शंकराचार्य केस में आया भूचाल, यूपी में बिजली पर 'पावर वॉर' और RJD में 'लठैत' बयान पर छिड़ी जंग

12 Jun 2026 11:38 AM IST  ( Updated:2026-06-12 06:54:54  )

शंकराचार्य केस में शिकायतकर्ता के यू-टर्न, यूपी में बिजली बिल पर मंत्री-चेयरमैन के टकराव और बिहार RJD में 'लठैत' विवाद की पूरी इनसाइड स्टोरी।

देश के राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक और अदालतों से लेकर धार्मिक पीठों तक, ऐसे फैसले और बयान सामने आ रहे हैं जिन्होंने सियासत का पारा गरमा दिया है। कहीं सालों पुराने गंभीर मुकदमों में अचानक सबसे बड़ा यू-टर्न आ रहा है, तो कहीं सरकार के भीतर ही मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है। आइए विस्तार से जानते हैं इस वक्त की तीन सबसे बड़ी और सनसनीखेज ख़बरों का पूरा इनसाइड ट्रैक।

शंकराचार्य केस में सबसे बड़ा यू-टर्न: शिकायतकर्ता का सनसनीखेज दावा- 'दबाव में लिखवाई थी फर्जी FIR'

ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ चल रहा कथित यौन शोषण का मामला अब एक बेहद चौंकाने वाले और ऐतिहासिक मोड़ पर आ गया है। इस पूरे मामले की बुनियाद जिस मुख्य शिकायतकर्ता के आरोपों पर टिकी थी, उसने अब खुद सामने आकर पूरी कहानी को ही पलट दिया है। आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, जिनकी तहरीर पर पॉक्सो (POCSO) कोर्ट के आदेश के बाद एफआईआर (FIR) दर्ज हुई थी, उन्होंने अब अपने सभी आरोपों से पूरी तरह पैर पीछे खींच लिए हैं।

1.सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर खोला मोर्चा: आशुतोष ब्रह्मचारी ने सोशल मीडिया (फेसबुक) पर एक वीडियो जारी कर यह कहकर सनसनी फैला दी है कि उन पर भारी दबाव बनाया गया था। उन्होंने साफ कहा कि शंकराचार्य के खिलाफ जो मुकदमा दर्ज कराया गया, वह पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत था।

2.साजिश के पीछे बड़े नाम: शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी रामचंद्र दास ने उन्हें गुमराह किया और इस पूरी स्क्रिप्ट को लिखने में शासन-प्रशासन के कुछ बड़े अधिकारियों ने भी मुख्य भूमिका निभाई। आशुतोष ब्रह्मचारी का दावा है कि उनके पास इस कथित साजिश से जुड़े पुख्ता सबूत और व्हाट्सएप चैट मौजूद हैं, जिन्हें वह सही समय पर सामने लाएंगे।

सियासी और कानूनी मायने: यह मामला साधारण नहीं है। यह कानूनी लड़ाई हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का सफर तय कर चुकी है। ऐसे में अब जब खुद मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता ही मुकर गया है, तो पूरी कानूनी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान लग गया है। सवाल यह है कि क्या वाकई किसी बड़े धार्मिक या राजनीतिक षड्यंत्र के तहत देश के इतने प्रतिष्ठित संत की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया? या फिर अब किसी नए और अदृश्य दबाव में आकर यह बयान बदला जा रहा है? सच जो भी हो, लेकिन इस यू-टर्न ने विरोधियों के होश उड़ा दिए हैं।

यूपी में बिजली बिलों पर 'पावर वॉर': ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने अपनी ही सरकार के UPPCL चेयरमैन को घेरा

उत्तर प्रदेश की जनता इस समय भीषण गर्मी, बिजली कटौती और लगातार बढ़ते बिजली के दामों से त्रस्त है। लेकिन जनता को राहत देने के बजाय, अब इस संवेदनशील मुद्दे पर यूपी सरकार के भीतर ही प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों के बीच का टकराव खुलकर सड़क पर आ गया है। ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा और उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन आशीष गोयल के बीच की यह 'जंग' अब पूरी सरकार के लिए सिरदर्द बन चुकी है।

