क्या टूट की ओर बढ़ रही है टीएमसी? सांसदों के असंतोष ने बढ़ाई हलचल
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क्या टूट की ओर बढ़ रही है टीएमसी? सांसदों के असंतोष ने बढ़ाई हलचल

पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद टीएमसी में असंतोष बढ़ता iगया है। सांसदों की नाराजगी और बगावत की अटकलों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।


पश्चिम बंगाल में जारी गंभीर राजनीतिक संकट के बीच टीएमसी को अब एक नए मोर्चे पर चुनौती का सामना करना पड़ सकता है, और यह चुनौती इस बार संसद में दिखाई दे रही है। कुछ दिनों पहले विपक्षी दलों, जैसे Bharatiya Janata Party (भाजपा) और Aam Janata Unnayan Party (एजेयूपी) के नेताओं ने दावा किया था कि टीएमसी के सांसदों के बीच असंतोष बढ़ रहा है और जल्द ही पार्टी में एक और विभाजन हो सकता है। इसी बीच शुक्रवार (5 जून) को वरिष्ठ सांसद Kakoli Ghosh Dastidar ने सोशल मीडिया पर अपनी ही पार्टी को निशाना बनाते हुए एक पोस्ट किया।

"शासन की विफलता के खिलाफ जनादेश"

पश्चिम बंगाल के Barasat से चार बार सांसद रह चुकीं 66 वर्षीय डॉक्टर-सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने अपने पोस्ट में कहा कि 2026 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी की करारी हार "नीतिगत गलतियों और शासन की विफलता के खिलाफ जनता का फैसला" है।उन्होंने लोकसभा में मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के पद से हटाए जाने पर भी निराशा व्यक्त की और कहा कि चार दशकों की निष्ठा का उन्हें यही पुरस्कार मिला है। उन्होंने पोस्ट में लिखा: "क्या आपको लगता है कि एक राजनीतिक परिवार से आने वाला, चार बार का सांसद, जिसने चार दशकों तक ममता बनर्जी के साथ रहकर तानाशाही के खिलाफ संघर्ष किया है, वह केवल अपने बारे में सोचता है?"

हाल ही में कोलकाता में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान Mamata Banerjee ने बिना नाम लिए एक पार्टी नेता की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि वह नेता इसलिए नाराज़ है क्योंकि उसके बेटे को विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं मिला। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि उनका इशारा काकोली घोष दस्तिदार की ओर था और सोशल मीडिया पर किया गया यह पोस्ट उसी का जवाब था।

काकोली ने अपने अन्य पोस्टों में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Woodrow Wilson के एक कथन तथा कवि Charles Mackay की रचनाओं के अंश भी साझा किए। इन पोस्टों के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि जो लोग काम करते हैं, उनके विरोधी भी होते हैं। हालांकि उन्होंने इन पोस्टों को टीएमसी की वर्तमान राजनीतिक स्थिति से सीधे नहीं जोड़ा।

भाजपा और एजेयूपी नेताओं का दावा: केंद्र में टीएमसी टूट सकती है

पिछले महीने भाजपा के वरिष्ठ नेता Saumitra Khan ने दावा किया था कि टीएमसी के लगभग 20 सांसद भाजपा के संपर्क में हैं और वे पार्टी बदल सकते हैं। टीएमसी ने इस दावे को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया था।इस सप्ताह एजेयूपी नेता Humayun Kabir, जिन्हें पिछले वर्ष टीएमसी से निष्कासित कर दिया गया था और जिन्होंने बाद में अपनी पार्टी बनाकर इस वर्ष चुनाव लड़ा, ने एनडीटीवी से कहा कि टीएमसी के 20 से अधिक सांसद चाहते हैं कि लोकसभा में पार्टी नेता Abhishek Banerjee को उनके पद से हटाया जाए। उन्होंने दावा किया कि इस विषय पर सांसदों ने पहले ही लोकसभा अध्यक्ष Om Birla से बातचीत की है।

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बढ़ता असंतोष

टीएमसी की चुनावी हार के बाद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।पश्चिम बंगाल में 58 बागी विधायकों ने पार्टी नेतृत्व की लाइन का पालन करने से इनकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेता Sovandeb Chattopadhyay को विपक्ष का नेता बनाने के लिए हस्ताक्षरों में हेराफेरी की गई। इन विधायकों ने उनकी जगह Ritabrata Banerjee का समर्थन किया।इस घटनाक्रम ने पार्टी को दो हिस्सों में बाँट दिया और बताया जा रहा है कि केवल लगभग 20 विधायक ही ममता बनर्जी के प्रति वफादार बने हुए हैं।

लोकसभा में टीएमसी की स्थिति

वर्तमान लोकसभा में टीएमसी के 29 सांसद हैं, जिससे वह सदन की चौथी सबसे बड़ी पार्टी है। उससे आगे केवल भाजपा, Indian National Congress (कांग्रेस) और Samajwadi Party हैं।चूंकि टीएमसी लंबे समय से प्रधानमंत्री Narendra Modi और भाजपा की मुखर आलोचक रही है, इसलिए पार्टी के संसदीय दल में किसी भी प्रकार की टूट विपक्ष के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।

इंडिया गठबंधन की बैठक पर निगाहें

हाल ही में ममता बनर्जी ने टीएमसी की सभी संगठनात्मक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया। माना जा रहा है कि उन्होंने पार्टी के बचे हुए ढांचे को बचाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया। अब सभी की निगाहें 8 जून को New Delhi में होने वाली Indian National Developmental Inclusive Alliance (इंडिया गठबंधन) की बैठक पर टिकी हैं, जिसमें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के शामिल होने की संभावना है।

संसद का मानसून सत्र भी निकट है। इसी दौरान सरकार परिसीमन (Delimitation) से जुड़े मुद्दे को आगे बढ़ा सकती है, जिसे अप्रैल में आवश्यक समर्थन नहीं मिल पाया था। रिपोर्टों के अनुसार, National Democratic Alliance सरकार ने टीएमसी और Dravida Munnetra Kazhagam जैसे विपक्षी दलों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि टीएमसी के कई सांसदों ने इस पहल पर सकारात्मक प्रतिक्रिया भी दी है।

इन घटनाक्रमों ने ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर की स्थिति और संसद में उसकी एकजुटता भारतीय राजनीति का प्रमुख विषय बन सकती है।

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