
बागी सांसदों ने थामा शिंदे का हाथ, महाराष्ट्र की सियासत में हलचल
शिवसेना (UBT) के दो सांसद शिंदे गुट में शामिल हो चुके हैं। इससे महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका देते हुए शिवसेना (UBT) के छह बागी लोकसभा सांसदों में से कम से कम दो सांसदों ने रविवार को आधिकारिक तौर पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की पुष्टि कर दी। इस घटनाक्रम ने भविष्य की राजनीतिक लड़ाइयों में उद्धव ठाकरे की पार्टी को एकजुट रखने की क्षमता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि "ऑपरेशन सफल रहा है", जिससे यह संकेत मिला कि चर्चित ‘ऑपरेशन टाइगर’ वास्तव में चलाया गया था। वहीं उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा कि वह कोई भी "ऑपरेशन" अधूरा नहीं छोड़ते।
दल-बदल कानून से बचने के लिए छह सांसदों की जरूरत
लोकसभा में शिवसेना (UBT) के कुल नौ सांसद हैं। दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए बागी गुट को कम से कम छह सांसदों यानी दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी।इस बीच उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इस राजनीतिक चुनौती का मुकाबला करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व वाली पार्टी ही असली शिवसेना है। यह बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उस टिप्पणी के जवाब में आया, जिसमें शाह ने कहा था कि अब केवल एक ही शिवसेना है और उसका नेतृत्व एकनाथ शिंदे कर रहे हैं।
बागी सांसदों ने बताए पार्टी छोड़ने के कारण
शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसद नागेश पाटिल अष्टीकर और ओमप्रकाश राजे निम्बालकर ने पार्टी छोड़ने के पीछे कई कारण बताए। इनमें विकास कार्यों के लिए फंड की कमी, विपक्ष में रहने की मजबूरी और स्थानीय निकाय चुनावों में शिवसेना (UBT) की हार प्रमुख कारण रहे।
दोनों नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि हालिया स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान उद्धव ठाकरे मैदान में सक्रिय नजर नहीं आए, जिसका नुकसान पार्टी उम्मीदवारों को उठाना पड़ा।
नागेश पाटिल अष्टीकर बोले- विकास कार्यों के लिए नहीं मिला फंड
हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल अष्टीकर ने कहा कि उन्होंने अपनी विचारधारा से कोई समझौता नहीं किया है और वह केवल "एक शिवसेना से दूसरी शिवसेना" में गए हैं।सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि सत्ता में न होने के कारण कार्यकर्ताओं और जनता के काम नहीं हो पा रहे थे। उन्होंने दावा किया कि सांसद निधि (MPLAD) के 5 करोड़ रुपये पर्याप्त नहीं हैं और पिछले दो वर्षों में अपने क्षेत्र के लिए विकास निधि जुटाने में उन्हें सफलता नहीं मिली। अष्टीकर ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी के कुछ नेताओं, खासकर संजय राउत की टिप्पणियों से वह और अन्य सांसद नाराज थे।
ओमप्रकाश राजे निम्बालकर ने भी बदला पाला
ओस्मानाबाद (धाराशिव) से सांसद ओमप्रकाश राजे निम्बालकर का फैसला लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ था। उनके पिता पवनराजे निम्बालकर की हत्या के मामले में पूर्व मंत्री पद्मसिंह पाटिल को विशेष CBI अदालत से बरी किए जाने के बाद राजनीतिक समीकरण और जटिल हो गए थे।उद्धव ठाकरे ने उन्हें रोकने की कोशिश भी की। शिवसेना (UBT) विधायक कैलास पाटिल और वरुण सरदेसाई रविवार तड़के निम्बालकर के पुणे स्थित आवास पहुंचे और ठाकरे का संदेश उन्हें दिया। हालांकि, समर्थकों से चर्चा के बाद निम्बालकर ने शिंदे गुट में शामिल होने का फैसला कर लिया।
