कौन हैं निशांत कुमार? राजनीति से संन्यास की बात करने वाले नीतीश के बेटे कैसे बन गए मंत्री?
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कौन हैं निशांत कुमार? 'राजनीति से संन्यास' की बात करने वाले नीतीश के बेटे कैसे बन गए मंत्री?

बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने गुरुवार को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। पटना में आयोजित इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह शामिल हुए।


बिहार की राजनीति में आज एक नए युग की शुरुआत हुई है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित एक भव्य समारोह में जेडीयू (JD-U) सुप्रीमो नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। राजनीति में कदम रखने के महज दो महीने के भीतर निशांत का मंत्री बनना न केवल जेडीयू बल्कि पूरे एनडीए (NDA) गठबंधन के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

मोदी-शाह की मौजूदगी में हुआ 'राजतिलक'

गुरुवार, 7 मई 2026 को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन ने निशांत कुमार समेत कुल 32 मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस समारोह की भव्यता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन विशेष रूप से मौजूद रहे।

यह मंत्रिमंडल विस्तार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार को मजबूती देने के लिए किया गया है। 243 सदस्यों वाली विधानसभा में 89 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के कोटे से 15 मंत्रियों ने शपथ ली है। दिलचस्प बात यह है कि इस नई टीम में उन चेहरों को प्राथमिकता दी गई है जो पिछले साल नवंबर में एनडीए की सत्ता वापसी के दौरान भी कैबिनेट का हिस्सा थे।

पिता गए राज्यसभा, बेटे ने संभाली कमान

निशांत कुमार का कद अचानक बढ़ना तब शुरू हुआ जब उनके पिता नीतीश कुमार ने पिछले महीने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा जाने का फैसला किया। नीतीश कुमार के सक्रिय राज्य राजनीति से हटने के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि निशांत ही उनकी विरासत को आगे बढ़ाएंगे।

7 मार्च 2026 को निशांत ने औपचारिक रूप से जेडीयू की सदस्यता ली थी। राजनीति में आने के तुरंत बाद उन्होंने पश्चिम चंपारण के वाल्मीकि नगर से 'सद्भाव यात्रा' शुरू की। यह वही स्थान है जहाँ से नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री रहते हुए अपनी लगभग सभी महत्वपूर्ण यात्राओं की शुरुआत की थी। जेडीयू के पोस्टरों पर लगा नारा "जय निशांत, तय निशांत" आज सच साबित होता दिख रहा है।

कौन हैं निशांत कुमार? सॉफ्टवेयर इंजीनियर से 'आध्यात्मिक' झुकाव तक

20 जुलाई 1975 को जन्मे निशांत कुमार का अब तक का जीवन काफी शांत और सार्वजनिक चकाचौंध से दूर रहा है। वे नीतीश कुमार और स्वर्गीय मंजू सिन्हा की इकलौती संतान हैं। निशांत की शिक्षा पटना के सेंट करेन स्कूल और मसूरी के मानवा भारती इंडिया इंटरनेशनल स्कूल से हुई है। उन्होंने BIT मेसरा, रांची से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है।

साल 2017 तक निशांत का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने एक बार मीडिया से कहा था, "मुझे राजनीति में न तो दिलचस्पी है और न ही इस क्षेत्र का कोई ज्ञान। मेरा पहला प्यार अध्यात्म है और मैं उसी राह पर चल रहा हूँ।" लेकिन समय बदला और पार्टी की ज़रूरतों के चलते उन्होंने अपने पिता की विरासत को संभालने का फैसला किया।

'पढ़ा-लिखा युवा नेतृत्व': जेडीयू और भाजपा का समर्थन

निशांत के मंत्री बनने पर जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि वे अपराध, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता के खिलाफ नीतीश कुमार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को आगे बढ़ाएंगे। भाजपा नेता और बिहार के उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने भी उनका स्वागत करते हुए कहा, "निशांत एक शिक्षित युवा नेता हैं, उनके पास बी.टेक की डिग्री है और वे जमीन से जुड़े व्यक्ति हैं। नई पीढ़ी का राजनीति में आना खुशी की बात है।"

कैबिनेट का स्वरूप और चुनौतियां

सम्राट चौधरी की कैबिनेट में 32 मंत्रियों के शामिल होने के साथ ही एनडीए ने जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की पूरी कोशिश की है। जहाँ एक तरफ अनुभवी नेताओं को बरकरार रखा गया है, वहीं निशांत जैसे युवा चेहरे को शामिल कर पार्टी ने भविष्य की राजनीति के संकेत दे दिए हैं।

विपक्ष ने हालांकि इस पर 'परिवारवाद' का आरोप लगाना शुरू कर दिया है, लेकिन एनडीए नेताओं का तर्क है कि निशांत अपनी योग्यता और शिक्षा के दम पर सेवा करने आए हैं। अब देखना यह होगा कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की सूझबूझ रखने वाले निशांत बिहार के जटिल प्रशासनिक और राजनीतिक माहौल को कैसे संभालते हैं।

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