तमिलनाडु चुनाव 2026: विजय की TVK ने बिगाड़ा खेल, युवा वोटरों की सुनामी से उड़े दिग्गजों के होश
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तमिलनाडु चुनाव 2026: विजय की TVK ने बिगाड़ा खेल, युवा वोटरों की 'सुनामी' से उड़े दिग्गजों के होश

इस चुनाव की सबसे बड़ी खूबी युवाओं की भारी भागीदारी है। 18 से 30 वर्ष के मतदाताओं के बीच वोटिंग का मिजाज एक अलग ही दिशा में जा रहा है। पहले तमिलनाडु में चुनाव जाति, समुदाय और क्षेत्र के आधार पर लड़े और जीते जाते थे।


तमिलनाडु में गुरुवार, 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान हो रहा है। इस बार का चुनाव पिछले कई दशकों के चुनावों से बिल्कुल अलग है। इसका सबसे बड़ा कारण है सुपरस्टार विजय की नई पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की एंट्री। राजनीतिक वैज्ञानिक वेंकटरमन का मानना है कि इस बार चुनाव में 'विजेता' का अनुमान लगाना तो आसान है, लेकिन दूसरे और तीसरे स्थान पर कौन रहेगा और चुनाव के नतीजे क्या प्रभाव डालेंगे, यह पूरी तरह से अनिश्चित है।

युवा वोटर और टूटते पुराने मानदंड

वेंकटरमन के अनुसार, इस चुनाव की सबसे बड़ी खूबी युवाओं की भारी भागीदारी है। 18 से 30 वर्ष के मतदाताओं के बीच वोटिंग का मिजाज एक अलग ही दिशा में जा रहा है। पहले तमिलनाडु में चुनाव जाति, समुदाय और क्षेत्र के आधार पर लड़े और जीते जाते थे, लेकिन विजय की एंट्री ने इन पारंपरिक चश्मों को धुंधला कर दिया है।

युवाओं के लिए अब 'नेता का आकर्षण' और उसकी बातें सबसे ऊपर हैं। पैसा और जाति अब उनके लिए दूसरे दर्जे की बात हो गई है। हालांकि, 30 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं में अभी भी पारंपरिक मुद्दे हावी हैं। टीवीके (TVK) ने 18-29 आयु वर्ग के लगभग 45-48 प्रतिशत युवाओं को अपनी ओर खींचा है, जो अन्य पार्टियों के लिए एक खतरे की घंटी है।

विपक्षी वोटों का बंटवारा: किसे होगा नुकसान?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि विजय की पार्टी किसका वोट काट रही है? विश्लेषण के अनुसार, TVK मुख्य रूप से अन्नाद्रमुक (AIADMK) और NDA (भाजपा गठबंधन) के वोट बैंक में सेंध लगा रही है।

NDA का हाल: अन्नामलाई के नेतृत्व के दौरान भाजपा ने युवाओं को आकर्षित किया था, लेकिन नेतृत्व परिवर्तन और पारंपरिक संगठनात्मक ढांचे के कारण अब युवा उनसे छिटक कर TVK की ओर जा रहे हैं।

AIADMK का संकट: अन्नाद्रमुक के लिए स्थिति और भी गंभीर है। पार्टी का कोर वोट बैंक जो 30+ आयु वर्ग में था, वहां भी विजय ने सेंधमारी की है। कोंगु क्षेत्र (पश्चिमी तमिलनाडु), जो अन्नाद्रमुक का गढ़ माना जाता था, वहां भी युवा अब जातिगत पहचान से ऊपर उठकर विजय का साथ दे रहे हैं।

DMK की स्थिति: संस्थागत मजबूती का फायदा

सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) के लिए अच्छी खबर यह है कि उनका वोट बैंक किसी एक समुदाय या आयु वर्ग पर निर्भर नहीं है। जहां वे कुछ युवा वोट खो रहे हैं, वहीं 50+ आयु वर्ग में उनकी पकड़ 65 प्रतिशत से अधिक मजबूत है। विपक्ष के बीच वोटों का बंटवारा (AIADMK, BJP और TVK के बीच) सीधे तौर पर DMK की जीत की संभावनाओं को बढ़ा रहा है। चेन्नई जैसे इलाकों में, जहाँ पहले DMK और AIADMK के बीच मुकाबला होता था, अब AIADMK तीसरे नंबर पर खिसकती दिख रही है।

वोट शेयर बनाम सीटों का गणित

वेंकटरमन का अनुमान है कि DMK को 40-45 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं। असली लड़ाई दूसरे नंबर के लिए है, जहाँ TVK और AIADMK दोनों 25-26 प्रतिशत के आसपास रह सकते हैं।

हालांकि, वोट शेयर का सीटों में बदलना एक बड़ी चुनौती है। किसी भी सीट को जीतने के लिए कम से कम 35-40 प्रतिशत वोटों की जरूरत होती है। विजय ने किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन न करके एक बड़ी रणनीतिक चूक की है। अकेले चुनाव लड़कर 25 प्रतिशत वोट पाना एक बड़ी उपलब्धि तो होगी, लेकिन यह सीटों में तब्दील हो पाएगा, इसमें संदेह है।

क्षेत्रीय प्रभाव और रणनीतिक गलतियां

चेन्नई में विजय की लोकप्रियता चरम पर है, खासकर पेरम्बूर जैसी सीटों पर वे कड़ी टक्कर दे रहे हैं। लेकिन DMK ने अपनी पूरी मशीनरी को मैदान में उतार दिया है और वे कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। कोंगु और दक्षिण तमिलनाडु में, जहाँ जातिगत ध्रुवीकरण हावी रहता था, वहां भी विजय ने आदि द्रविड़, मुकुलथोर और गौंडर जैसे समुदायों के युवाओं को प्रभावित किया है।

विजय की TVK ने तमिलनाडु की राजनीति में एक 'तीसरे ध्रुव' की नींव रख दी है। भले ही वे इस बार सत्ता के करीब न पहुँचें, लेकिन उन्होंने यह साबित कर दिया है कि तमिलनाडु की जनता अब पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से इतर विकल्प तलाश रही है। यह चुनाव परिणाम तय करेगा कि आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति दो-ध्रुवीय (DMK vs AIADMK) रहेगी या त्रिकोणीय।

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