
योगी आदित्यनाथ का 'गेस्ट हाउस कांड' वाला वार, क्या फंस गए अखिलेश यादव?
यूपी में 2027 की चुनावी बिसात बिछ गई है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने गेस्ट हाउस कांड और महिला आरक्षण के बहाने सपा को महिला विरोधी करार दिया।
यूपी में वैसे तो विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। लेकिन समाजवादी पार्टी और बीजेपी एक दूसरे पर निशाना साधने का मौका नहीं छोड़ रहे। सवाल 202 सीटों का है, यह वो नंबर है जो किसी भी दल के लिए सरकार बनाने और सत्ता में बने रहने के लिए जरूरी है। यूपी की सियासत में मुद्दों की कमी नहीं है। लेकिन संसद में जिस तरह से महिला आरक्षण संशोधन बिल के मुद्दे पर विपक्ष एकजुट हुआ और केंद्र सरकार की हार हुई उसके बाद बीजेपी को मुद्दा नजर आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण को बड़ा मुद्दा बनाते हुए 2027 विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति तेज कर दी है। पार्टी सड़क से लेकर सदन तक समाजवादी पार्टी (सपा) को ‘महिला विरोधी’ साबित करने में जुटी है।
यूपी विधानसभा में महिला शक्ति पर बहस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने गंगा एक्सप्रेस-वे के बहाने विकास और महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ Yogi Adityanath ने विधानसभा में महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान सपा को घेरने की कोशिश की। विशेष सत्र के जरिए बीजेपी ने साफ संकेत दिया कि उसका फोकस महिला वोटर्स को साधने पर है।योगी आदित्यनाथ ने सपा को “जन्मजात महिला विरोधी” बताते हुए उसके शासनकाल में महिलाओं के खिलाफ अपराधों का मुद्दा उठाया। उन्होंने 1995 के चर्चित स्टेट गेस्ट हाउस कांड (State Guest House incident) का जिक्र कर सपा पर दलित और महिला विरोधी होने का आरोप लगाया। इसके साथ ही पूजा पाल हत्याकांड और अन्य घटनाओं का हवाला देकर कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
शाहबानो, तीन तलाक का जिक्र
सीएम योगी ने कांग्रेस को भी निशाने पर लेते हुए शाह बानो (Shah Bano case) और तीन तलाक जैसे मुद्दों का जिक्र किया, और दोनों दलों को महिला हितों के खिलाफ बताया। दूसरी ओर, सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) भी महिला और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण पर काम कर रहे हैं। उन्होंने सत्ता में आने पर महिलाओं को सालाना आर्थिक मदद देने का वादा किया है।यूपी की सियासत पर नजर रखने वाली सुनीत एरोन कहती हैं ''भले ही यूपी विधानसभा चुनाव में वक्त है। अब आप इस तरह के बयान सुनेंगे। 2027 की लड़ाई सपा, बीजेपी के लिए बेहद अहम है। बीजेपी के पास हैट्रिक लगाने का मौका है तो समाजवादी पार्टी के सामने चुनौती है कि किसी भी तरह से देश के सबसे बड़े सूबे में से एक यूपी में साइकिल बिना किसी बाधा सरपट दौड़ सके।''
सुनीता एरोन के मुताबिक समाजवादी पार्टी के नेता जब कभी महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाते हैं तो बीजेपी की तरफ से मायावती का प्रकरण उछाला जाता है। जब यूपी की विधानसभा में महिला आरक्षण संशोधन पर चर्चा हो रही है तो बीजेपी की तरफ से यह बताने की कोशिश की जा रही है कि अखिलेश यादव को ना ही महिलाओं की सुरक्षा से लेना देना है और ना ही दलित समाज की चिंता है। इसके जरिए बीजेपी यह बता रही है कि महिला आरक्षण संशोधन बिल का समर्थन ना करना सपा की मजबूरी नहीं है बल्कि माइंडसेट है और महिला विरोधी माइंडसेट वालों से आप उम्मीद क्या कर सकते हैं। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल के मुद्दे पर सपा का विरोध उसी माइंड सेट का नतीजा है।

