
त्रिची से विजय का बड़ा संदेश, सत्ता में रहकर भी जारी रहेगी सियासी जंग
मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय ने पहले बड़े संबोधन में डीएमके- एआईडीएमके पर हमला बोला। विपक्ष ने उन पर शासन के बजाय राजनीति करने का आरोप लगाया।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने त्रिची ईस्ट विधानसभा क्षेत्र में आयोजित धन्यवाद सभा को संबोधित किया। यह वही क्षेत्र है जिसने उन्हें विधानसभा तक पहुंचाया। अपने संबोधन में विजय ने सरकार की उपलब्धियों या नई योजनाओं की घोषणा करने के बजाय चुनाव के बाद हुए राजनीतिक घटनाक्रमों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई राजनीतिक दलों ने टीवीके को सरकार बनाने से रोकने की कोशिश की। साथ ही उन्होंने डीएमके और एआईडीएमके पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह विजय का पहला सार्वजनिक संबोधन था, जिसने आने वाले महीनों में उनकी राजनीतिक रणनीति की झलक भी पेश की।
राजनीतिक विरोधियों पर हमला
अपने पूरे भाषण के दौरान विजय ने बार-बार उन कथित प्रयासों का जिक्र किया, जिनके जरिए उनके राजनीतिक विरोधी TVK को सत्ता से दूर रखना चाहते थे। उन्होंने DMK और AIADMK दोनों पर हमला बोलते हुए TVK को राज्य की पारंपरिक द्रविड़ राजनीति का विकल्प बताने की कोशिश की। राजनीतिक विश्लेषक R Ilangovan का मानना है कि विजय का भाषण उस राजनीतिक वास्तविकता से प्रभावित था, जिसमें उनकी सरकार स्पष्ट बहुमत के बिना काम कर रही है।
इलंगोवन ने कहा, "सरकार फिलहाल बाहरी समर्थन के सहारे चल रही है। TVK और उसका नेतृत्व Viduthalai Chiruthaigal Katchi, Communist Party of India, Communist Party of India (Marxist) और Indian Union Muslim League जैसे दलों के समर्थन पर लंबे समय तक निर्भर नहीं रहना चाहते। वे स्पष्ट बहुमत चाहते हैं।"उनके अनुसार, मुख्यमंत्री का भाषण केवल मौजूदा विरोधियों को नहीं बल्कि भविष्य के चुनावी मुकाबलों को भी ध्यान में रखकर दिया गया था।
उन्होंने कहा, "अब विजय DMK को निशाना बना रहे हैं। लेकिन जब आप उन्हीं दलों का चुनाव बाद समर्थन स्वीकार करते हैं जिन्होंने आपके खिलाफ चुनाव लड़ा था, तो आप दूसरों की गठबंधन राजनीति पर सवाल नहीं उठा सकते।"
भविष्य की रणनीति पर नजर
इलंगोवन का मानना है कि TVK पहले से ही संभावित उपचुनावों की तैयारी में जुट गई है ताकि विधानसभा में अपनी स्थिति मजबूत कर सके।उन्होंने कहा, "पहली बार कोई अल्पमत सरकार खुद को स्थिर करने की कोशिश कर रही है। वे भविष्य के उपचुनावों की तैयारी कर रहे हैं क्योंकि वे आरामदायक बहुमत चाहते हैं और किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहते।"
उन्होंने यह भी कहा कि विजय के भाषण में शासन और प्रशासन से जुड़ी बातें बहुत कम थीं।
"मुख्यमंत्री बनने के बाद जनता से उनकी यह पहली मुलाकात थी, लेकिन उन्होंने शासन पर ज्यादा बात नहीं की। ऐसा लगता है कि वे फिर से चुनावी मोड में लौट आए हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अगला चुनाव ज्यादा दूर नहीं है," उन्होंने कहा।
भीड़ ने दिखाई लोकप्रियता
राजनीतिक विश्लेषक R Sundar का मानना है कि विजय का भाषण समर्थकों को यह भरोसा दिलाने के लिए था कि उन्होंने TVK को वोट देकर सही फैसला लिया।
सुंदर ने कहा, "सरकार गठन के दौरान DMK-AIADMK गठबंधन की चर्चाएं खूब हुई थीं। विजय ने उनका जिक्र कर लोगों में यह भावना मजबूत करने की कोशिश की कि उन्होंने उन्हें वोट देकर सही निर्णय लिया।"
उनके अनुसार, त्रिची की सभा में उमड़ी भीड़ विजय की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा, "त्रिची में विजय के स्वागत के लिए जुटी भीड़ दिखाती है कि उनका जनसमर्थन लगातार बढ़ रहा है। चेन्नई और अन्य शहरों में भी वे बड़ी भीड़ जुटाने में सक्षम हैं।"सुंदर ने यह भी कहा कि चुनाव प्रचार के मुकाबले विजय अब अधिक आत्मविश्वासी और प्रभावशाली वक्ता के रूप में नजर आए।
