
टीएमसी बागी सांसदों को लेकर NCPI नेता के बदले सुर, पहले विरोध अब स्वागत
टीएमसी के 20 बागी सांसदों के विलय पर एनसीपीआई के जनरल सेक्रेटरी शांतनु डे ने लिया यू-टर्न, अध्यक्ष पर पैसे लेने का आरोप वापस ले बागी सांसदों का किया स्वागत।
NCPI internal Politics and TMC's Rebellion MPs: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी घमासान में एक और बड़ा मोड़ आ गया है। 'नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) के जिस बड़े नेता ने पहले टीएमसी के 20 बागी सांसदों के अपनी पार्टी में विलय का पुरजोर विरोध किया था, उन्होंने अब यू-टर्न ले लिया है। कल तक बगावती तेवर दिखाने वाले इस नेता ने आज अचानक अपने सुर बदलते हुए बागी सांसदों का पार्टी में स्वागत करने का एलान कर दिया है।
जनरल सेक्रेटरी शांतनु डे ने बदला अपना स्टैंड
एनसीपीआई (NCPI) के जनरल सेक्रेटरी शांतनु डे ने एक न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि आज पार्टी की एक अहम बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में सर्वसम्मति से यह बड़ा फैसला लिया गया कि वे तृणमूल कांग्रेस के सभी बागी लोकसभा सांसदों का अपनी पार्टी में स्वागत करेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी अभी बहुत छोटी है और वे सभी मिलकर पश्चिम बंगाल के विकास के लिए काम करना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि इस महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष शामिल नहीं हुए थे।
कल लगाया था पैसे लेकर विलय का आरोप
दिलचस्प बात यह है कि कल तक शांतनु डे इस विलय के धुर विरोधी बने हुए थे। उन्होंने एनडीटीवी से बातचीत में आरोप लगाया था कि यह पूरा फैसला उनसे और अन्य वरिष्ठ नेताओं से बिना कोई सलाह-मशविरा किए लिया गया है। उन्होंने हावड़ा के रहने वाले पार्टी अध्यक्ष उत्तिय कुंडू पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि टीएमसी बागियों को पार्टी में शामिल कराने के लिए भारी-भरकम रकम का लेन-देन हुआ है। उन्होंने कल साफ कहा था कि वे इस सौदेबाजी के बिल्कुल खिलाफ हैं।
एनसीपीआई के भीतर ही छिड़ी जंग
इस सियासी ड्रामे के बीच अब एनसीपीआई (NCPI) के भीतर की अंदरूनी कलह भी खुलकर सड़कों पर आ गई है। पार्टी अध्यक्ष उत्तिय कुंडू की पत्नी और पेशे से वकील शेवली कुंडू ने शांतनु डे के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि शांतनु डे का पार्टी का संस्थापक सदस्य होने का दावा पूरी तरह झूठा है। शेवली कुंडू के मुताबिक, शांतनु डे साल 2023 से न तो पार्टी के जनरल सेक्रेटरी हैं और न ही इसके प्राथमिक सदस्य हैं।
चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में बेहद छोटी है यह पार्टी
यह राजनीतिक दल साल 2023 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से ठीक कुछ हफ्ते पहले चुनाव आयोग में एक 'पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल' (RUPP) के रूप में दर्ज हुआ था। पश्चिम बंगाल में रजिस्टर्ड होने के बावजूद इस पार्टी ने अपना पहला चुनाव त्रिपुरा में लड़ा था, जहां यह एनडीए (NDA) गठबंधन का हिस्सा थी। हालांकि, वहां पार्टी कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाई थी। चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस पार्टी को कुल मिलाकर महज 1.13 लाख रुपये का चंदा ही मिला था।
ममता बनर्जी की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ीं
एनसीपीआई (NCPI) के भीतर चल रही इस उठापटक के बीच ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हालिया विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से ही टीएमसी अपने कुनबे को बिखरने से बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है। अब तक 20 लोकसभा सांसद खुले तौर पर बगावत कर चुके हैं। बागी गुट का नेतृत्व कर रही सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में असंतुष्ट सांसदों की यह संख्या और ज्यादा बढ़ सकती है।
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