
DMK पर जुबानी हमला, BJP पर मौन, क्या Vijay हैं BJP की 'बी टीम'?
करूर हादसे के बाद विजय पर काफी दबाव था। उस समय केंद्र सरकार ने चुपचाप उनका समर्थन किया। इसका पहला संकेत उन्हें ‘Y’ श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने से मिला।
जैसे-जैसे अभिनेता और तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के प्रमुख विजय तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए अपना प्रचार तेज कर रहे हैं, राजनीतिक हलकों में एक सवाल बार-बार उठ रहा है: वे राज्य की सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) पर तो तीखा हमला करते हैं, लेकिन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की सीधे आलोचना क्यों नहीं करते?
शुक्रवार (13 फरवरी) को तमिलनाडु के सेलम जिले के सीलनाइकेनपट्टी में हुई TVK की बैठक में, जिसमें लगभग 5,000 लोग शामिल हुए, विजय ने उन आलोचकों को परोक्ष रूप से जवाब दिया जो उन पर केवल DMK को निशाना बनाने का आरोप लगाते हैं।
तमिलनाडु में सत्ता में कौन है?
विजय ने कहा, “तमिलनाडु में सत्ता में कौन है? लोग कहते हैं कि वह सिर्फ इन्हीं का विरोध करता है, दूसरों के बारे में कुछ नहीं कहता। यह कौन सा चुनाव है? यह तमिलनाडु विधानसभा चुनाव है। अभी यहां सत्ता में कौन है? कौन झूठे वादे कर रहा है और जनता को धोखा दे रहा है? कौन जनविरोधी सरकार चला रहा है? तो यहां से किसे हटाना चाहिए?” उन्होंने आगे कहा, “अगर हमें इस जनविरोधी DMK सरकार को हटाना है, तो हमें किसका विरोध करना चाहिए? जिनको जनता पहले ही कई बार हटा चुकी है, उनका बेवजह विरोध क्यों करें? जब हमारा लक्ष्य DMK है, तो अंधेरे में पत्थर क्यों फेंकें?” उनके इस बयान पर समर्थकों ने जोरदार तालियां बजाईं।
BJP को अब भी उम्मीद
राजनीतिक विश्लेषकों ने इन बयानों को विपक्षी सहयोगी पार्टियों ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर परोक्ष हमला माना। ये दोनों पार्टियां तमिलनाडु में पहले कई बार जनता द्वारा नकार दी गई हैं। हालांकि विजय का मुख्य निशाना अब भी DMK ही है। विजय चाहे कुछ भी कहें, लेकिन तमिलनाडु BJP के नेता अभी भी TVK के साथ गठबंधन की उम्मीद नहीं छोड़ रहे हैं। TVK इस चुनाव में पहली बार मैदान में उतर रही है।
‘द फेडरल’ से बातचीत में तमिलनाडु BJP की पूर्व अध्यक्ष तमिलिसाई सुंदरराजन ने विजय को “भाई” कहा और सलाह दी कि उन्हें नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) में शामिल होने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर विजय सच में DMK को हराना चाहते हैं, तो उन्हें NDA में शामिल होना चाहिए। राजनीतिक गठबंधन अलग होते हैं, चुनावी गठबंधन अलग होते हैं और वैचारिक गठबंधन अलग होते हैं। मेरे ‘छोटे भाई’ विजय को यह समझना चाहिए।”
शुक्रवार की बैठक में विजय ने कहा कि वे जनता के लिए बिना किसी बहाने के लड़ने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, “सत्ता में आने के बाद भी मैं यह कहकर चुप नहीं बैठूंगा कि उन्होंने हमें यह नहीं दिया, उन्होंने वह नहीं दिया। मैं आपके लिए किसी भी हद तक जाकर लड़ने को तैयार हूं।” उनके इस बयान पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
CPI(M) के राज्य सचिव पी. शणमुगम ने विजय पर तीखा हमला किया और राज्य स्तरीय नेता के रूप में उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “करूर की घटना (जहां पिछले सितंबर में TVK की रैली में भगदड़ से 41 लोगों की मौत हुई थी) के बाद से विजय ने केंद्र सरकार के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा है। इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने 2026 के केंद्रीय बजट पर भी अभी तक कुछ नहीं बोला। जो व्यक्ति केंद्र सरकार की आलोचना करने से बचता है, वह तमिलनाडु में किसी राजनीतिक पार्टी का नेता कैसे बन सकता है?”