1.बिना मंजूरी लगा दिया 10% सरचार्ज: ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने UPPCL चेयरमैन को एक बेहद कड़ा और तल्ख पत्र लिखा है। मंत्री का सीधा आरोप है कि जून 2026 के बिजली बिलों में उपभोक्ताओं पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज (फ्यूल एंड पावर पर्चेज एडजस्टमेंट) जोड़ने जैसा इतना बड़ा और नीतिगत फैसला उनकी जानकारी और मंजूरी के बिना ही ले लिया गया।

2."मुझे खबरें मीडिया से मिल रही हैं": मंत्री ने पत्र में अपनी गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि विभाग के इतने बड़े फैसलों की जानकारी उन्हें फाइल के बजाय मीडिया के जरिए मिल रही है, जो कि पूरी तरह से प्रशासनिक मर्यादा के खिलाफ है। इसके अलावा मंत्री ने चेयरमैन की कार्यशैली, मुख्यालय से उनकी लगातार अनुपस्थिति और अनुभवी अधिकारियों को हटाकर कम अनुभवी लोगों को मलाईदार कुर्सियां सौंपने जैसे गंभीर मुद्दे भी उठाए हैं।

यह अभूतपूर्व टकराव साफ दर्शाता है कि यूपी के ऊर्जा विभाग में आंतरिक संवाद (Communication) पूरी तरह ठप हो चुका है। जब विभाग के मुखिया (मंत्री) और नीति लागू करने वाले अधिकारी (चेयरमैन) ही एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हों, तो राज्य की बिजली व्यवस्था का बेपटरी होना लाजमी है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री इस 'पावर वॉर' को शांत करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

बिहार चुनाव से पहले RJD में 'लठैत' विवाद: रोहिणी आचार्या और अपनी ही पार्टी के विधायक आमने-सामने

बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की गूंज अभी से सुनाई देने लगी है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) जहाँ एक तरफ नीतीश-भाजपा गठबंधन को घेरने की रणनीति बना रही थी, वहीं दूसरी तरफ वह अपने ही नेताओं के बयानों के आत्मघाती जाल में उलझ गई है। पार्टी के मुख्य सचेतक और वरिष्ठ विधायक कुमार सर्वजीत के एक एकलौते बयान ने पूरी पार्टी की साख को दांव पर लगा दिया है।

1.क्या था वो 'विवादित' बयान? कुमार सर्वजीत ने एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान आरजेडी के पुराने दौर का जिक्र करते हुए उसे 'लठैत पार्टी' कह डाला। हालांकि, उनका इरादा तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव की तारीफ करना था। उन्होंने कहा कि संजय यादव ने इस लठैत पार्टी को आज 'हाईटेक' और आधुनिक बना दिया है।

2.घर के भीतर ही छिड़ गई जंग: भले ही विधायक जी तारीफ कर रहे थे, लेकिन 'लठैत' शब्द विरोधियों के लिए एक बड़ा हथियार बन गया। विपक्ष ने तुरंत आरजेडी के 'जंगलराज' और पुरानी छवि पर हमले तेज कर दिए। बात यहीं नहीं रुकी; लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्या इस बयान पर बुरी तरह भड़क गईं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कुमार सर्वजीत को आड़े हाथों लेते हुए लिखा कि यह "जिस थाली में खाना, उसी में छेद करना" है। रोहिणी ने परोक्ष रूप से संजय यादव को भी पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी के लिए जिम्मेदार ठहराया।

तेजस्वी यादव पिछले कई सालों से आरजेडी को 'माई' (MY - मुस्लिम यादव) समीकरण से निकालकर 'बाप' (BAAP) यानी सर्वसमाज की पार्टी बनाने का दावा कर रहे हैं। वह खुद को विकास और रोजगार के चेहरे के रूप में पेश करते हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले अपनी ही पार्टी के मुख्य सचेतक द्वारा पार्टी को 'लठैत' कहना और उस पर लालू परिवार की बेटी का यूं पलटवार करना यह साबित करता है कि आरजेडी के भीतर नेतृत्व, वर्चस्व और भविष्य की रणनीति को लेकर एक बहुत बड़ी आंतरिक खींचतान चल रही है।