बंगाल में तृणमूल का पतन जारी.फाल्टा में खिला कमल, शुभेंदु अधिकारी ने कसा TMC पर तंज
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बंगाल में तृणमूल का पतन जारी.फाल्टा में खिला कमल, शुभेंदु अधिकारी ने कसा TMC पर तंज

फाल्टा का यह उपचुनावी मुकाबला राजनीतिक बयानों और फिल्मी संवादों के कारण भी चर्चा में रहा। टीएमसी के स्थानीय नेता और घोषित उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव प्रचार के दौरान खुद को फिल्म 'पुष्पा' के नायक की तरह पेश किया था, जो विरोधियों के सामने "कभी झुकेगा नहीं"।


पश्चिम बंगाल की राजनीति में दक्षिण 24 परगना जिला हमेशा से तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत आधार स्तंभ रहा है। साल 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने फाल्टा सीट पर 56 फीसदी से ज्यादा वोट शेयर हासिल करते हुए 1,17,000 से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। लेकिन मई 2026 के इस पुनर्मतदान ने इतिहास को पूरी तरह से पलट कर रख दिया है।

इस बार बीजेपी के देवांग्शु पांडा को 1,49,421 वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रही सीपीआई(एम) के शंभू नाथ कुर्मी को महज 40,625 वोट मिले। कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला 10,079 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। सबसे बदतर स्थिति सत्तारूढ़ रही टीएमसी की हुई, जिसके उम्मीदवार जहांगीर खान को सिर्फ 6,257 वोट मिले, जो कुल मतदान का 4 प्रतिशत भी नहीं है।

उम्मीदवार पार्टी प्राप्त वोट स्थिति

देवांग्शु पांडा BJP 1,49,421 विजेता (1.08 लाख से ज्यादा मार्जिन)

शंभू नाथ कुर्मी CPI(M) 40,625 दूसरा स्थान

अब्दुर रज्जाक मोल्ला Congress 10,079 तीसरा स्थान

जहांगीर खान TMC 6,२५७ चौथा स्थान (मैदान छोड़ दिया था)

शुभेंदु अधिकारी का तीखा हमला: 'डायमंड हार्बर' बना 'लॉस-बार'

इस ऐतिहासिक जीत के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर टीएमसी नेतृत्व, विशेषकर अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला बोला। गौरतलब है कि फाल्टा विधानसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां से अभिषेक बनर्जी सांसद हैं। अभिषेक अक्सर अपने सुशासन के दावों को 'डायमंड हार्बर मॉडल' के रूप में प्रचारित करते रहे हैं।

शुभेंदु अधिकारी ने तंज कसते हुए लिखा:

"कुख्यात 'डायमंड हार्बर मॉडल' अब तृणमूल का 'लॉस-बार मॉडल' बन चुका है!!! मैं फाल्टा की देवतुल्य जनता के आगे सिर झुकाता हूं जिन्होंने बीजेपी उम्मीदवार देवांग्शु पांडा को एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से विधानसभा भेजने का ऐतिहासिक जनादेश दिया है। हमने विकास के जरिए इस कर्ज को चुकाने का संकल्प लिया है और हम एक 'स्वर्ण स्वर्णिम फाल्टा' का निर्माण करेंगे।"

शुभेंदु अधिकारी ने आगे कहा कि बिना किसी विचारधारा की यह पार्टी (TMC) अब एक माफिया कंपनी में बदल चुकी थी, जो सत्ता जाते ही पूरी तरह बिखर गई है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में टीएमसी को चुनाव जीतने के लिए नहीं बल्कि 'NOTA' से बचने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।

'पुष्पा राज' का अंत और कमल का उदय

फाल्टा का यह उपचुनावी मुकाबला राजनीतिक बयानों और फिल्मी संवादों के कारण भी चर्चा में रहा। टीएमसी के स्थानीय नेता और घोषित उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव प्रचार के दौरान खुद को फिल्म 'पुष्पा' के नायक की तरह पेश किया था, जो विरोधियों के सामने "कभी झुकेगा नहीं"। हालांकि, 29 अप्रैल को हुए पहले दौर के मतदान में भारी धांधली और फर्जी वोटिंग की शिकायतों के बाद जब चुनाव आयोग ने 21 मई को दोबारा मतदान (Repoll) कराने का आदेश दिया, तो जहांगीर खान ने यह कहते हुए अचानक मैदान छोड़ दिया कि वे क्षेत्र के विकास के लिए ऐसा कर रहे हैं।

बीजेपी बंगाल ने इस पर चुटकी लेते हुए पोस्ट किया, "फाल्टा में सबसे खूबसूरत फूल (कमल) खिलने के साथ ही 'पुष्पा राज' का अंत हो गया है। जनता की ताकत के आगे डायमंड हार्बर मॉडल ताश के पत्तों की तरह ढह गया।" नवनिर्वाचित विधायक देवांग्शु पांडा ने भी कहा कि अब फाल्टा में गुंडागर्दी का नहीं बल्कि आम जनता का राज होगा।

अभिषेक बनर्जी का पलटवार: चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप

दूसरी ओर, टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इन नतीजों को स्वीकार करने के बजाय चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि वोटों की गिनती की गति में भारी विसंगतियां थीं।

अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया

"फाल्टा पुनर्मतदान की गिनती में साफ तौर पर विसंगतियां दिखती हैं। दोपहर 3:30 बजे तक सभी 21 राउंड की गिनती पूरी कर ली गई, जबकि 4 मई को इसी समय तक केवल 2 से 4 राउंड की गिनती ही हो पाई थी। देश को चुनाव आयोग से इसका स्पष्टीकरण चाहिए। इसके अलावा, पिछले 10 दिनों में फाल्टा के 1000 से अधिक टीएमसी कार्यकर्ताओं को घर छोड़ने पर मजबूर किया गया, लेकिन चुनाव आयोग आंखें मूंद कर बैठा रहा।"

राजनीतिक विश्लेषकों की राय: क्या बदल रहा है बंगाल का मिजाज?

संख्या बल के हिसाब से देखें तो इस एक सीट की जीत-हार से 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में कोई बड़ा अंतर नहीं पड़ता। बीजेपी के पास पहले से ही पूर्ण बहुमत है और उसकी सीटों की संख्या अब 208 हो गई है, जबकि टीएमसी 80 सीटों पर है।

लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम इस बात का साफ संकेत है कि 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद हार का स्वाद चखने वाली टीएमसी का स्थानीय सांगठनिक ढांचा कितनी तेजी से बिखर रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, फाल्टा के नतीजों ने यह भी साफ कर दिया है कि बंगाल में जो लोग बीजेपी के विरोधी हैं, वे अब ममता बनर्जी की पार्टी के बजाय वामपंथ (Left) या कांग्रेस की तरफ विकल्प के रूप में देख रहे हैं, जिसका फायदा उठाकर माकपा यहाँ दूसरे स्थान पर आने में कामयाब रही।

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