"उन्होंने अपने भाषण कौशल में काफी सुधार किया है। मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में उन्होंने साफ और पारदर्शी शासन का आश्वासन दिया। हालांकि उनका भाषण मुख्य रूप से राजनीतिक था, लेकिन इससे यह भी संकेत मिला कि लोग अब राजनीतिक मुद्दों और समाचारों पर अधिक ध्यान देने लगे हैं।"
आलोचनाओं से अप्रभावित दिखने की कोशिश
विजय के भाषण की एक खास बात यह थी कि उन्होंने खुद को विपक्ष की आलोचनाओं से अप्रभावित दिखाने की कोशिश की।सुंदर ने कहा, "उन्होंने अपने भाषण में कहा कि जनता चाहती है कि वे काम करें और आलोचनाओं का जवाब जनता खुद देगी। इसके जरिए वे यह संदेश देना चाहते हैं कि DMK और AIADMK की टिप्पणियों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।"उन्होंने AIADMK को "खत्म हो चुकी शक्ति" (थीरंधु पोना शक्ति) बताने वाले विजय के बयान का भी उल्लेख किया।
सुंदर के अनुसार, "जब विजय कहते हैं कि वे एमजीआर के अनुयायी हैं, उनका सम्मान करते हैं और कभी उनकी बराबरी नहीं कर सकते, तो वे AIADMK समर्थकों को यह संकेत दे रहे हैं कि उनके लिए TVK ही नया राजनीतिक ठिकाना बन सकता है।"
विपक्ष ने उठाए सवाल
विजय के भाषण की विपक्ष ने आलोचना भी की है। DMK प्रवक्ता Saravanan का कहना है कि विजय अब भी चुनावी भाषणों में ही व्यस्त हैं और शासन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे।उन्होंने कहा, "उन्हें कोई ऐतिहासिक जीत नहीं मिली है। लेकिन वे ऐसे बोल रहे हैं मानो उन्हें 180 या 200 सीटें मिली हों। जनता ने उन्हें स्पष्ट जनादेश नहीं दिया। इसलिए उन्हें पहले इसका विश्लेषण करना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ।"सरवनन ने कहा कि मुख्यमंत्री को अब चुनावी वादों को पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए।"उन्हें लोगों की समस्याओं का समाधान देना चाहिए, न कि दूसरों को दोषी ठहराना चाहिए। वे अब भी चुनावी मोड में हैं और यह शासन के लिए अच्छा संकेत नहीं है।"
पहले महीने के कामकाज पर सवाल
सरवनन ने सरकार के पहले महीने के प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए।उन्होंने कहा, "अब तक सिर्फ निराशा ही हाथ लगी है। मुख्यमंत्री को स्पष्ट समयसीमा बतानी चाहिए कि वे अपने चुनावी वादों को कब पूरा करेंगे। केवल यह कहकर जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता कि उचित समय पर सब किया जाएगा।"उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर विजय की आलोचनाओं को भी खारिज किया।
"तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति कोई छिपा हुआ रहस्य नहीं है। चुनाव प्रचार के दौरान भी विजय को इसकी जानकारी थी। अब उन्हें आय बढ़ाने के रास्ते खोजने होंगे। फिलहाल उनके पास कोई स्पष्ट रोडमैप नजर नहीं आता।"
राजनीतिक संघर्ष जारी रखने का संकेत
विजय के समर्थकों के लिए त्रिची की रैली इस बात का प्रमाण थी कि वे अब भी बड़ी भीड़ जुटाने और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बने रहने की क्षमता रखते हैं।वहीं आलोचकों के लिए यह भाषण इस सवाल को जन्म देता है कि क्या मुख्यमंत्री शासन और प्रशासन पर पर्याप्त ध्यान दे रहे हैं।
एक बात स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले बड़े सार्वजनिक संबोधन में विजय ने सरकार की उपलब्धियों का बखान करने के बजाय उन राजनीतिक संघर्षों को दोबारा याद किया, जिन्होंने उनकी सरकार के गठन का रास्ता तैयार किया था।इस तरह उन्होंने संकेत दिया कि सत्ता में आने के बाद भी TVK राजनीतिक लड़ाई को जारी रखने के मूड में है।

