
यूपी पंचायत चुनाव की राह साफ, योगी सरकार ने बनाया OBC आयोग
योगी सरकार ने पंचायत चुनाव से पहले समर्पित OBC आयोग गठन को मंजूरी दी है। अब रैपिड सर्वे के बाद आरक्षण प्रक्रिया शुरू होगी।
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की सबसे बड़ी बाधा अब दूर होती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में समर्पित ओबीसी आयोग (Dedicated OBC Commission) के गठन को मंजूरी दे दी गई। सरकार के इस फैसले के बाद पंचायत चुनावों में आरक्षण प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
क्यों जरूरी था समर्पित ओबीसी आयोग?
उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव अप्रैल-मई में होने थे, लेकिन ओबीसी आरक्षण को लेकर कानूनी अड़चन के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।दरअसल, राज्य में पहले से मौजूद ओबीसी आयोग का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में समाप्त हो गया था, जिसे सरकार ने अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दिया था। हालांकि, कानूनी रूप से उसके पास “समर्पित आयोग” के अधिकार नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए समर्पित आयोग का गठन जरूरी है।
इसी को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने कैबिनेट के जरिए नए समर्पित ओबीसी आयोग के गठन का फैसला किया है। सरकार ने कहा कि यह निर्णय हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में लिया गया है।
क्या करेगा नया ओबीसी आयोग?
नवगठित आयोग राज्य में पिछड़े वर्गों की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिति का अध्ययन करेगा। इसके तहत ओबीसी समुदाय की वास्तविक आबादी का “रैपिड सर्वे” कराया जाएगा।आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिसके आधार पर पंचायतों और वार्डों में ओबीसी आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि किन सीटों पर और कितने प्रतिशत आरक्षण लागू होगा।
सुप्रीम कोर्ट का ‘ट्रिपल टेस्ट’ क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए “ट्रिपल टेस्ट” की व्यवस्था अनिवार्य की है। इसके तहत:
समर्पित आयोग का गठन होना चाहिए
ओबीसी आबादी का समकालीन और वास्तविक सर्वे होना चाहिए
कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर रहना चाहिए
इन्हीं मानकों को पूरा करने के लिए यूपी सरकार ने यह कदम उठाया है।
पंचायत चुनाव में आरक्षण के नियम
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में आरक्षण की प्रक्रिया निम्न कानूनों और नियमों के तहत लागू होती है:
उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1947
उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961
उत्तर प्रदेश पंचायत राज (स्थानों और पदों का आरक्षण एवं आवंटन) नियमावली, 1994
इन नियमों के अनुसार पंचायतों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण तय किया जाता है।सरकार ने स्पष्ट किया है कि ओबीसी के लिए कुल आरक्षण 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
आयोग की संरचना और कार्यकाल
राज्य सरकार द्वारा गठित इस समर्पित ओबीसी आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे। आयोग में उन्हीं लोगों को शामिल किया जाएगा जिन्हें पिछड़े वर्गों के मामलों और समस्याओं की विशेष जानकारी हो।आयोग के अध्यक्ष के रूप में हाईकोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नियुक्त किया जाएगा। आयोग का कार्यकाल नियुक्ति की तारीख से छह महीने का होगा।
कब हो सकते हैं पंचायत चुनाव?
अब आयोग ओबीसी आबादी और सामाजिक स्थिति का सर्वे करेगा। इसके बाद आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा और उसी आधार पर आरक्षण संबंधी अधिसूचना जारी होगी।अगर आरक्षण प्रक्रिया को लेकर कोई कानूनी विवाद नहीं हुआ, तो राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान करेगा।
अब आगे क्या?
समर्पित ओबीसी आयोग के गठन के साथ ही पंचायत चुनाव की प्रक्रिया फिर से सक्रिय हो गई है। अब आयोग द्वारा किए जाने वाले रैपिड सर्वे के जरिए पिछड़े वर्गों की वास्तविक आबादी का आंकड़ा सामने आएगा और उसी के आधार पर पंचायत सीटों का आरक्षण तय किया जाएगा। इसके बाद ही पंचायत चुनावों का अंतिम कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।

