
AI का उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनने पर है भारत का फोकस- IIT प्रोफेसर रामकृष्णन
India AI Impact Summit 2026 के बीच भारत अब केवल AI तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि उसे खुद विकसित और नियंत्रित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
भारत जब नई दिल्ली में हो रहे India AI Impact Summit 2026 में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, तब ध्यान केवल AI को अपनाने से आगे बढ़कर उसे खुद बनाने (उत्पादन) पर जा रहा है। The Federal ने IIT बॉम्बे के प्रोफेसर गणेश रामकृष्णन से बात की, जो BharatGen का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत अपने खुद के मजबूत AI मॉडल कैसे बना रहा है, दुनिया के स्तर पर अपनी तुलना कैसे कर रहा है और भविष्य में बड़े (ट्रिलियन-पैरामीटर) मॉडल के लिए कैसे तैयारी कर रहा है। उनका कहना है कि हमें बड़े भाषा मॉडल (LLM) को ब्लैक बॉक्स नहीं बल्कि 'ग्लास बॉक्स' की तरह देखना चाहिए, यानी सिस्टम पारदर्शी होना चाहिए। वे भारतीय भाषाओं, भारतीय डेटा और देश की क्षमता पर आधारित स्वदेशी AI बनाने पर जोर दे रहे हैं।
BharatGen का मुख्य उद्देश्य क्या है?
BharatGen का लक्ष्य देश में ऐसा मजबूत माहौल बनाना है, जहां जेनरेटिव AI और बड़े भाषा मॉडल को पारदर्शी तरीके से विकसित किया जाए। इसके लिए शिक्षा, इंजीनियरिंग और रिसर्च के स्तर पर मजबूत तैयारी जरूरी है। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने 17-मिलियन पैरामीटर वाला “Param 2” नाम का मॉडल 22 भारतीय भाषाओं में जारी किया, जिसमें तमिल भी शामिल है। टेक्स्ट और स्पीच (आवाज) वाले मॉडलों में भारतीय भाषाओं की समानता का उपयोग किया गया है। अलग-अलग राज्यों की भाषा बोलने के तरीके में फर्क हो सकता है, लेकिन ध्वनि (उच्चारण) में काफी समानता होती है। सिस्टम को पूरी तरह बहुभाषी और भारतीय संदर्भ के अनुसार बनाया जा रहा है।
उन्होंने स्पीच डेटा के लिए शुरुआत में पांच कंपनियों के साथ काम किया और अब पिन कोड स्तर तक डेटा इकट्ठा करने की व्यवस्था बना ली है। इसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि डेटा कहां से आया है और उसमें दोहराव न हो। यही 'डेटा की पारदर्शिता' देश की डिजिटल संप्रभुता (Sovereignty) का हिस्सा है। नौ शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर यह पूरा सिस्टम तैयार किया जा रहा है।
क्या BharatGen भारत के AI विकास की नींव बनेगा?
हां। BharatGen बुनियादी (Foundational) मॉडल और पूरे AI इकोसिस्टम पर काम कर रहा है। इसमें लगभग 60 फुल-टाइम इंजीनियर काम कर रहे हैं। यह IIT बॉम्बे से जुड़ी एक सेक्शन 8 कंपनी है और इसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा IndiaAI Mission से 1,235 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग मिली है। इसमें नौ शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं, जिनमें IIT मद्रास भी है। प्रधानमंत्री से 8 जनवरी को हुई मुलाकात में यह चर्चा हुई कि AI सिस्टम में भारतीय सोच और पारदर्शिता कैसे लाई जाए। यही एक मजबूत और स्वदेशी AI इकोसिस्टम की बुनियाद है।
इससे भारतीय कंपनियों और सेवाओं को क्या फायदा होगा?
उदाहरण के तौर पर, अमृता हॉस्पिटल्स के साथ मिलकर “MedSum” नाम की तकनीक विकसित की जा रही है, जो डॉक्टर की आवाज को टेक्स्ट में बदलकर उसका सार (summary) तैयार करती है। इसमें मरीज की गोपनीयता और सहमति को प्राथमिकता दी जाती है। इसी तरह राज्य सरकारों, बैंकों और मंत्रालयों के साथ भी काम हो रहा है। इससे सरकारी सेवाएं आसान और बातचीत के माध्यम से उपयोग करने योग्य बन सकती हैं। नागरिक अपनी शिकायतें और जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।
दुनिया की तुलना में भारत कहां खड़ा है?
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय लोग AI से डरते नहीं हैं, और यह हमारी ताकत है। जैसे UPI ने डिजिटल भुगतान में बदलाव लाया, वैसे ही AI में भी भारत आगे बढ़ सकता है। लेकिन इसके लिए हमें सिर्फ उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि तकनीक बनाने वाला देश बनना होगा। BharatGen के मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलना में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि मौजूदा वैश्विक मानक भारतीय भाषाओं को ठीक से नहीं दर्शाते, इसलिए भारत अपने खुद के मानक भी तैयार कर रहा है। लक्ष्य है भविष्य में एक ट्रिलियन-पैरामीटर मॉडल तक पहुंचना।
डेटा सेंटर और चिप निर्माण की स्थिति
देश में सेमीकंडक्टर और सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है। कई बड़ी कंपनियां और सरकारी मिशन इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। BharatGen का कहना है कि बड़े मॉडल बनाते समय जो तकनीकी अनुभव और डेटा मिलता है, वह हार्डवेयर सुधारने में भी मदद करेगा। कुल मिलाकर, BharatGen का उद्देश्य है- भारत के लिए, भारत में, भारतीय भाषाओं और डेटा के आधार पर एक मजबूत और आत्मनिर्भर AI सिस्टम तैयार करना।

