
क्या है वह लॉटरी केस जिसने मार्टिन परिवार को फिर सुर्खियों में ला दिया?
सैंटियागो मार्टिन, जो लंबे समय से सार्वजनिक जीवन और मीडिया की चकाचौंध से दूर थे, उन्हें आखिरी बार 10 मई 2026 को अभिनेता से नेता बने विजय के मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में देखा गया था।
भारत के सबसे बड़े और विवादित कारोबारी साम्राज्यों में से एक के मालिक, "लॉटरी किंग" सैंटियागो मार्टिन एक बार फिर देश की सुर्खियों में हैं। इस बार मामला ₹457 करोड़ मूल्य की जब्त संपत्तियों से जुड़ी एक बड़ी कानूनी लड़ाई का है, जिसने मार्टिन परिवार और उनके गहरे राजनीतिक रसूख को एक बार फिर जनता और मीडिया के सामने ला खड़ा किया है।
इस पूरे विवाद की ताजा वजह मद्रास हाई कोर्ट का एक बड़ा फैसला है। मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी के नेतृत्व वाली पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने केंद्रीय एजेंसी को छह हफ्ते का समय दिया है ताकि वह सैंटियागो मार्टिन, उनकी पत्नी लीमा रोज और उनकी बेटी डेज़ी आधाव अर्जुना द्वारा दायर की गई 39 अपीलों के समूह पर अपना जवाब दाखिल कर सके। मार्टिन परिवार पिछले कई सालों से अपनी संपत्तियों को फ्रीज (जब्त) किए जाने के खिलाफ ट्रिब्यूनल और अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
लेकिन यह मामला सिर्फ एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया नहीं है। भारत की लगभग हर बड़ी राजनीतिक पार्टी के साथ मार्टिन परिवार के गहरे वित्तीय संबंध हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि सैंटियागो मार्टिन के दामाद, आधाव अर्जुना, तमिलनाडु में महज एक महीने पहले बनी थलपति जोसेफ विजय की सरकार में एक ताकतवर कैबिनेट मंत्री हैं। इस वजह से इस कानूनी नोटिस ने राजनीतिक गलियारों में भूकंप ला दिया है।
क्या है पूरा मामला?
इस पूरे विवाद की जड़ें एक दशक से भी ज्यादा पुरानी हैं। साल 2014 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक एफआईआर (FIR) दर्ज की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि सिक्किम राज्य की लॉटरी को केरल में अवैध रूप से बेचा जा रहा था। इतना ही नहीं, यह भी आरोप था कि लॉटरी के प्राइज-विनिंग (इनाम जीतने वाले) टिकटों के दावों को फर्जी तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया, जिससे सिक्किम सरकार को करीब ₹910 करोड़ के राजस्व (Revenue) का भारी नुकसान हुआ।
इसी मामले को आधार बनाकर अगस्त 2014 में ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अपनी जांच शुरू की और मार्टिन परिवार व उनकी कंपनियों से जुड़ी करोड़ों रुपये की संपत्तियों को कुर्क (Attach) करना शुरू कर दिया।
मार्टिन परिवार का इस मामले में तर्क है कि ED ने अपनी सीमा से बाहर जाकर जांच की है, क्योंकि मूल मामला सीबीआई के अधिकार क्षेत्र में आता है। परिवार का यह भी कहना है कि सीबीआई की चार्जशीट केवल पहले और दूसरे पुरस्कार वाले टिकटों की हेराफेरी तक सीमित थी, जबकि ईडी उन दावों की भी जांच कर रही है जो ₹5,000 से कम के थे और जो कभी मुख्य अपराध का हिस्सा ही नहीं थे।
साम्राज्य के पीछे का दिमाग: कौन हैं सैंटियागो मार्टिन?