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि करूर हादसे के बाद विजय पर काफी दबाव था। उस समय कहा जाता है कि BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने चुपचाप उनका समर्थन किया। इसका पहला संकेत उन्हें ‘Y’ श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने से मिला।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, करूर मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच को भी केंद्र का समर्थन मिला, जो विजय के पक्ष में माना गया। TVK को “सीटी (whistle)” चुनाव चिन्ह मिलना भी कथित तौर पर केंद्र की मदद का एक उदाहरण बताया जाता है। हालांकि बाद में गठबंधन की बातचीत को लेकर मतभेद सामने आए, जिससे दोनों पक्षों के रिश्तों में कुछ ठंडापन आ गया। इसके बावजूद, विजय ने अपने सार्वजनिक भाषणों में BJP की सीधी आलोचना करने से परहेज किया है।
वरिष्ठ पत्रकार सावित्री कन्नन ने केंद्र पर विजय की चुप्पी को डर और अवसरवाद से जोड़ा। उन्होंने कहा, “मैं इसे डर से प्रेरित अवसरवाद कहूंगी। पिछले साल विजय ने केंद्रीय बजट की आलोचना की थी, लेकिन इस साल उन्होंने उस पर कुछ नहीं कहा। ‘जना नायकन’ फिल्म विवाद में भी उन्होंने राजनीतिक नेता की तरह व्यवहार नहीं किया। उन्हें जनता का समर्थन जुटाकर लड़ना चाहिए था। यही एक जननेता की पहचान होती है।”
उन्होंने आगे कहा, “उनके चल रहे आयकर मामलों और व्यापारिक हितों से जुड़ा डर भी हो सकता है। राजनीति में वही व्यक्ति खुलकर लड़ सकता है, जो जमीनी स्तर से ऊपर आया हो। लेकिन विजय एक व्यापारी की तरह सोचते नजर आते हैं, जो समस्याओं और संकटों से बचने के लिए पर्दे के पीछे चुपचाप कोशिश करता है।”
‘यह सिर्फ DMK और TVK की लड़ाई नहीं है’
सुंदरराजन ने विजय के इस दावे से असहमति जताई कि मुकाबला सिर्फ DMK और TVK के बीच है। उन्होंने ‘द फेडरल’ से कहा, “मैं विजय के इस बयान को स्वीकार नहीं करती कि यह लड़ाई केवल DMK और TVK के बीच है।”
उन्होंने कहा, “NDA गठबंधन कई चुनाव लड़ चुका है, जीत चुका है और अच्छा खासा वोट प्रतिशत हासिल कर चुका है। हम विजय के इस दावे पर कैसे भरोसा करें कि उनकी पार्टी के पास 30 प्रतिशत वोट हैं? हमने चुनावों में अपना वोट प्रतिशत साबित किया है। क्या वह अपना असली वोट प्रतिशत साबित कर सकते हैं? क्या सिर्फ जनसभाओं में भीड़ के शोर से यह साबित हो सकता है?
हम अनुभव के आधार पर बात कर रहे हैं; हमने वोट हासिल किए हैं और उसे साबित भी किया है। केवल भीड़ के शोर पर भरोसा करना सही नहीं है।”
सुंदरराजन ने आगे कहा, “ओपिनियन पोल में विजय को ज्यादा वोट प्रतिशत दिखाया जा सकता है, लेकिन सर्वे हमेशा सही नहीं होते। ये अभी साबित नहीं हुए वोट हैं। अगर विजय राजनीति में सिर्फ अपना वोट प्रतिशत साबित करने आए हैं, तो कोई समस्या नहीं है। लेकिन वे कहते हैं कि वे DMK को हराना चाहते हैं। क्या उनका बताया हुआ 15 प्रतिशत वोट काफी है? अगर वे 30-40 प्रतिशत वोट वाली पार्टियों के साथ मिल जाएं तो क्या होगा? उन्हें इस बारे में सोचना चाहिए।”
BJP के राज्य स्तर पर स्वयंसेवी संगठनों के प्रभारी रा. अर्जुनमूर्ति ने विजय से कहा कि किसी भी पार्टी को “नीति का दुश्मन” कहने से पहले उन्हें केंद्र सरकार की उपलब्धियों को पूरी तरह समझना चाहिए। उन्होंने कहा, “विजय को BJP की नीतियों से अलग राय हो सकती है, और यही लोकतंत्र की ताकत है। लेकिन किसी को ‘नीति का दुश्मन’ कहने से पहले उन्हें अल्पसंख्यकों के लिए चलाई गई कल्याण योजनाओं और दुनिया में भारत की प्रगति का अच्छे से अध्ययन करना चाहिए। विचारों में मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन तथ्यों और उपलब्धियों पर चर्चा संतुलित और सबूतों पर आधारित होनी चाहिए।”
BJP कार्यकर्ताओं ने विजय पर आरोप लगाया है कि वे TVK को “कमाई करने वाला कारोबार” बना रहे हैं और अपने प्रशंसकों, कार्यकर्ताओं और पार्टी का इस्तेमाल DMK को जिताने में कर रहे हैं। दूसरी ओर, DMK नेता उन्हें खुलकर “अपरिपक्व राजनेता”, “BJP की कठपुतली” और भगवा पार्टी की “बी-टीम” कहते हैं।
DMK सांसद दयानिधि मारन ने कहा, “विजय मेरे अच्छे दोस्त हैं। लेकिन इस समय वे BJP की बी-टीम की तरह काम कर रहे हैं। यह सच है कि उनके बहुत सारे प्रशंसक हैं। फिर भी तमिलनाडु की जनता जानती है कि क्या असली है और क्या नकली।”
पत्रकार कन्नन ने इन दोनों दावों का जवाब दिया। उन्होंने कहा, “जब भी कोई राजनीतिक रूप से DMK का विरोध करता है, उसे तुरंत BJP की बी-टीम कह दिया जाता है। वहीं NDA के नेता विजय को DMK की बी-टीम बताते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि विजय उनके पास आने वाले एंटी-DMK वोटों को रोक देंगे। लेकिन आने वाला चुनाव साफ कर देगा कि विजय असल में कौन हैं।”

