीर्णांक (Passing Marks) में राहत देने का है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि अनुभवी शिक्षकों को सामान्य अभ्यर्थियों के समान मानदंड पर परखना उचित नहीं होगा। इसलिए उनके लिए न्यूनतम अंकों में कुछ छूट देने पर चर्चा चल रही है।
नियमित अंतराल पर परीक्षा आयोजित करना
तीसरे विकल्प के तहत शिक्षकों को पर्याप्त अवसर देने के लिए नियमित अंतराल पर टीईटी परीक्षा आयोजित करने की योजना पर विचार हो रहा है।
इसके लिए बीएड संगठनों और शिक्षक संघों से भी सुझाव लिए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक शिक्षक निर्धारित समयसीमा के भीतर परीक्षा पास कर सकें।
अध्यादेश लाने की मांग तेज
इस बीच, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने केंद्र सरकार से संसद में अध्यादेश लाकर शिक्षकों को राहत देने की मांग की है।
महासंघ का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अचानक अयोग्य नहीं माना जा सकता। शिक्षक संगठन इस मुद्दे पर संयुक्त आंदोलन की रणनीति भी तैयार कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने डेडलाइन बढ़ाकर दी राहत
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी से छूट देने की मांग स्वीकार नहीं की, लेकिन शिक्षकों को एक महत्वपूर्ण राहत जरूर दी है।
अदालत ने टीईटी पास करने की अंतिम समय-सीमा को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है।
पुरानी समय-सीमा: 31 अगस्त 2027
नई समय-सीमा: 31 अगस्त 2028
इस फैसले से शिक्षकों को परीक्षा की तैयारी और योग्यता प्रमाणित करने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।
राज्यों को साल में दो बार TET कराने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे वर्ष में कम से कम दो बार टीईटी परीक्षा आयोजित करें।
अदालत का मानना है कि यदि नियमित रूप से परीक्षा आयोजित होगी तो शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिलेंगे और वे निर्धारित समयसीमा तक टीईटी पास कर अपनी नौकरी सुरक्षित रख सकेंगे।
अब सरकारों के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल शिक्षकों और शिक्षा विभाग की नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य सरकारें विभागीय परीक्षा और पासिंग मार्क्स में राहत जैसे विकल्पों पर कब अंतिम निर्णय लेती हैं।
यदि इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो लाखों शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं यदि ऐसा नहीं हुआ तो 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना उनके लिए अनिवार्य होगा।

