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महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक और हिंदू सुरक्षा, बागेश्वर बाबा और देवकीनंदन के बदले सुर

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने बद्रीनाथ में कथा के दौरान कुछ ऐसा बोल दिया जिसने सभी को हैरान कर दिया है. धीरेंद्र शास्त्री ने महंगाई, बेरोजगारी और नेताओं की दी जाने वाली सुविधाओं पर ही सवाल खड़े कर दिए.


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क्या संत कथावाचक मोदी सरकार से नाराज है? क्यों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी की विचारों का समर्थन करने वाले संत कथावाचक मोदी सरकार की नीतियों पर उठा रहे सवाल? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पिछले दिनों बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के कुछ ऐसे बयान दे दिए जिससे कयासों का बाजार गर्म है. इसके अलावा हम बात करेंगे पंजाब और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के फाइनल से पहले निकाय चुनाव में कांग्रेस की शर्मनाक हार की.


बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने बद्रीनाथ में कथा के दौरान कुछ ऐसा बोल दिया जिसने सभी को हैरान कर दिया है. धीरेंद्र शास्त्री ने महंगाई, बेरोजगारी और नेताओं की दी जाने वाली सुविधाओं पर ही सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने कहा कि अगर आम लोगों से पेट्रोल-डीजल कम जलाने की अपील की जा रही है तो नेताओं के चार्टर्ड विमानों पर भी रोक लगनी चाहिए. उन्होंने सांसदों, विधायकों और मंत्रियों की तनख्वाह काटने की बात भी कह दी. आपको ध्यान होगा पीएम मोदी ने 4 राज्यों और 1 केंद्रशाषित प्रदेश के चुनाव नतीजे आने के बाद नागरिकों से पेट्रोल डीजल की खपत घटाने, विदेश यात्रा नहीं करने सोना नहीं खरीदने की अपील कर डाली. इसके बाद पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बेरोजगारी महंगाई और नेताओं के फिजूलखर्ची का मुद्दा उठाकर सरकार के बैकफुट पर धकेल दिया है. इतना ही उन्होंने नीट पेपरलीक और डॉलर के आगे चित्त हो रहे रुपये का मुद्दा भी उठा दिया जिसे खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण स्वीकार नहीं करती हैं.

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ही नहीं बल्कि कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने भी कानून-व्यवस्था और हिंदुओं की सुरक्षा की बात करते हुए कुछ ऐसा कह दिया जिसने लोगों को हैरान कर दिया कि आखिरकार इन बाबाओं को हो क्या है. देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि, चुनाव के दौरान "बंटेंगे तो कटेंगे" की बातें होती हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद सरकारें इन मुद्दों को भूल जाती हैं. देवकीनंदन ठाकुर यहीं नहीं रूके उन्होंने कहा, वर्तमान में कुछ आश्चर्यजनक घटनाएं देखने को मिल रही हैं. अब तक हिंदू कहते थे कि गाय को राष्ट्रमाता घोषित करो. अब मुसलमान भाई कह रहे हैं कि गाय को राष्ट्रमाता घोषित करो. इसके लिए वो आंदोलन भी कर रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया फिर ऐसा करने से कौन रोक रहा है? उन्होंने कहा, हमको तो लगता है शायद यही कलयुग है. धीरेंद्र शास्त्री और देवकीनंदन ठाकुर दोनों लंबे समय से हिंदुत्व, सनातन और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं. उनके समर्थकों का बड़ा हिस्सा वही सामाजिक और राजनीतिक आधार है जो बीजेपी का भी प्रमुख वोट बैंक माना जाता है. ऐसे में ये क्या बीजेपी के लिए चेतावनी का संकेत है?

हालांकि यह भी सच है कि जब किसी सरकार के समर्थक माने जाने वाले धार्मिक और सामाजिक प्रभाव वाले चेहरे सार्वजनिक मंच से सवाल उठाने लगते हैं तो उसे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. बीजेपी की राजनीति लंबे समय से हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ मजबूत नेतृत्व की छवि पर आधारित रही है। लेकिन अब यदि उन्हीं मुद्दों से जुड़े प्रभावशाली संत महंगाई, बेरोजगारी और सुरक्षा जैसे सवाल उठा रहे हैं तो यह सरकार के लिए एक संकेत माना जा सकता है कि उसके कोर समर्थक वर्ग के भीतर भी कुछ बेचैनी मौजूद है. 2027 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और 2029 का लोकसभा चुनाव भी बहुत दूर नहीं है. ऐसे समय में संत समाज के इन बड़े चेहरों के बयानों को हलके में नहीं लिया जा सकता है. खासकर तब, जब वे सीधे विपक्षी राजनीति नहीं कर रहे हों, बल्कि सरकार से अपेक्षाओं की याद दिला रहे हों.

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