
क्या बीजेपी छोड़ेंगे अन्नामलाई? तमिलनाडु में नई पार्टी की चर्चा तेज
तमिलनाडु में अन्नामलाई के बीजेपी छोड़कर नई पार्टी बनाने की अटकलें तेज हैं। पोस्टर, संगठनात्मक गतिविधियां और हालिया राजनीतिक संकेत चर्चा का केंद्र बने हैं।
तमिलनाडु में अभिनेता-राजनेता सी. जोसेफ विजय की ऐतिहासिक चुनावी जीत और मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने के कुछ ही सप्ताह बाद राज्य की राजनीति में एक और बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया है। अटकलें तेज हैं कि पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई पार्टी छोड़कर एक नई राजनीतिक पार्टी का गठन कर सकते हैं।इन चर्चाओं को और हवा उनके समर्थकों ने दी है, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर संभावित पार्टी के नाम और झंडे के डिज़ाइन तक साझा कर रहे हैं। कुछ समर्थकों का दावा है कि नई पार्टी को लेकर आधिकारिक घोषणा जल्द ही की जा सकती है।
कोयंबटूर में लगे पोस्टर, बढ़ी चर्चाएं
कोयंबटूर के कई इलाकों में अन्नामलाई की तस्वीर वाले पोस्टर दिखाई दिए हैं। इन पोस्टरों पर लिखा है – "निर्भीक सोच की कोई सीमा नहीं होती।"अन्नामलाई के समर्थकों का कहना है कि उनकी फैन वेलफेयर संस्था "अन्नामलाई अन्बु कूट्टम" ने नए सदस्यों की भर्ती और पदाधिकारियों की नियुक्ति का अभियान भी शुरू कर दिया है।कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अन्नामलाई तुरंत कोई राजनीतिक दल शुरू नहीं करेंगे। संभव है कि वे पहले एक सामाजिक कल्याण संगठन की शुरुआत करें, जो भविष्य में राजनीतिक दल का रूप ले सकता है।
ऐसा ही मॉडल अभिनेता विजय ने भी अपनाया था। उन्होंने राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) लॉन्च करने से पहले "विजय मक्कल इयक्कम" नामक सामाजिक संगठन की स्थापना की थी।
जल्द दिल्ली में बीजेपी नेतृत्व से मुलाकात
इन तमाम अटकलों के बीच अन्नामलाई जल्द ही दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात करने वाले हैं। इस बैठक पर भी राजनीतिक विश्लेषकों की नजर टिकी हुई है।
बीजेपी से दूरी के संकेत?
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि हाल के दिनों में अन्नामलाई ने कुछ ऐसे संकेत दिए हैं जो बीजेपी नेतृत्व से उनकी दूरी को दर्शाते हैं।हाल ही में उन्होंने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन-भाषा नीति को वर्तमान शैक्षणिक सत्र से लागू करने के फैसले का खुलकर विरोध किया। यह रुख बीजेपी की आधिकारिक लाइन से अलग माना गया।
इसके अलावा उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स भी पिछले रविवार असामान्य रूप से शांत रहे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम "मन की बात" का कोई उल्लेख नहीं किया, जिसे उनके समर्थक भी एक संकेत के रूप में देख रहे हैं।अन्नामलाई लगातार दो राज्य केंद्रीय समिति बैठकों में भी शामिल नहीं हुए। इससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।दिलचस्प बात यह है कि ये सभी घटनाक्रम उस समय सामने आए हैं जब बीजेपी की राज्य केंद्रीय समिति की बैठक कोयंबटूर में चल रही है और अन्नामलाई स्वयं विदेश यात्रा पर हैं।
कांग्रेस ने भी ली चुटकी
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा,"तमिलनाडु में एक और राजनीतिक पार्टी आने वाली है। राजनीतिक हलचल तेजी से बढ़ रही है।"उन्होंने कथित नई पार्टी के संभावित नाम को लेकर भी रहस्यमय टिप्पणी की, जिससे चर्चाओं को और बल मिला।
तीन-भाषा नीति बना बड़ा विवाद
अन्नामलाई और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के बीच सबसे बड़ा मतभेद नई शिक्षा नीति के तहत लागू की जा रही तीन-भाषा व्यवस्था को लेकर माना जा रहा है।पिछले सप्ताह अन्नामलाई ने केंद्र सरकार से मांग की थी कि कक्षा 9 के छात्रों के लिए इस सत्र से तीन भाषाएं अनिवार्य करने का निर्णय वापस लिया जाए। उनका तर्क था कि हाई स्कूल के छात्रों पर अचानक नई भाषा थोपना उनके ऊपर अतिरिक्त दबाव डालेगा और पढ़ाई पर नकारात्मक असर पड़ेगा।उन्होंने शिक्षा मंत्रालय से आग्रह किया कि वह पहले से तय 2029-30 की समयसीमा का पालन करे।
चुनाव के दौरान भी थी नाराजगी की चर्चा
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान भी राजनीतिक गलियारों में अन्नामलाई की नाराजगी की चर्चा थी। कहा जा रहा था कि बीजेपी ने उन्हें चुनाव में पर्याप्त महत्व नहीं दिया।उन्हें न तो चुनाव लड़ने का टिकट मिला और न ही चुनाव प्रचार में कोई बड़ी भूमिका दी गई। पार्टी के भीतर उनके कई नेताओं से संबंध तनावपूर्ण बताए जाते हैं, जिनमें प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन भी शामिल हैं।
AIADMK के साथ गठबंधन भी बना विवाद की वजह
अन्नामलाई के AIADMK के साथ भी संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता को लेकर कुछ विवादित टिप्पणियां की थीं, जिससे दोनों दलों के बीच मतभेद बढ़ गए थे।बाद में जब बीजेपी ने AIADMK के साथ चुनावी गठबंधन किया, तब माना गया कि अन्नामलाई को पार्टी के भीतर हाशिए पर डाल दिया गया।
क्या तमिलनाडु में बनेगा नया राजनीतिक विकल्प?
फिलहाल अन्नामलाई ने नई पार्टी बनाने की खबरों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन लगातार सामने आ रहे राजनीतिक संकेतों, समर्थकों की गतिविधियों और पार्टी नेतृत्व से मतभेदों ने तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों की संभावनाओं को जन्म दे दिया है।
अब सबकी निगाहें अन्नामलाई की अगली राजनीतिक चाल और दिल्ली में होने वाली उनकी बैठक पर टिकी हैं, जो तमिलनाडु की राजनीति की दिशा बदल सकती है।