उन्होंने कहा, "हम स्थानीय निकाय चुनाव इसलिए हारे क्योंकि हम सत्ता में नहीं थे। पिछले दो वर्षों में विपक्ष में रहने के कारण मैं लोगों के लिए ज्यादा काम नहीं कर सका। इसी वजह से मैंने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का निर्णय लिया।"
अमित शाह से भी हुई बातचीत
निम्बालकर ने बताया कि एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस ने उनकी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी बातचीत कराई थी।उन्होंने कहा कि उन्होंने शाह से न्याय की मांग की और यह भी बताया कि शिंदे ने उन्हें आश्वासन दिया है कि CBI पद्मसिंह पाटिल को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील दायर करेगी।
छह सांसदों की गैरमौजूदगी से बढ़ी थीं अटकलें
17 जून को दिल्ली में आयोजित शिवसेना (UBT) संसदीय दल की बैठक में छह सांसद—संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल अष्टीकर और ओमप्रकाश राजे निम्बालकर—शामिल नहीं हुए थे। इसके बाद से ही उनके शिंदे गुट में जाने की अटकलें तेज हो गई थीं।
फडणवीस बोले- ऑपरेशन सफल रहा
शिवसेना (UBT) में टूट को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि "ऑपरेशन सफल रहा है और मरीज पूरी तरह स्वस्थ है।"उन्होंने कहा कि जिन लोगों को आत्ममंथन करने की जरूरत है, उन्हें अब ऐसा करना चाहिए। फडणवीस ने इस पूरे संकट के लिए उद्धव ठाकरे को जिम्मेदार ठहराया।वहीं एकनाथ शिंदे ने कहा, "मैं कोई भी ऑपरेशन अधूरा नहीं छोड़ता। हमने पहले भी यह साबित किया है। जल्द ही और बड़ी खबरें सामने आएंगी।"
उद्धव ठाकरे का पलटवार
मुंबई के भांडुप इलाके में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह बिल्कुल भी निराश नहीं हैं और यह पूरा घटनाक्रम भाजपा का "पाप" है।उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शिवसेना को खत्म करने और उसके नेताओं को तोड़ने की कोशिश कर रही है।ठाकरे ने कहा, "शिवसेना प्रमुख केवल एक ही हो सकते हैं और वह बालासाहेब ठाकरे हैं। कोई बाहरी व्यक्ति यह तय नहीं कर सकता कि शिवसेना का नेतृत्व कौन करेगा।"उन्होंने यह भी कहा कि अविभाजित शिवसेना ने 30 वर्षों तक कांग्रेस के खिलाफ संघर्ष किया, लेकिन कांग्रेस ने कभी शिवसेना को खत्म करने की कोशिश नहीं की, जैसा भाजपा कर रही है।
संजय राउत का दावा- कुछ सांसद अब भी संपर्क में
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने दावा किया कि कुछ बागी सांसद अब भी पार्टी के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि अपने-अपने क्षेत्रों में जनता के संभावित विरोध के कारण कुछ सांसदों में असमंजस की स्थिति है और कम से कम दो सांसदों के साथ बातचीत जारी है।इसी बीच बागी सांसद संजय पाटिल की बेटी और शिवसेना (UBT) की पार्षद राजुल पाटिल ने उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई।उन्होंने कहा, "मैं पार्टी के साथ हूं और पूरी निष्ठा के साथ अपना काम करती रहूंगी।"
महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़
शिवसेना (UBT) के सांसदों की संभावित टूट ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। यदि बागी सांसदों की संख्या छह तक पहुंचती है, तो उद्धव ठाकरे के लिए यह एक बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। वहीं शिंदे गुट और भाजपा इसे बालासाहेब ठाकरे की विरासत के विस्तार के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि उद्धव ठाकरे इसे भाजपा द्वारा शिवसेना को कमजोर करने की साजिश बता रहे हैं।

