
काकोली घोष के इस्तीफे से TMC में हलचल, क्या टूटेगी पार्टी?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। TMC सांसद काकोली घोष ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें उस वक्त और बढ़ गईं, जब पार्टी की वरिष्ठ नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया।
काकोली घोष लंबे समय से टीएमसी से जुड़ी रही हैं और पार्टी की भरोसेमंद नेताओं में उनकी गिनती होती थी। वे करीब 9-10 महीने तक लोकसभा में पार्टी की चीफ व्हिप भी रहीं। हाल ही में ममता बनर्जी ने उन्हें इस पद से हटाकर कल्याण बनर्जी को यह जिम्मेदारी सौंप दी थी। माना जा रहा है कि इसी फैसले से काकोली घोष काफी नाराज थीं।
उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा था, “1976 से जुड़ाव, 1984 में राजनीतिक सफर शुरू हुआ। आज मुझे चार दशकों की वफादारी का इनाम मिला है।” इस पोस्ट के बाद से ही उनके इस्तीफे की अटकलें तेज हो गई थीं।
इसी बीच केंद्र सरकार द्वारा उनकी सुरक्षा बढ़ाकर Y कैटेगरी कर दिए जाने ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी। खास बात यह रही कि बंगाल चुनाव में हार के बाद जहां अभिषेक बनर्जी समेत कई नेताओं की सुरक्षा कम की गई, वहीं काकोली घोष की सुरक्षा बढ़ा दी गई।
मंगलवार को काकोली घोष छह अन्य टीएमसी विधायकों के साथ कल्याणी में आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल हुईं। इस बैठक की अगुवाई पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने की थी। उनके साथ देगंगा से विधायक अनीसुर रहमान बिस्वास, स्वरूपनगर से बीना मंडल, हारोआ से मोहम्मद अब्दुल मतीन और बसीरहाट क्षेत्र के अन्य विधायक भी मौजूद थे। इससे पहले काकोली घोष ने टीएमसी के बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था। अपने इस्तीफे में उन्होंने चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे।
विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी में बढ़ते असंतोष को लेकर भाजपा नेताओं ने भी बड़े दावे किए हैं। भाजपा सांसद सौमित्र खान ने कहा कि टीएमसी के करीब 50 विधायक और 20 सांसद पार्टी से नाराज हैं और भाजपा में शामिल होना चाहते हैं।उन्होंने दावा किया, “अगर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व हरी झंडी दे दे, तो टीएमसी टूट जाएगी। पार्टी के कई विधायक और सांसद भाजपा में आने के लिए तैयार बैठे हैं।”
इन घटनाओं के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। काकोली घोष का इस्तीफा टीएमसी के भीतर बढ़ती नाराजगी का संकेत माना जा रहा है, जबकि भाजपा इसे ममता बनर्जी की कमजोर होती पकड़ के तौर पर पेश कर रही है।

