
तमिलनाडु में विजय की ‘साइलेंट पॉलिटिक्स’ क्यों बन गई गेमचेंजर?
रैलियों में हादसे, CBI जांच, तलाक और फिल्म विवादों के बावजूद विजय की खामोश राजनीति काम कर गई। TVK को 108 सीटें दिलाकर तमिलनाडु में बड़ा बदलाव ला दिया।
भाषणों, प्रेस कॉन्फ्रेंसों और तीखी राजनीतिक बयानबाजी वाली भारतीय राजनीति में एक नेता ऐसा भी उभरा, जिसने लगभग चुप रहकर अपनी पूरी राजनीतिक पहचान बना ली। अभिनेता से नेता बने विजय ने पिछले एक साल में ऐसी कई बड़ी चुनौतियों का सामना किया, जो किसी भी राजनीतिक करियर को खत्म कर सकती थीं। उनकी रैली में 41 लोगों की मौत हुई, सीबीआई ने पूछताछ के लिए बुलाया, 30 साल पुरानी शादी सार्वजनिक विवाद में टूट गई और उनकी आखिरी फिल्म रिलीज से पहले ऑनलाइन लीक हो गई। लेकिन हर बार विजय की प्रतिक्रिया लगभग एक जैसी रही — खामोशी। इसके बावजूद तमिलनाडु की जनता ने उनकी पार्टी टीवीके (TVK) को 108 सीटें देकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बना दिया।
करूर रैली की त्रासदी और पहली बड़ी खामोशी
27 सितंबर 2025 को करूर में टीवीके की एक विशाल रैली हादसे में बदल गई। आरोप लगा कि विजय करीब सात घंटे देरी से पहुंचे। सुबह से धूप में इंतजार कर रही भीड़ उनके काफिले को देखते ही बेकाबू हो गई। बैरिकेड टूट गए और भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए।विपक्षी दलों ने एफआईआर की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए। तमिलनाडु सरकार ने राजनीतिक रैलियों के लिए नए सुरक्षा नियम लागू किए।
विजय ने मृतकों के परिवारों को 20-20 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की और दो हफ्तों के लिए अपनी रैलियां स्थगित कर दीं। हादसे के तीन दिन बाद उन्होंने एक वीडियो जारी किया, जिसमें दुख जताया गया और पार्टी कार्यकर्ताओं का बचाव किया गया। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि हादसा क्यों हुआ, जिम्मेदार कौन था और वे सात घंटे देर से क्यों पहुंचे। उन्होंने कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की और पत्रकारों के सवालों से दूरी बनाए रखी।
फिल्म विवाद और सीबीआई पूछताछ पर भी चुप्पी
जनवरी 2026 में विजय की आखिरी फिल्म जन नायकन (Jana Nayagan) पोंगल पर रिलीज होने वाली थी। लेकिन सेंसर बोर्ड ने राजनीतिक संवादों और सैन्य दृश्यों पर आपत्ति जताते हुए प्रमाणपत्र रोक दिया। मामला मद्रास हाई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। तमिल सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक कानूनी विवाद में फंस गई, लेकिन विजय ने सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा।इसी बीच 12 जनवरी को वे दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय पहुंचे, जहां करूर हादसे को लेकर उनसे पूछताछ हुई। फिल्म विवाद और 41 मौतों की जांच — दोनों मामलों में विजय ने कैमरों के सामने एक शब्द तक नहीं बोला।
निजी जिंदगी का विवाद भी बना राष्ट्रीय मुद्दा
27 फरवरी 2026 को विजय की पत्नी संगीता सोर्नलिंगम (Sangeetha Sornalingam) ने तलाक की अर्जी दायर की। लगभग 30 साल पुराने रिश्ते के टूटने की खबर पूरे देश की सुर्खियों में छा गई।अर्जी में बेवफाई और मानसिक प्रताड़ना जैसे आरोप लगाए गए। लेकिन विजय ने सीधे तौर पर कोई सफाई नहीं दी।
एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने सिर्फ इतना कहा “मेरे आसपास हाल में जो समस्याएं हुई हैं, उनकी चिंता मत कीजिए। वे मुद्दे इतने महत्वपूर्ण नहीं हैं।” इस बयान के कई मतलब निकाले गए, लेकिन विजय ने किसी भी अटकल पर प्रतिक्रिया नहीं दी।
फिल्म लीक हुई, फिर भी नहीं बोले विजय
चुनाव से ठीक दो हफ्ते पहले, 10 अप्रैल को जना नायकन पूरी की पूरी एचडी क्वालिटी में ऑनलाइन लीक हो गई। करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से बनी फिल्म और 120 करोड़ के ओटीटी सौदे को बड़ा झटका लगा।फिल्म इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया, प्रशंसक नाराज हो गए, लेकिन विजय फिर भी चुप रहे।
आखिर विजय की ‘खामोशी’ क्यों काम कर गई?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की चुप्पी कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है।राजनीति में हर बयान विपक्ष के लिए हथियार बन सकता है। हर प्रेस कॉन्फ्रेंस विवाद पैदा कर सकती है। विजय ने बोलने से ज्यादा ‘न बोलने’ को अपनी ताकत बना लिया।तमिलनाडु की राजनीति दशकों से डीएमके और एआईएडीएमके की तीखी बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक ड्रामे से भरी रही है। ऐसे माहौल में विजय का शांत रहना खासकर युवा और महिला मतदाताओं को अलग और गरिमापूर्ण लगा।यही वजह रही कि टीवीके 108 सीटें जीतकर तमिलनाडु की सबसे बड़ी पार्टी बन गई।
अब सबसे बड़ी चुनौती सरकार गठन
हालांकि अब विजय की राजनीति सबसे कठिन दौर में पहुंच चुकी है।राज्यपाल ने अभी तक उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया है, क्योंकि पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। दूसरी ओर, दशकों से एक-दूसरे के विरोधी रहे डीएमके और एआईएडीएमके के संभावित गठबंधन की चर्चा तेज हो गई है, जिसका मकसद टीवीके को सत्ता से दूर रखना माना जा रहा है।रिपोर्ट्स के मुताबिक संभावित सहयोगियों को व्हाट्सऐप के जरिए समर्थन पत्र भेजे गए हैं। लेकिन विजय अब भी सार्वजनिक तौर पर चुप हैं।
एक ट्वीट जिसने बदल दिए राजनीतिक मायने
हालांकि इस बीच विजय ने एक ट्वीट जरूर किया। यह ट्वीट 12वीं बोर्ड परीक्षा के छात्रों के लिए था। उन्होंने असफल छात्रों के लिए लिखा “याद रखिए, हम जीत के बहुत करीब हैं।” तमिल भाषा में लिखे इस संदेश में “आप” की जगह “हम” शब्द का इस्तेमाल किया गया। राजनीतिक हलकों में इसे 108 सीटों वाले टीवीके विधायकों और समर्थकों के लिए संकेत माना गया। विश्लेषकों के मुताबिक विजय बिना सीधे बोले यह बताना चाहते थे कि वे हालात को समझ रहे हैं और राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
क्या खामोशी से सरकार भी बन जाएगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस खामोशी ने विजय को चुनाव जिताया, क्या वही उन्हें सत्ता तक भी पहुंचा पाएगी?अब उनका सामना आम जनता से नहीं, बल्कि दशकों पुराने अनुभवी नेताओं से है, जिनकी राजनीति भाषण, बातचीत और सीधे सत्ता संघर्ष पर टिकी है।तमिलनाडु की राजनीति में इस समय सबसे दिलचस्प कहानी शायद यही है क्या विजय की चुप्पी सरकार बनाने की ताकत भी बन पाएगी?

