पूरे 6 पद्य के ‘वंदे मातरम’ गायन से शुरू हुआ विजय का शपथ ग्रहण, विवाद!
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तमिलनाडु में सरकारी आयोजनों में अब तक यह परंपरा रही है कि कार्यक्रम की शुरुआत तमिल प्रार्थना गीत से की जाती है और समापन राष्ट्रगान के साथ किया जाता है।

पूरे 6 पद्य के ‘वंदे मातरम’ गायन से शुरू हुआ विजय का शपथ ग्रहण, विवाद!

शपथ ग्रहण में पहले पूरे छह पद्य वाला ‘वंदे मातरम’ गाया गया, इसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया गया और फिर तमिल राज्य गीत ‘तमिऴ ताय वाऴ्त्तु’ गाया गया


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केंद्र सरकार द्वारा कुछ महीने पहले जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत ‘वंदे मातरम’ के पूरे छह स्तंज़ा के गायन को अनिवार्य किए जाने के बाद, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में थलपति विजय के शपथ ग्रहण समारोह में इस नियम का पालन किया गया। समारोह में राष्ट्रीय गीत का पूरा संस्करण राष्ट्रीय गान से पहले प्रस्तुत किया गया, जिससे प्रोटोकॉल को लेकर नई बहस छिड़ने की संभावना जताई जा रही है।

थलपति विजय ने रविवार को चेन्नई स्थित जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में पहले पूरे छह पद्य (स्टेंजा) वाला ‘वंदे मातरम’ गाया गया, इसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया गया और फिर तमिल राज्य गीत ‘तमिऴ ताय वाऴ्त्तु’ गाया गया।

तमिलनाडु में सरकारी आयोजनों में अब तक परंपरा यह रही है कि कार्यक्रम की शुरुआत तमिल राज्य गीत से होती है और अंत राष्ट्रगान के साथ किया जाता है। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ आमतौर पर औपचारिक रूप से शामिल नहीं किया जाता। ऐसे में आज के समारोह में क्रम बदलकर पहले ‘वंदे मातरम’ का गायन और फिर राज्य गीत को तीसरे स्थान पर रखना चर्चा का विषय बन गया है।

समारोह के अंत में एक बार फिर पूरा ‘वंदे मातरम’ और उसके बाद राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया। इस बदलाव को लेकर प्रोटोकॉल और परंपरा पर सवाल उठने की संभावना है।

इससे पहले केंद्र की मोदी सरकार ने इस वर्ष फरवरी में ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक बड़ा निर्देश जारी किया था, जिसमें संविधान सभा द्वारा अपनाए गए राष्ट्रीय गीत के संदर्भ में इसके संशोधित और पूर्ण स्वरूप को लागू करने की बात कही गई थी।

28 जनवरी को गृह मंत्रालय द्वारा जारी 10 पन्नों के आदेश में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया था कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखित इस गीत का आधिकारिक स्वरूप अपनाया जाए। आदेश के अनुसार, इसमें चार अतिरिक्त पद्य शामिल किए गए, जिन्हें मूल रूप से संविधान सभा द्वारा अपनाए गए संस्करण में शामिल नहीं किया गया था।

गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि अब ‘वंदे मातरम’ का पूरा छह स्तंज़ा वाला संस्करण लगभग 3 मिनट 10 सेकंड की अवधि में प्रस्तुत किया जाएगा।

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