टीएमसी के 20 बागी सांसदों का बड़ा फैसला, एनसीपी पार्टी में करेंगे विलय
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टीएमसी के 20 बागी सांसदों का बड़ा फैसला, एनसीपी पार्टी में करेंगे विलय

तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में विलय का किया फैसला, काकोली घोष और सुदीप बंदोपाध्याय बोले- एनडीए का बनेंगे हिस्सा।


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TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा अंदरूनी संकट अब अपने सबसे बड़े और निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। लोकसभा में टीएमसी के 20 बागी सांसदों के गुट ने एक बेहद चौंकाने वाले फैसले के तहत राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी यानी 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी' (NCP) में विलय करने का ऐलान कर दिया है। त्रिपुरा की इस क्षेत्रीय बंगाली पार्टी में विलय की घोषणा के बाद बागी गुट ने दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। बागी गुट का नेतृत्व कर रही सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक तौर पर अपना पत्र सौंप दिया है।


संसद में अब अलग बैठेंगे बागी सांसद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करने का एलान
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद काकोली घोष दस्तीदार ने मीडिया से बातचीत में अपने भावी इरादे पूरी तरह साफ कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि बागी गुट के सभी सांसद अब संसद के भीतर टीएमसी से अलग ब्लॉक में बैठेंगे। काकोली घोष दस्तीदार ने खुले तौर पर एलान किया कि उनका पूरा गुट अब एनडीए (NDA) का हिस्सा बनेगा। उन्होंने कहा कि उनके पास सदन में दो-तिहाई सांसदों का पूरा और मजबूत बहुमत है। ये सभी सांसद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे।

कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए विलय
मॉनसून सत्र से पहले ममता बनर्जी को लगा तगड़ा झटका
टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 20 के पाला बदलने से ममता बनर्जी को अब तक का सबसे बड़ा सियासी झटका लगा है। सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों ने संसद में कोई नया स्वतंत्र गुट बनाने के बजाय इस क्षेत्रीय दल में विलय का रास्ता जानबूझकर चुना है। ऐसा एंटी-डिफेक्शन लॉ यानी दलबदल विरोधी कानून के तहत होने वाली किसी भी कानूनी कार्रवाई और अयोग्यता से बचने के लिए किया गया है। संसद के आगामी मॉनसून सत्र से ठीक पहले हुए इस बड़े खेल ने लोकसभा में विपक्षी खेमे की संख्या को भी भारी नुकसान पहुँचाया है।

असली तृणमूल पर दावा ठोकने की तैयारी
सुदीप बंदोपाध्याय ने खोला बागी गुट का अगला मास्टरप्लान
ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले और सबसे आखिरी में बागी गुट में शामिल हुए वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने भी इस फैसले की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि नियम के मुताबिक जब आप दो-तिहाई सांसदों के साथ अलग होते हैं, तो पहले ही दिन मूल पार्टी के नाम पर दावा नहीं कर सकते। इसलिए अभी वे एक क्षेत्रीय दल में खुद का विलय कर रहे हैं। सुदीप बंदोपाध्याय ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि आगामी जुलाई महीने में वे लोकसभा अध्यक्ष और अदालत के सामने असली तृणमूल कांग्रेस नाम और सिंबल पर अपना कानूनी दावा ठोकेंगे।

टीएमसी ने पहले ही चली थी कानूनी चाल
अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजा था पत्र
इस बड़े सियासी घटनाक्रम से ठीक पहले टीएमसी नेतृत्व ने भी बागी गुट को रोकने के लिए अपनी तरफ से पूरी कानूनी घेराबंदी की थी। टीएमसी सांसद सागरिका घोष और कीर्ति आजाद ने सुबह ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का एक बेहद महत्वपूर्ण पत्र स्पीकर को सौंपा था। इस पत्र के जरिए टीएमसी ने लोकसभा अध्यक्ष से बागी गुट को किसी भी तरह की अलग पहचान या मान्यता न देने की पुरजोर अपील की थी।

राजनीतिक दल ही हमेशा सर्वोच्च होता है
कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर अयोग्य ठहराने की मांग
अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में साफ लिखा था कि संसद के भीतर का विधायी दल हमेशा मूल राजनीतिक दल के अधीन ही होता है। कोई भी गुट खुद के दम पर समानांतर धड़ा बनाकर सदन में स्वतंत्र पहचान का दावा नहीं कर सकता। कानून किसी भी राजनीतिक दल में इस तरह के बिखराव या टुकड़े होने को मान्यता नहीं देता है। पत्र में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि ऐसी स्थिति में सांसदों को सीधे तौर पर अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। स्पीकर को केवल मूल राजनीतिक दल को ही मान्यता देनी चाहिए, न कि किसी बागी धड़े को।


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