
TMC संकट: ममता खेमे ने 20 बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की
ममता बनर्जी खेमे ने 20 बागी सांसदों को संसद में अयोग्य ठहराने की कार्रवाई शुरू की, जबकि बागी गुट ने पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज करने की पुलिस से गुहार लगाई है।
TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रहा राजनीतिक संकट शुक्रवार (19 जून) को एक नए मोड़ पर पहुंच गया। संसद में ममता बनर्जी खेमे ने 20 बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। दूसरी तरफ, बागी गुट के विधायकों ने पार्टी के बैंक खातों से होने वाले लेनदेन को रोकने के लिए पुलिस से दखल देने की मांग की है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने आज शाम नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। उन्होंने बागी गुट को अलग समूह के रूप में आधिकारिक मान्यता देने के प्रयास को चुनौती दी है। उसी दिन बागी विधायकों ने पार्टी के वित्तीय खातों में कथित अनियमितताओं की पुलिस जांच कराने के लिए भी संपर्क किया है।
टीएमसी के वित्तीय लेनदेन पर रोक की कोशिश
इन नए घटनाक्रमों ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा स्थापित पार्टी पर नियंत्रण की इस बढ़ती जंग को एक नया आयाम दे दिया है। अब यह पूरा विवाद संगठन की वित्तीय संपत्तियों और कोष पर नियंत्रण हासिल करने तक फैल चुका है।
बागी नेता रिताब्रत बनर्जी के समर्थक विधायकों के एक समूह ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने पार्टी के कई बैंक खातों में होने वाले वित्तीय लेनदेन को तुरंत रोकने के लिए उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
यह कदम पूर्व राज्य मंत्री अरूप विश्वास द्वारा एक निजी बैंक को पत्र लिखने के ठीक एक दिन बाद उठाया गया है। विश्वास, जो हाल तक पार्टी के कोषाध्यक्ष के रूप में काम कर रहे थे, उन्होंने बैंक से अनुरोध किया था कि जब तक पार्टी का आंतरिक नेतृत्व विवाद पूरी तरह से सुलझ नहीं जाता, तब तक टीएमसी के खातों में लेनदेन को निलंबित रखा जाए।
नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता
पुलिस सूत्रों के अनुसार, बागी विधायकों ने अपनी शिकायत में तर्क दिया है कि पार्टी के नेतृत्व और संगठनात्मक नियंत्रण पर चल रही अनिश्चितता के कारण इन बैंक खातों के दुरुपयोग की आशंका बढ़ सकती है।
उन्होंने यह भी मांग की कि जब तक इस बात की पूरी स्पष्टता नहीं हो जाती कि पार्टी के वित्त पर वास्तविक कानूनी अधिकार किसका है, तब तक इन खातों को फ्रीज कर दिया जाए। इसमें शामिल फंड के बड़े आकार के कारण यह विवाद सबका ध्यान खींच रहा है।
चुनाव आयोग को सौंपे गए पार्टी के ऑडिटेड वित्तीय विवरणों के अनुसार, टीएमसी के पास बैंक जमा के रूप में करोड़ों रुपये सुरक्षित हैं। प्रतिद्वंद्वी गुटों ने पार्टी के नियंत्रण वाले इन खातों में लगभग 534 करोड़ रुपये से लेकर 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि होने का दावा किया है।
बागियों ने उठाए वित्तीय स्रोत पर सवाल
पश्चिम बंगाल विधानसभा में बागी खेमे का मुख्य चेहरा बनकर उभरे रिताब्रत बनर्जी ने खातों को फ्रीज करने की मांग का खुलकर समर्थन किया है। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के पास मौजूद इस फंड के वास्तविक स्रोतों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि कौन जानता है कि इन खातों में कट-मनी कलेक्शन या अन्य अवैध स्रोतों से आया पैसा तो शामिल नहीं है? उन्होंने अरूप विश्वास के उस अनुरोध का पूरा समर्थन किया जिसमें बैंक लेनदेन को निलंबित करने की बात कही गई थी।
बागी नेता लगातार यह दावा कर रहे हैं कि वे ही वास्तविक टीएमसी का प्रतिनिधित्व करते हैं। वैधता की यह लड़ाई संसद के भीतर भी समानांतर रूप से चल रही है।
अरूप विश्वास का बैंक को पत्र
यह वित्तीय विवाद तब शुरू हुआ जब अरूप विश्वास ने बैंक अधिकारियों को एक लिखित पत्र भेजा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि खातों में लेनदेन जारी रहा तो पार्टी के आंतरिक मतभेदों के कारण गंभीर कानूनी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
विश्वास ने अपने पत्र में कहा कि बड़ी संख्या में सांसद और विधायक या तो पार्टी छोड़ चुके हैं या मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ खुलकर बगावत कर रहे हैं। इससे यह अनिश्चितता पैदा हो गई है कि अंततः संगठन और उसकी संपत्तियों पर किसका नियंत्रण है।
