जानवरों से बदतर सलूक, बिजली के झटके, बंधुआ मजदूरी और रेप, बिहार के ईंट भट्टे से असम के 47 मजदूर रेस्क्यू
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'जानवरों से बदतर सलूक', बिजली के झटके, बंधुआ मजदूरी और रेप, बिहार के ईंट भट्टे से असम के 47 मजदूर रेस्क्यू

बिहार के सहरसा जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक ईंट भट्टे में बंधक बनाकर रखे गए असम के 47 मजदूरों को पुलिस ने रेस्क्यू किया है। इन मजदूरों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।


बिहार के सहरसा जिले से एक ऐसी खबर आई है जो मानवता को शर्मसार कर देने वाली है। यहां एक ईंट भट्टे में बंधक बनाकर रखे गए असम के धुबरी जिले के 47 मजदूरों को बिहार पुलिस ने एक साहसिक ऑपरेशन में रेस्क्यू किया है। इन मजदूरों, में महिलाएं और मासूम बच्चे भी शामिल हैं। बंधक बनाकर रखे गए मज़दूरों ने आज़ाद होने के बाद जो आपबीती सुनाई है, वह किसी भी संवेदनशील इंसान की रूह कंपा देने के लिए काफी है। उन्होंने बंधुआ मजदूरी, बेरहम मारपीट, बिजली के झटके देने और महिलाओं व नाबालिग लड़कियों के साथ व्यवस्थित यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं। यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब भट्टे के अंदर एक महिला को गोली मार दी गई। इस घटना के बाद पुलिस हरकत में आई और ईंट भट्टे पर छापेमारी की।

एक गोली ने खोला दरिंदगी का राज

यह दर्दनाक दास्तां सहरसा जिले के कहरा ब्लॉक के धमसैनी गांव में स्थित 'स्टार मार्का' ईंट भट्टे की है। मजदूरों के मुताबिक, उन्हें करीब पांच-छह महीने पहले अच्छी मजदूरी का लालच देकर असम से लाया गया था। लेकिन, यहां आते ही वे एक अंतहीन नरक में फंस गए। उन्हें बंधक बना लिया गया और जानवरों से भी बदतर सलूक किया जाने लगा।

मामले का खुलासा तब हुआ जब एक महिला को पैर में गोली लगी। सहरसा के डीएसपी ओम प्रकाश ने बताया, "मुझे सूचना मिली कि ईंट भट्टे के अंदर एक महिला को गोली मारी गई है। हम तुरंत मौके पर पहुंचे और महिला को रेस्क्यू किया। उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसके पति की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है।"

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ईंट भट्टे के मालिक मो. ओवैस करणी, जिसे 'चुन्ना मुखिया' के नाम से भी जाना जाता है, और उसके सहयोगी अमित कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और मामले की आगे की जांच जारी है।

यौन शोषण और बिजली के झटके

रेस्क्यू किए गए मजदूरों के बयानों ने ईंट भट्टे के अंदर चल रहे संगठित शोषण और दरिंदगी की पोल खोल दी है। धुबरी के एयरंजोंगला गांव के एक मजदूर रिफाज अली ने बताया, "हम पैसा कमाने गए थे, लेकिन हम फंस गए। हमें कुछ भी भुगतान नहीं किया गया और हमारे साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया गया।"

ईंट भट्टे की नरकीय स्थितियों का वर्णन करते हुए उन्होंने आगे कहा, "हमें रात 2 बजे जगाया जाता था और देर रात तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। अगर हम मना करते, तो वे हमें खुदाई करने वाली मशीन (एक्सकेवेटर) से जान से मारने की धमकी देते थे। मेरे चाचा को एक मशीन से बांध दिया गया और बिजली के झटके दिए गए। वह किसी तरह वहां से भागने में सफल रहे।"

यौन शोषण के आरोप सबसे ज्यादा विचलित करने वाले हैं। रिफाज अली ने बताया, "वे भट्ठा मालिक और उसके गुर्ग शराब पीकर आते थे और नाबालिग लड़कियों को उठा ले जाते थे। अगर कोई विरोध करता, तो उसे बेरहमी से पीटा जाता था। हम लगातार डर के साये में जी रहे थे।"

उन्होंने उस रात की खौफनाक घटना को भी याद किया, जिससे भट्टे का सच सामने आया। "कल रात, 2 बजे, उन्होंने मुझे फोन किया और मेरी पत्नी व बेटी की मांग की। जब उन्होंने उनके आदेशों का पालन करने से इनकार कर दिया, तो उन्होंने मेरी पत्नी के पैर में गोली मार दी। मुझे यह भी नहीं पता कि वे उसे कहां ले गए," रिफाज ने बताया।

एक अन्य मजदूर अली एसके ने भी इन आरोपों की पुष्टि की। "वे लड़कियों को जबरदस्ती ले जाते थे। हम उन्हें रोक नहीं सकते थे। अगर हम कोशिश करते, तो हमें टॉर्चर किया जाता था," उसने कहा। कासमुद्दीन नामक एक अन्य मजदूर ने कहा, "हमें हर दिन पीटा जाता था और बिना आराम किए काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। वहां न सम्मान था, न आज़ादी।" मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि एक युवा लड़की को नाचने से मना करने पर सिगरेट से जला दिया गया, जो वहां व्याप्त क्रूरता की पराकाष्ठा को दर्शाता है।

रेस्क्यू और पुनर्वास

सहरसा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी 47 मजदूरों को भट्टे से आज़ाद कराया। इनमें से महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा प्रदान की गई है। सहरसा के श्रम अधिकारी रवींद्र कुमार शर्मा ने बताया कि सभी मजदूरों को वापस असम भेज दिया गया है और बंधुआ मजदूरी पुनर्वास योजनाओं के तहत उनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

उन्होंने यह भी पुष्टि की कि भट्टे से रेस्क्यू की गई सात नाबालिग लड़कियों को सहरसा के एक सरकारी बाल गृह में रखा गया है, जहां उनकी देखभाल और सुरक्षा की जा रही है। उनके बयान जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, विशेष रूप से यौन शोषण के आरोपों के संबंध में।

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