सैंटियागो मार्टिन ने साल 1988 में कोयंबटूर से 'मार्टिन लॉटरी एजेंसीज लिमिटेड' की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने भारतीय कॉपोरेट जगत के इतिहास में एक ऐसा सफर तय किया, जिसने सबको चौंका दिया। उनकी मुख्य कंपनी, 'फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज' (Future Gaming and Hotel Services), देखते ही देखते भारत की सबसे बड़ी लॉटरी ऑपरेटर बन गई।
आज इस समूह का कारोबार केवल लॉटरी तक सीमित नहीं है, बल्कि रियल एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी (होटल व्यवसाय), टेक्सटाइल, शिक्षा, रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) और मीडिया क्षेत्र तक फैला हुआ है। मार्टिन समूह का कुल मूल्यांकन लगभग ₹23,000 करोड़ आंका गया है।
साल 2024 की शुरुआत में जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनावी बॉन्ड (Electoral Bonds) का डेटा सार्वजनिक हुआ, तो मार्टिन के नाम ने पूरे देश को हैरान कर दिया। वह देश की सभी राजनीतिक पार्टियों को सैकड़ों करोड़ रुपये का चंदा देने वाले सबसे बड़े दानदाता के रूप में उभरे।
डेटा के अनुसार, 2019 से 2024 के बीच फ्यूचर गेमिंग ने ₹1,368 करोड़ के चुनावी बॉन्ड खरीदे — जो भारत में किसी भी अन्य कंपनी की तुलना में सबसे ज्यादा थे। यह देश में बेचे गए कुल बॉन्ड का लगभग 11 प्रतिशत था। मार्टिन ने बड़ी चतुराई से देश के हर सत्ता केंद्र में निवेश किया:
तृणमूल कांग्रेस (TMC): ₹542 करोड़
द्रमुक (DMK): ₹503 करोड़
वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP): ₹154 करोड़
भाजपा (BJP): ₹100 करोड़
कांग्रेस (Congress): ₹50 करोड़
राजनीति में गहराई से समाया परिवार
मद्रास हाई कोर्ट का यह नोटिस इसलिए भी ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इस केस से जुड़े लोग आज तमिलनाडु की राजनीति के शीर्ष पर बैठे हैं। सैंटियागो मार्टिन की पत्नी, लीमा रोज, अन्नाद्रमुक (AIADMK) की नेता हैं और उन्होंने हालिया 2026 के विधानसभा चुनाव में त्रिची जिले की लालगुडी सीट से जीत दर्ज की है।
उनकी बेटी डेज़ी आधाव अर्जुना, जो इस अदालती मामले में सह-याचिकाकर्ता हैं, वह आधाव अर्जुना की पत्नी हैं। आधाव अर्जुना इस समय तमिलनाडु की नई नवेली टीवीके (TVK) सरकार में लोक निर्माण विभाग (PWD) और खेल मंत्री हैं और पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक हैं।
सैंटियागो मार्टिन, जो लंबे समय से सार्वजनिक जीवन और मीडिया की चकाचौंध से दूर थे, उन्हें आखिरी बार 10 मई 2026 को अभिनेता से नेता बने विजय के मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में देखा गया था। मंत्री आधाव अर्जुना और मार्टिन परिवार के इस पारिवारिक रिश्ते को लेकर विपक्षी दल अब विजय सरकार पर लगातार हमले कर रहे हैं। विपक्ष को यह भी डर सता रहा है कि नई सरकार तमिलनाडु में लॉटरी को फिर से वैध (Legalize) कर सकती है, जिसे जनवरी 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था।
'जॉन ब्रिट्टो' विवाद: अफवाहों का बाजार गर्म
जब कोर्ट का यह नोटिस मीडिया की सुर्खियों में था, तभी मार्टिन परिवार से जुड़ा एक और विवाद सोशल मीडिया पर तैरने लगा। ईडी ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में 'जॉन ब्रिट्टो' नाम के एक व्यक्ति को मुख्य सरगना (Mastermind) बताया।
चूंकि मार्टिन की पत्नी लीमा रोज के परिवार में भी यह सरनेम (Surname) साझा होता है, इसलिए सोशल मीडिया पर लोगों ने तुरंत कड़ियां जोड़ना शुरू कर दिया। मशहूर यूट्यूबर मारीदास और सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) के आईटी विंग ने आरोप लगाया कि पकड़ा गया ड्रग तस्कर कोई और नहीं बल्कि लीमा रोज मार्टिन का सगा भाई है। सोशल मीडिया पर यह नैरेटिव चलाया जाने लगा कि नई टीवीके सरकार के संरक्षण में एक बड़ा ड्रग कार्टेल काम कर रहा है।
हालांकि, यह पूरी थ्योरी जल्द ही झूठी साबित हो गई। लीमा रोज के असली भाई — फिलिप जॉन ब्रिट्टो — खुद सामने आए और उन्होंने 9 जून 2026 को चेन्नई कमिश्नर ऑफिस में एक शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईडी के मामले में जिस आरोपी का नाम है, वह कोई और व्यक्ति है और उनका उससे कोई लेना-देना नहीं है।
आधिकारिक सूत्रों और स्वतंत्र पत्रकारों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि ईडी की प्रेस रिलीज में जिस जॉन ब्रिट्टो (उम्र 40 वर्ष) का जिक्र है, वह चेन्नई के कोडुंगायुर का रहने वाला है और उसके पिता का नाम इरुदयनराज है, जबकि वह फिलहाल फरार है। दूसरी ओर, लीमा रोज के भाई फिलिप जॉन ब्रिट्टो की उम्र 57 वर्ष से अधिक है।
किसी भी केंद्रीय या राज्य की एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर इस ड्रग मामले का संबंध मार्टिन परिवार या टीवीके सरकार से नहीं जोड़ा है। हालांकि, यह विवाद पूरी तरह से नाम के घालमेल और बिना पुष्टि वाली खबरों पर आधारित था, लेकिन इसने मीडिया में मार्टिन परिवार और टीवीके सरकार के संबंधों की चर्चा को एक बार फिर गरमा दिया।
मद्रास हाई कोर्ट का ED को दिया गया 6 हफ्ते का समय मार्टिन परिवार के लिए कानूनी राहत की दिशा में एक कदम हो सकता है, लेकिन राजनीति में टाइमिंग ही सब कुछ होती है। तमिलनाडु में एक नई सरकार के गठन और मार्टिन परिवार के सदस्यों के अलग-अलग राजनीतिक दलों में बड़े पदों पर होने के कारण, ₹457 करोड़ की यह कानूनी लड़ाई आने वाले दिनों में और भी ज्यादा दिलचस्प और राजनीतिक रूप से संवेदनशील होने वाली है। सरकार और विपक्ष दोनों की नजरें अब अदालत के अगले कदम पर टिकी हैं।

