
योगी का बड़ा निर्णय: मंत्रियों का काफिला आधा, लागू होगा वर्क फ्रॉम होम
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और ईंधन की खपत कम करने के लिए यूपी सरकार ने सभी सरकारी बैठकों, सेमिनारों, कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप को वर्चुअल माध्यम से करने का आदेश दिया।
दुनिया भर में गहराते ऊर्जा संकट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मंगलवार को सात अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इन फैसलों के तहत राज्य में मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों, विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों के काफिले में अब 50 प्रतिशत तक की कमी की जाएगी। इसके अतिरिक्त, एक मिसाल पेश करने के लिए सभी जन प्रतिनिधियों और अफसरों को सप्ताह में कम से कम एक दिन बस, मेट्रो या अन्य सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह स्पष्ट किया है कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सरकारी तंत्र को स्वयं से बचत की शुरुआत करनी होगी।
सरकारी बैठकों और कार्यसंस्कृति में व्यापक बदलाव
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और ईंधन की खपत कम करने के लिए राज्य सरकार ने अब सभी सरकारी बैठकों, सेमिनारों, कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप को वर्चुअल माध्यम से आयोजित करने का आदेश दिया है। राज्य सचिवालय के स्तर पर भी कम से कम 50 प्रतिशत बैठकें अब ऑनलाइन की जाएंगी। निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिन कंपनियों में बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्यरत हैं, उन्हें सप्ताह में दो दिन 'वर्क फ्रॉम होम' देने के लिए राज्य स्तर पर एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की जाए। लखनऊ में उच्चस्तरीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय की उथल-पुथल को देखते हुए सावधानी बरतना अनिवार्य है।
जनता से सहयोग और आर्थिक अनुशासन की अपील
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से भी इस अभियान में शामिल होने के लिए दस विशेष अपील की हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि वे पेट्रोल, डीजल और बिजली की बचत के लिए सप्ताह में एक दिन 'नो व्हीकल डे' मनाएं। साथ ही, अनावश्यक सजावटी लाइटों का उपयोग कम करने और देश की विदेशी मुद्रा बचाने के उद्देश्य से बेवजह सोना न खरीदने की सलाह दी गई है। मुख्यमंत्री का मानना है कि प्रधानमंत्री के आह्वान पर सरकारी कर्मचारियों और शिक्षण संस्थानों के छात्रों सहित समाज के हर वर्ग को इस बचत अभियान का हिस्सा बनाना समय की मांग है।
वैश्विक संकट और प्रधानमंत्री मोदी का आह्वान
उत्तर प्रदेश सरकार के ये निर्णय ईरान-इजराइल युद्ध के कारण उत्पन्न हुए ऊर्जा संकट और आर्थिक चुनौतियों की पृष्ठभूमि में लिए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में सार्वजनिक मंचों से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के सीमित उपयोग पर जोर दिया था। उन्होंने विशेष रूप से यह संकल्प लेने को कहा था कि अगले एक साल तक लोग सोने की खरीदारी और अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचें ताकि देश पर पड़ रहे आर्थिक दबाव को कम किया जा सके। प्रधानमंत्री ने कारपूलिंग, मेट्रो के उपयोग और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने जैसे उपायों को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में राष्ट्रहित के लिए आवश्यक बताया है।
विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया और राजनीतिक आरोप
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री की इन अपीलों पर विपक्षी दलों ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे सरकार की विफलता का प्रमाण बताते हुए कहा कि जनता से त्याग की मांग करना शासन की असमर्थता को दर्शाता है। वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव समाप्त होते ही सरकार को अचानक संकट की याद आ गई है और वे अर्थव्यवस्था संभालने में विफल रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि चुनाव के दौरान जनता को राहत देने का नाटक किया गया और अब उन पर पाबंदियां थोपी जा रही हैं। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि सरकार को केवल अपील करने के बजाय आम जनता को सीधे ठोस राहत देनी चाहिए।

