
रंगासामी-TVK की बढ़ती करीबियां, पुडुचेरी में नए समीकरणों की आहट
पुडुचेरी में खेल समारोह के दौरान CM रंगासामी और TVK नेता आधव अर्जुना की नजदीकियों ने नई राजनीतिक अटकलों और NDA समीकरणों को हवा दी।
पुडुचेरी में आयोजित एक खेल समारोह ने अचानक राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। 22 मई को आयोजित 76वीं राष्ट्रीय जूनियर बास्केटबॉल चैंपियनशिप के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री एन रंगासामी और तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) नेता आधव अर्जुना एक ही मंच पर नजर आए।जो कार्यक्रम शुरुआत में एक सामान्य सार्वजनिक आयोजन माना जा रहा था, वह दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी भरे संवाद के बाद बड़े राजनीतिक संकेतों में बदल गया। इस मुलाकात ने पुडुचेरी की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और सत्तारूढ़ गठबंधन में बीजेपी पर संभावित दबाव को लेकर अटकलों को हवा दे दी है।
रंगासामी और TVK की बढ़ती नजदीकियां
अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी TVK के उभरते चेहरे माने जा रहे आधव अर्जुना ने मंच से कहा कि उनकी पार्टी हमेशा पुडुचेरी के साथ खड़ी रहेगी।उन्होंने विजय और रंगासामी की तुलना करते हुए कहा कि दोनों नेता आलोचनाओं की परवाह किए बिना आगे बढ़ते रहे हैं।
आधव अर्जुना ने कहा, “जो लोग इन नेताओं की आलोचना करते थे, वे आज राजनीति से गायब हो चुके हैं।” उन्होंने पुडुचेरी के विकास में TVK के समर्थन का भी भरोसा दिलाया।मुख्यमंत्री रंगासामी ने भी गर्मजोशी से प्रतिक्रिया दी और उम्मीद जताई कि विजय भविष्य में पुडुचेरी के विकास में बड़ी भूमिका निभाएंगे।उन्होंने पुडुचेरी और तमिलनाडु के “सौहार्दपूर्ण संबंधों” का जिक्र करते हुए यह विश्वास भी जताया कि पुडुचेरी एयरपोर्ट विस्तार के लिए तमिलनाडु सरकार आवश्यक जमीन उपलब्ध कराएगी।
क्यों बढ़ गई राजनीतिक चर्चा?
रंगासामी और TVK नेताओं की सार्वजनिक नजदीकियों को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पुडुचेरी की नई सरकार में सत्ता संतुलन बेहद नाजुक स्थिति में है।हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में रंगासामी की ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (AINRC) ने 12 सीटें जीती थीं, जबकि एनडीए सहयोगी बीजेपी को केवल चार सीटें मिली थीं।
TVK ने दो सीटें जीतीं और उसके सहयोगी ने एक सीट हासिल की। करीब 16 प्रतिशत वोट शेयर के साथ TVK अब पुडुचेरी की तीसरी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है।इसके अलावा दो निर्दलीय विधायक भी रंगासामी समर्थक माने जा रहे हैं। ऐसे में TVK के बाहरी समर्थन से मुख्यमंत्री संभावित रूप से 15 विधायकों का समर्थन जुटा सकते हैं।
कैबिनेट गठन को लेकर गतिरोध
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब पुडुचेरी में कैबिनेट गठन को लेकर लंबे समय से गतिरोध बना हुआ है।अब तक रंगासामी ने केवल दो मंत्रियों के साथ शपथ ली है — एनआर कांग्रेस के मल्लाडी कृष्णा राव और बीजेपी नेता के नमस्सिवायम।स्पीकर का पद और तीन कैबिनेट सीटें अभी भी खाली हैं।
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी स्पीकर पद के साथ-साथ गृह और आदि द्रविड़ कल्याण जैसे अहम मंत्रालयों की मांग कर रही है, जो पिछली एनडीए सरकार में उसके पास थे।बीजेपी अपने सहयोगी लच्छिया जननायगा काची (LJK) के संस्थापक जोस चार्ल्स मार्टिन को भी स्पीकर या मंत्री पद दिलाने की कोशिश कर रही है।
बीजेपी को राजनीतिक संदेश?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रंगासामी का TVK की ओर झुकाव बीजेपी के लिए एक रणनीतिक संदेश हो सकता है।इसका संकेत यह माना जा रहा है कि अगर एनडीए के भीतर बातचीत मुश्किल होती है, तो रंगासामी के पास दूसरे राजनीतिक विकल्प भी मौजूद हैं।
कांग्रेस भी रख रही नजर
उधर कांग्रेस भी पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।पूर्व मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने कथित तौर पर पार्टी की स्टीयरिंग कमेटी की बैठक बुलाई है, जिसमें पुडुचेरी की भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की जा रही है।तमिलनाडु में कांग्रेस और TVK के बीच बढ़ती समझ के मद्देनजर यह भी चर्चा है कि पुडुचेरी में भविष्य के चुनावों के लिए व्यापक विपक्षी मोर्चे की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं।
TVK की अलग पहचान बनाने की कोशिश
राजनीतिक गलियारों में TVK महासचिव आनंद की भी चर्चा हो रही है, जिनके रंगासामी के साथ व्यक्तिगत संबंध अच्छे बताए जाते हैं।विश्लेषकों का मानना है कि TVK धीरे-धीरे पुडुचेरी में तमिलनाडु से अलग अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रही है।
फिलहाल बीजेपी से दूरी मुश्किल
हालांकि TVK और रंगासामी के बीच बढ़ती नजदीकियों के बावजूद फिलहाल बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए से अलगाव की संभावना कम मानी जा रही है।क्योंकि केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण पुडुचेरी वित्तीय सहायता, परियोजनाओं की मंजूरी और विकास कार्यों के लिए काफी हद तक केंद्र सरकार पर निर्भर है।विश्लेषकों के मुताबिक रंगासामी पूरी तरह केंद्र से दूरी बनाने का जोखिम नहीं उठा सकते।
फिर भी बास्केटबॉल चैंपियनशिप के मंच पर दिखी यह राजनीतिक गर्मजोशी साफ संकेत दे रही है कि पुडुचेरी की राजनीति अब नए दौर में प्रवेश कर सकती है और बीजेपी के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

