TMC के बागी गुट ने ममता को पद से किया बेदखल, अरूप रॉय बने नए अध्यक्ष
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TMC के बागी गुट ने ममता को पद से किया बेदखल, अरूप रॉय बने नए अध्यक्ष

तृणमूल कांग्रेस में ऐतिहासिक फूट। न्यूटाउन में 60 विधायकों की बैठक के बाद ममता बनर्जी चेयरपर्सन पद से हटाई गईं। अभिषेक बनर्जी सस्पेंड, अरूप रॉय नए अध्यक्ष।


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TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार शाम को एक ऐसा भूचाल आ गया, जिसने देश के सियासी गलियारों को हिलाकर रख दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को उनकी ही पार्टी के बागी धड़े ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के चेयरपर्सन पद से बेदखल कर दिया है। न्यूटाउन के एक होटल में हुई इस ऐतिहासिक और गोपनीय बैठक के बाद बागी गुट ने खुद को 'असली तृणमूल' घोषित करते हुए ममता बनर्जी की जगह हावड़ा सेंट्रल के विधायक अरूप रॉय (Arup Roy) को नया चेयरपर्सन नियुक्त कर दिया है। यही नहीं, बगावत की इस आंधी में ममता के भतीजे और पार्टी के कद्दावर नेता अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) को भी 'ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी' के पद से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है।


न्यूटाउन के होटल में 'स्पेशल सेशन': 60 विधायक और 16 जिला अध्यक्ष शामिल
सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र की समाप्ति के ठीक बाद, तृणमूल कांग्रेस के भीतर सुलग रही बगावत की आग खुलकर सामने आ गई। बागी विधायकों और नेताओं ने न्यूटाउन के एक पांच सितारा होटल में पार्टी का एक 'विशेष सत्र' (Special Session) बुलाया, जिसमें भारी संख्या में दिग्गज नेता एकजुट हुए:

बड़ा शक्ति प्रदर्शन: इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस के 60 मौजूदा विधायक शामिल हुए। इसके साथ ही तृणमूल के कम से कम 16 जिला अध्यक्ष, कई पूर्व विधायक और कोलकाता के लगभग 70 पूर्व पार्षदों ने भी इस तख्तापलट में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

500 नेताओं का जमावड़ा: जिलों से लेकर कोलकाता तक, कुल मिलाकर तृणमूल के करीब 500 छोटे-बड़े नेता इस होटल में एकजुट हुए, जिन्होंने सर्वसम्मति से ममता बनर्जी के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया।

'असली तृणमूल' की नई नेशनल वर्किंग कमेटी का एलान
TMC के संविधान का हवाला देते हुए बागी गुट के नेताओं ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की लीडरशिप को पूरी तरह खारिज कर दिया। बैठक में 30 सदस्यों वाली एक नई नेशनल वर्किंग कमेटी (राष्ट्रीय कार्यसमिति) के गठन की आधिकारिक घोषणा की गई, जिसका ढांचा इस प्रकार है:

राष्ट्रीय अध्यक्ष / चेयरपर्सन: अरूप रॉय (विधायक, हावड़ा सेंट्रल)

नेशनल जनरल सेक्रेटरी (राष्ट्रीय महासचिव): संदीपन साहा (निष्कासित MLA), जावेद खान और रिताब्रता बनर्जी

उपाध्यक्ष (Vice Presidents): फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास और रथिन घोष

बागी गुट के बड़े नेता रिताब्रता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि पार्टी अब किसी एक परिवार की जागीर नहीं रहेगी और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई यह नई कमेटी ही अब अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का संचालन करेगी।

अगला कदम: फ्रंटल संगठनों का गठन और TMC के बैंक खातों पर नजर
ममता बनर्जी को पद से हटाने के बाद अब बागी गुट कानूनी और संगठनात्मक रूप से खुद को स्थापित करने की तैयारी में जुट गया है:

21 दिनों की डेडलाइन: नई कमेटी ने एलान किया है कि अगले 21 दिनों के भीतर पार्टी के सभी फ्रंटल संगठनों (महिला मोर्चा, छात्र विंग और श्रमिक संगठन) का नए सिरे से पुनर्गठन किया जाएगा।

बैंक अकाउंट्स फ्रीज करने की तैयारी: तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक बैंक खातों और पार्टी फंड पर अपना नियंत्रण कैसे स्थापित किया जाए, इसे लेकर देश के बड़े वकीलों से कानूनी सलाह ली जा रही है। बागी गुट का दावा है कि चूंकि बहुमत उनके पास है, इसलिए आधिकारिक नाम, सिंबल और बैंक खातों पर उनका ही कानूनी हक बनता है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में आया यह भूचाल अब सीधे तौर पर विधानसभा की स्थिरता और ममता बनर्जी की सरकार के अस्तित्व पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में यह लड़ाई अब चुनाव आयोग से लेकर अदालतों के दरवाजे तक पहुंचना तय माना जा रहा है।


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