CBI के बाद अब बंगाल CID का शिकंजा; अभिषेक बनर्जी को दोबारा समन
x

CBI के बाद अब बंगाल CID का शिकंजा; अभिषेक बनर्जी को दोबारा समन

फर्जी सिग्नेचर केस में पूछताछ के दौरान आपा खो बैठे टीएमसी महासचिव. जवाबों से असंतुष्ट सीआईडी ने 14 जून को फिर बुलाया; विधानसभा प्रस्ताव पर फंसा है पेंच.


Abhishek Banerjee CID Inquiry: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'सिग्नेचर फॉरजरी' (फर्जी हस्ताक्षर) मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. कलकत्ता हाई कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद गुरुवार को राज्य जांच एजेंसी (CID) के सामने पेश हुए अभिषेक बनर्जी के जवाबों से जांच टीम बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है. यही वजह है कि पश्चिम बंगाल सीआईडी (CID) ने शुक्रवार (12 जून) को नए सिरे से समन जारी कर उन्हें आगामी 14 जून (रविवार) को दूसरे दौर की पूछताछ के लिए दोबारा तलब किया है.

जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने सनसनीखेज दावा किया है कि गुरुवार को भवानी भवन (CID मुख्यालय) में हुई कई घंटों की मैराथन पूछताछ के दौरान अभिषेक बनर्जी कई सवालों पर अपना आपा खो बैठे. विधानसभा में सौंपे गए विवादित प्रस्ताव और उस पर मौजूद विधायकों के हस्ताक्षरों से जुड़े कई अहम सवालों पर टीएमसी सांसद ने सीधे तौर पर "मुझे नहीं पता" कहकर पल्ला झाड़ लिया. सीआईडी के अनुसार, कई जरूरी वित्तीय और सांगठनिक रिकॉर्ड अभी तक जांच टीम को नहीं सौंपे गए हैं, इसलिए उन्हें रविवार को सभी संबंधित दस्तावेजों के साथ दोबारा पेश होने को कहा गया है.

क्या है वो 'फर्जी सिग्नेचर' विवाद, जिसने हिला दी टीएमसी की साख?
यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में 'नेता प्रतिपक्ष' के चयन के लिए सौंपे गए एक आधिकारिक प्रस्ताव पत्र में कथित धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ा है:

6 मई की बैठक: कोलकाता के कालीघाट स्थित मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास पर टीएमसी विधायकों की बैठक हुई थी, जिसमें सोवनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा गया और विधायकों ने हाथ उठाकर इसका समर्थन किया.

19 मई का 'फर्जी' खेल: विधायकों के शपथ ग्रहण के बाद जब विधानसभा सचिवालय ने इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव मांगा, तो 19 मई को 70 विधायकों के हस्ताक्षरों वाला एक दस्तावेज जमा किया गया.

दस्तावेजों में हेरफेर: बाद में जांच में सामने आया कि टीएमसी विधायकों द्वारा अन्य सरकारी दस्तावेजों पर किए गए असली हस्ताक्षरों और इस प्रस्ताव पत्र पर किए गए हस्ताक्षरों में भारी विसंगतियां थीं. सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि जो विधायक उस दिन बैठक में मौजूद ही नहीं थे, उनके दस्तखत इस लिस्ट में कैसे आ गए? इसी धांधली के बाद एफआईआर (FIR) दर्ज हुई और मामला सीआईडी को सौंपा गया.

मुख्यालय से सीधे ममता बनर्जी के घर पहुंचे अभिषेक; टीएमसी खेमे में मची खलबली
सीआईडी अधिकारियों के मुताबिक, जांच का मुख्य फोकस यह स्थापित करना है कि ये दस्तावेज किस परिस्थिति में तैयार किए गए, मूल कॉपी कहां है और किन लोगों ने अनुपस्थित विधायकों के फर्जी दस्तखत किए. इस मामले में सीआईडी पहले ही तृणमूल कांग्रेस के कई विधायकों से कड़ी पूछताछ कर चुकी है.

इस कानूनी शिकंजे ने टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व को गहरी चिंता में डाल दिया है. गुरुवार रात को सीआईडी मुख्यालय से बाहर निकलते ही अभिषेक बनर्जी सीधे कालीघाट स्थित पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के आवास पर पहुंचे, जहां कई वरिष्ठ नेताओं के साथ देर रात तक आपातकालीन बैठक हुई. हालांकि, बाहर निकलते वक्त अभिषेक ने मीडिया के कैमरों के सामने एक शब्द भी नहीं बोला. रविवार को होने वाली दूसरे दौर की इस पूछताछ पर अब पूरे बंगाल की नजरें टिकी हुई हैं.


Read More
Next Story