उन्होंने तर्क दिया कि जब तक इस मुद्दे का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक वर्तमान स्थिति बनाए रखकर और किसी भी तरह की निकासी या फंड ट्रांसफर को रोककर पार्टी के फंड को सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
कोषाध्यक्ष के पद को लेकर विवाद
ममता बनर्जी खेमे ने इस पत्र के महत्व को खारिज करने का प्रयास किया है।
पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि अरूप विश्वास अब कोषाध्यक्ष के पद पर नहीं हैं। उन्हें इस महीने की शुरुआत में एक संगठनात्मक फेरबदल के दौरान वरिष्ठ नेता सुभाशीष चक्रवर्ती द्वारा प्रतिस्थापित किया जा चुका है।
पार्टी नेतृत्व के अनुसार, पद से हटाए जाने के बाद विश्वास द्वारा बैंक को भेजा गया कोई भी पत्र आधिकारिक या वैध नहीं माना जा सकता।
हालांकि, विश्वास ने बैंक के साथ पत्राचार में खुद को कोषाध्यक्ष के रूप में ही वर्णित किया है। इस बात ने ममता बनर्जी के वफादार खेमे के भीतर भी मतभेदों की अटकलों को हवा दे दी है।
बागी गुट ने एक कदम आगे बढ़ते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पार्टी से जुड़े कुछ खातों में सत्ता के दुरुपयोग से प्राप्त फंड हो सकता है, इसलिए इसकी औपचारिक जांच की जानी चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष के साथ बैठक
यह वित्तीय टकराव नई दिल्ली में चल रही एक समानांतर लड़ाई के साथ मेल खाता है, जहां ममता बनर्जी खेमे ने बागी सांसदों के लिए मुश्किलें बढ़ाने की कोशिश की है।
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। उन्होंने उन 20 बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं सौंपी हैं जिन्होंने त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के साथ अपने विलय की घोषणा की है और एक अलग समूह के रूप में मान्यता मांगी है।
बैठक के बाद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि स्पीकर ने टीएमसी प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि सभी पक्षों को सुने बिना कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। उनके अनुसार, ओम बिरला ने संकेत दिया है कि कोई भी आदेश देने से पहले विरोधी गुट को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
लोकसभा अध्यक्ष के साथ लगभग एक घंटे तक चली बैठक के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि हमारे देश का संविधान स्पष्ट रूप से कहता है कि यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि किसी विशेष राजनीतिक दल से जुड़ा है और उस पार्टी के सिंबल पर चुनाव जीतता है, और बाद में किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है, तो कानून के तहत उसकी संसद सदस्यता रद्द की जा सकती है।
उन्होंने आगे कहा कि उस संवैधानिक प्रावधान के अनुसार, यह बिल्कुल स्वाभाविक है कि जिन लोकसभा सदस्यों ने टीएमसी के सिंबल पर जीत हासिल की और बाद में पार्टी छोड़ दी, उन्हें अयोग्यता का सामना करना ही चाहिए।
अयोग्यता की कानूनी कार्रवाई
इस महीने की शुरुआत में हुए संसदीय विभाजन के बाद से ममता बनर्जी खेमे का यह अब तक का सबसे बड़ा जवाबी हमला है।
पार्टी ने तर्क दिया है कि बागी सांसद दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किए जाने के पात्र हैं। वे केवल इस आधार पर सुरक्षा का दावा नहीं कर सकते कि संसदीय दल का दो-तिहाई हिस्सा टूटकर अलग हो गया है।
टीएमसी नेताओं ने स्पीकर को बताया कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत न केवल कम से कम दो-तिहाई विधायकों या सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है, बल्कि मूल राजनीतिक पार्टी का भी दूसरी पार्टी में विलय होना अनिवार्य है।
पार्टी ने तर्क दिया कि चूंकि मूल संगठन अभी भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में अलग से अस्तित्व में है, इसलिए बागी स्वतः ही अयोग्यता की कार्यवाही से छूट पाने के हकदार नहीं हो सकते।
स्पीकर का अंतिम निर्णय न केवल इन 20 सांसदों के भविष्य को तय करेगा, बल्कि पार्टी पर नियंत्रण के लिए लड़ रहे दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच शक्ति के संतुलन को भी निर्धारित करेगा।
अभिषेक बनर्जी की यात्रा पर सवाल
इस राजनीतिक विवाद को और बढ़ाते हुए, बागी नेता रिताब्रत बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी के चार्टर्ड विमान से नई दिल्ली जाने के फैसले को भी निशाना बनाया है।
बागी नेता ने ऐसे समय में इस तरह की यात्रा के लिए फंडिंग के स्रोत पर सवाल उठाया है जब दोनों गुट पार्टी के वित्त पर नियंत्रण के लिए लड़ रहे हैं और पार्टी फंड के संबंध में अधिक पारदर्शिता की मांग की जा रही है।
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