
तमिलनाडु विधानसभा में उदयनिधि का हमला, सनातन से वंदे मातरम तक घमासान
तमिलनाडु विधानसभा के पहले सत्र में उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म और वंदे मातरम मुद्दे पर विजय सरकार को घेरा। अब इस मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है।
तमिलनाडु की नई विधानसभा का पहला पूर्ण सत्र शुरू होते ही सदन में जबरदस्त राजनीतिक गर्मी देखने को मिली। डीएमके नेता और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने अपने पहले ही भाषण में सनातन धर्म पर तीखा हमला बोला, वहीं मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को लेकर संतुलित और नरम रुख भी अपनाया।
डीएमके विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद विधानसभा में अपने पहले संबोधन में उदयनिधि ने साफ संकेत दिया कि डीएमके अब आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभाएगी। उन्होंने सदन में कहा, “हम एक मजबूत विपक्ष के रूप में काम करेंगे। सरकार की हर कमजोरी और कमी को उजागर करेंगे और उस पर सवाल उठाएंगे।” उनके इस बयान के बाद एक बार फिर सनातन धर्म को लेकर विवाद चर्चा में आ गया। इससे पहले 2023 में भी उदयनिधि के सनातन धर्म पर दिए गए बयान को लेकर बड़ा विवाद हुआ था और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।
नई सरकार के पहले विधानसभा सत्र में ही राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो गया। 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बावजूद डीएमके ने साफ कर दिया है कि वह कमजोर विपक्ष की भूमिका नहीं निभाएगी।चुनाव में 59 सीटें जीतने वाली डीएमके अब विजय सरकार के खिलाफ खुद को मजबूत राजनीतिक ताकत के रूप में पेश कर रही है। हालांकि वैचारिक मुद्दों पर हमला बोलने के साथ-साथ उदयनिधि ने मुख्यमंत्री विजय की कुछ बातों की तारीफ भी की।
उन्होंने शपथ ग्रहण के बाद सभी दलों के नेताओं से संवाद बनाने के लिए विजय की सराहना की और कहा कि विधानसभा के अंदर भी यही राजनीतिक शालीनता बनी रहनी चाहिए। उदयनिधि के भाषण से साफ दिखा कि डीएमके की रणनीति दोहरी होगी — विचारधारा और सांस्कृतिक मुद्दों पर सीधा हमला, लेकिन प्रशासनिक मामलों में सहयोगात्मक रवैया।
सत्र के दौरान एक और बड़ा विवाद “वंदे मातरम” को लेकर सामने आया। आमतौर पर तमिलनाडु के सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत राज्य गीत “तमिल थाई वाझ्थु” से होती है। लेकिन विजय के शपथ ग्रहण समारोह में राज्य गीत से पहले “वंदे मातरम” बजाया गया, जिस पर विपक्ष ने आपत्ति जताई।
उदयनिधि ने विधानसभा में यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया और पूछा कि आखिर वर्षों पुरानी परंपरा क्यों बदली गई। उन्होंने पश्चिम बंगाल के हालिया शपथ ग्रहण समारोह का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां “वंदे मातरम” नहीं बजाया गया था, फिर तमिलनाडु में ऐसा क्यों किया गया।
टीवीके सरकार ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि यह सिर्फ एक बार की घटना थी और भविष्य में सभी सरकारी कार्यक्रम पुराने प्रोटोकॉल के तहत ही आयोजित किए जाएंगे।विधानसभा के पहले ही दिन के घटनाक्रम से साफ हो गया है कि उदयनिधि स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके विपक्ष में रहते हुए भी बेहद आक्रामक राजनीति करने वाली है।वहीं मुख्यमंत्री विजय अभी अपनी नई जिम्मेदारी संभाल ही रहे हैं और ऐसे में आने वाले दिनों में विधानसभा ही टीवीके सरकार और डीएमके के बीच सबसे बड़ा राजनीतिक अखाड़ा बनने वाली है।
उदयनिधि के भाषण ने यह भी दिखा दिया कि तमिलनाडु की राजनीति में आने वाले समय में सांस्कृतिक प्रतीक और वैचारिक बहसें फिर केंद्र में रहने वाली हैं।मुख्यमंत्री के तौर पर विजय की पारी अभी शुरू ही हुई है, लेकिन विधानसभा के पहले सत्र ने साफ संकेत दे दिया है कि तमिलनाडु की राजनीति में असली सियासी ड्रामा अभी बाकी है।

