कोलीवुड से सत्ता तक, थलपति विजय ने बदली तमिलनाडु की राजनीति
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कोलीवुड से सत्ता तक, थलपति विजय ने बदली तमिलनाडु की राजनीति

थलपति विजय की TVK ने अपने पहले चुनाव में शानदार प्रदर्शन कर तमिलनाडु की राजनीति बदल दी। अब विजय सरकार बनाने की तैयारी में हैं।


तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव की पटकथा लिख दी है। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने अपने पहले ही चुनाव में ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया।

चुनावी नतीजों ने बदली राजनीति की दिशा

सोमवार, 4 मई की सुबह तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे आ रहे थे। एक शेयर ऑटो में बैठा कॉलेज छात्र चुनावी परिणामों को ऐसे देख रहा था जैसे कोई रोमांचक टी20 क्रिकेट मैच चल रहा हो। यह दृश्य बताता है कि आज तमिलनाडु में राजनीति युवाओं के लिए कितनी आकर्षक और भावनात्मक हो चुकी है।

तमिलनाडु लंबे समय से अपने जीवंत लोकतांत्रिक माहौल के लिए जाना जाता है। यही माहौल शायद विजय को कोडंबक्कम (कोलीवुड का केंद्र) से फोर्ट सेंट जॉर्ज तक ले आया, जो तमिलनाडु की सत्ता का प्रतीक माना जाता है।TVK ने इस चुनाव में 1.72 करोड़ वोट हासिल किए, जो कुल मतों का 34.92 प्रतिशत है। वहीं, DMK को 1.19 करोड़ वोट और 24.19 प्रतिशत वोट शेयर मिला।

विजय की पार्टी ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर सबको चौंका दिया। अब कांग्रेस और अन्य दलों के समर्थन से विजय सरकार बनाने की तैयारी में हैं।

फिल्मों से राजनीति तक का सफर

हालांकि TVK केवल दो साल पुरानी पार्टी है, लेकिन विजय राजनीति में नए नहीं माने जाते। साल 2009 में उन्होंने अपने फैन क्लबों को “विजय मक्कल इयक्कम” नामक जन आंदोलन में बदल दिया था।यह संगठन शुरू से ही जमीनी स्तर पर सक्रिय रहा और सामाजिक कल्याण के काम करता रहा।

फिल्मों में विजय भले ही एक्शन और मनोरंजन करते नजर आए, लेकिन उनकी फिल्मों में सामाजिक और राजनीतिक संदेश हमेशा मौजूद रहे। अस्पृश्यता, भ्रष्टाचार, नशाखोरी और आतंकवाद जैसे मुद्दे उनकी फिल्मों का हिस्सा बने।‘सरकार’, ‘मर्सल’, ‘मास्टर’ और आने वाली फिल्म ‘जना नायकन’ जैसी फिल्मों को खुलकर राजनीतिक माना जाता है।

स्टारडम बना सबसे बड़ा हथियार

फिल्म फैन संस्कृति पर रिसर्च करने वाली लेखिका रूस गेरिट्सेन के अनुसार, लोग फिल्मों और लगातार दिखने वाली छवियों के जरिए सितारों से भावनात्मक रिश्ता बना लेते हैं। विजय के मामले में यह रिश्ता बेहद मजबूत साबित हुआ।चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और गरीब वर्ग ने द्रविड़ राजनीति के सामाजिक न्याय और संघवाद जैसे नारों से ज्यादा विजय के साथ बने उस भावनात्मक जुड़ाव को प्राथमिकता दी।

बच्चों से वोट की अपील और विवाद

एक चुनावी रैली में विजय ने बच्चों से कहा था कि वे अपने माता-पिता से उन्हें वोट देने की अपील करें। इस पर ‘चाइल्ड राइट्स वॉच’ नामक संगठन ने शिकायत दर्ज कराई थी कि TVK बच्चों का भावनात्मक इस्तेमाल कर रही है।हालांकि यह रणनीति सफल साबित हुई।चेन्नई की टैक्सी ड्राइवर टी. साइरा बानो ने बताया कि उनकी 12 वर्षीय बेटी ने उनसे विजय को वोट देने की अपील की थी।

उन्होंने कहा, “मेरी बेटी ने पहली बार मुझसे कुछ मांगा था। उसने कहा कि मैं विजय को वोट दूं। मैंने व्हिसल सिंबल पर वोट दिया और मेरे कई दोस्तों ने भी उसी की अपील पर TVK को वोट दिया।”

सोशल मीडिया ने निभाई बड़ी भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि विजय की जीत में सोशल मीडिया ने अहम भूमिका निभाई।कृष्णागिरी के मीडिया विशेषज्ञ अरंगनाथन के अनुसार, सोशल नेटवर्क के जरिए सूचना तक आसान पहुंच ने युवा मतदाताओं को तेजी से प्रभावित किया।

“उम्मीदवार कोई भी हो, वोट विजय को”

चेन्नई के टैक्सी चालक विजय काव्यान पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं में शामिल थे। वह वोट डालने के लिए अपने गांव तिरुवन्नामलाई गए।उन्होंने कहा, “मुझे TVK उम्मीदवार का नाम भी नहीं पता था। मैं सिर्फ व्हिसल सिंबल पर वोट डालने गया था।”तमिलनाडु में करीब 14 लाख नए मतदाता थे और उनमें बड़ी संख्या विजय से प्रभावित दिखी।

विजय ने अपनी रैलियों में कहा था, “आप जहां भी वोट देंगे, उम्मीदवार मैं ही हूं।”मतदाताओं ने इस बात को पूरी तरह स्वीकार किया।

स्टालिन सरकार ने तैयार की जमीन

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जहां विजय ने अपने स्टारडम के दम पर राजनीति में जगह बनाई, वहीं मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की सरकार ने अनजाने में उनके लिए जमीन तैयार कर दी।स्टालिन ने तमिलनाडु को एक अलग सांस्कृतिक पहचान वाले राज्य के रूप में पेश किया और केंद्र सरकार के मुकाबले राज्य के अधिकारों पर जोर दिया।उनके शासनकाल में तमिलनाडु की GDP वृद्धि दर करीब 11 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 7.5 प्रतिशत से काफी अधिक थी।

स्टालिन ने शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास पर फोकस किया, जबकि उनके बेटे और उपमुख्यमंत्री उधयनिधि स्टालिन ने खेल ढांचे को मजबूत करने की कोशिश की।

भावनात्मक राजनीति ने दिलाई जीत

विजय ने भी महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और शिक्षा सहायता जैसी कई लोकलुभावन योजनाओं का वादा किया, लेकिन उनका सबसे बड़ा हथियार भावनात्मक अपील रही।उन्होंने खुद दो सीटों से चुनाव लड़ा और बाकी अधिकांश टिकट आम लोगों को दिए।

कई उम्मीदवारों के पास प्रचार के लिए पर्याप्त संसाधन भी नहीं थे। फिर भी लोग उम्मीदवार नहीं, बल्कि विजय के नाम और “व्हिसल” चुनाव चिन्ह को वोट दे रहे थे।यही वजह रही कि पहली बार चुनाव लड़ने वाली TVK तमिलनाडु की राजनीति में सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी।

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