
ट्रैफिक जाम को लेकर मंत्री पर भड़कना पड़ा भारी, महिला पर 3 दिन बाद FIR दर्ज
शिकायतकर्ता का कहना है कि महिला ने अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था भंग हुई। इसके साथ ही, उस पर ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों और लोक सेवकों के कार्य में बाधा डालने का भी आरोप लगाया गया है।
मुंबई के वर्ली इलाके में इस सप्ताह की शुरुआत में हुई एक हाई-वोल्टेज घटना अब कानूनी मोड़ ले चुकी है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए उस वीडियो में मंत्री गिरीश महाजन को बीच सड़क पर टोकने वाली महिला के खिलाफ मुंबई पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत अधिवक्ता गुणरत्न सदावर्ते की बेटी, जेन सदावर्ते द्वारा वर्ली पुलिस स्टेशन में दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 की है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के संविधान संशोधन विधेयक की हार के विरोध में वर्ली में एक रैली आयोजित की थी। इस रैली के कारण इलाके में भारी ट्रैफिक जाम लग गया था, जिससे आम जनता और यात्री काफी परेशान थे।
उसी समय एक महिला अपनी कार से उतरी और सीधे मंत्री गिरीश महाजन के पास पहुँच गई। महिला बेहद गुस्से में थी और उसने चिल्लाते हुए मंत्री से पूछा कि उन्होंने व्यस्त सड़क पर प्रदर्शन क्यों रखा है, जबकि पास में ही एक खुला मैदान मौजूद है। वीडियो में महिला को यह कहते सुना जा सकता है, "यहाँ से बाहर निकलो, तुम लोग ट्रैफिक जाम कर रहे हो।" महिला का कहना था कि वह अपने बच्चे को स्कूल से लेने जा रही है और एक घंटे से जाम में फंसी है।
शिकायत में क्या कहा गया है?
बुधवार, 22 अप्रैल को दर्ज कराई गई अपनी शिकायत में जेन सदावर्ते ने आरोप लगाया कि महिला ने रैली के दौरान भारी अशांति फैलाई। शिकायतकर्ता का कहना है कि महिला ने अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था भंग हुई। इसके साथ ही, उस पर ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों और लोक सेवकों के कार्य में बाधा डालने का भी आरोप लगाया गया है।
जेन सदावर्ते ने अपनी शिकायत में तर्क दिया कि इस तरह का व्यवहार "कड़ी मेहनत करने वाले पुलिस अधिकारियों, जन प्रतिनिधियों और संवैधानिक तंत्र का अपमान" है। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है, जिसमें लोक सेवक को बाधा पहुँचाना, जानबूझकर अपमान करना और सार्वजनिक शरारत की संभावना वाले कार्य शामिल हैं।
सोशल मीडिया पर बंटी राय
इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया दो गुटों में बंट गया है। विपक्षी नेताओं और आम नागरिकों का एक बड़ा वर्ग महिला का समर्थन कर रहा है। उनका कहना है कि वीआईपी कल्चर और राजनीतिक रैलियों के कारण आम जनता का घंटों समय बर्बाद होता है और महिला का गुस्सा पूरी तरह जायज था। वहीं, दूसरे पक्ष का मानना है कि अपनी बात कहने का एक तरीका होता है और मंत्री या पुलिस के साथ अभद्र व्यवहार करना गलत है।
मंत्री गिरीश महाजन की प्रतिक्रिया
रोचक बात यह है कि खुद मंत्री गिरीश महाजन ने पहले इस मामले को शांत करने की कोशिश की थी। उन्होंने महिला के गुस्से को "कुछ हद तक जायज" बताते हुए कहा था कि ट्रैफिक के कारण लोग परेशान थे। हालांकि, उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि प्रदर्शन के दौरान किसी ने बोतल फेंकी थी। महाजन ने उस वक्त महिला के खिलाफ कोई भी शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया था, लेकिन अब जेन सदावर्ते की शिकायत ने मामले को फिर से गरमा दिया है।
आयोजकों पर भी गिरी गाज
यह विवाद केवल महिला तक सीमित नहीं है। इससे पहले मुंबई पुलिस ने रैली के आयोजकों के खिलाफ भी नियमों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया था। सवाल यह उठाए जा रहे हैं कि क्या इतनी व्यस्त सड़क पर प्रदर्शन की अनुमति ली गई थी और क्या राजनीतिक रैलियों के लिए जनता की सुविधा की बलि चढ़ाना सही है?
वर्ली की यह घटना भारत में 'राजनीतिक रैलियों बनाम जन सुविधा' की एक पुरानी बहस को नया आयाम दे रही है। एक तरफ सत्ता की हनक है, तो दूसरी तरफ एक टैक्सपेयर नागरिक का सवाल। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस शिकायत पर क्या रुख अपनाती है और क्या मंत्री जी को टोकना वाकई एक अपराध साबित होगा?

