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द फेडरल देश के विशेष बुलेटिन में जानिए दिन भर की अहम खबरों के बारे में
द फेडरल देश के विशेष बुलेटिन में बात करेंगे - BRICS समिट के लिए दिल्ली में जुट रहे दिग्गजों की और पुतिन-मोदी की दि्वपक्षीय बैठक की, BRICS पर कांग्रेस में मचे घमासान की जिसमें चिदंबरम-थरूर आमने-सामने आ गए, यूपी में नीले रंग पर जारी सियासत की जिसमें मायावती ने कहा कि सपा-कांग्रेस दिल से अंबेडकरवादी नहीं, बात करेंगे कानपुर के दवा कारोबारी हत्या मामले की जांच में नए पहलू की जिसमें बहू की डांस पार्टी में मौजूद 33 कपल से पूछताछ करेगी पुलिस , सहारनपुर मस्जिद केस की जिसमें हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से जवाब मांगा और जुर्माने की वसूली पर रोक लगाई, राघव चड्ढा की जिन्होंने AAP पर ‘एक्स गर्लफ्रेंड’ वाला तंज कसते हुए कहा कि दिलजले आशिक कहीं नस ही न काट लें, पश्चिम बंगाल में नॉन वेज पर राजनीति की और CM शुभेंदु अधिकारी द्वारा कालीघाट मंदिर में पूजा करने व मछली खाने की।
दिल्ली में BRICS समिट को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज है और दुनिया की नजरें इस वक्त भारत पर टिकी हैं। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत कर रहा है और आज से राजधानी में बड़े नेताओं की अहम मुलाकातों का दौर शुरू हो गया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली पहुंच चुके हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक हुई। इस बातचीत में दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दे अहम पर चर्चा की। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत पहुंचने पहुंच रहे हैं। शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत आ रहे हैं। उनकी पिछली भारत यात्रा अक्टूबर 2019 में हुई थी, जब वे महाबलीपुरम में पीएम मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर बैठक में शामिल हुए थे।
BRICS अब 11 सदस्य देशों का समूह है और इसके सदस्य देश दुनिया की करीब आधी आबादी और लगभग 40 फीसदी वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस बार भारत की कोशिश आर्थिक सहयोग, सप्लाई चेन, स्टार्टअप और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने की है। BRICS के सामने वैश्विक व्यापार, बदलती सप्लाई चेन और पश्चिम एशिया के संकट जैसी बड़ी चुनौतियां भी हैं। दिल्ली का ये BRICS सम्मेलन सिर्फ नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति में भारत की कूटनीतिक भूमिका और BRICS के भविष्य की दिशा तय करने वाला अहम मंच भी है।
ब्रिक्स को लेकर कांग्रेस में रार
BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर कांग्रेस के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आई है। दो कांग्रेसी दिग्गज इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने सवाल उठाया कि पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से भारत को कोई ठोस या प्रत्यक्ष फायदा मिला है या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि इस बार कितने राष्ट्राध्यक्ष या प्रधानमंत्री सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। इसके जवाब में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने BRICS के महत्व और भारत में सम्मेलन की मेजबानी के फायदे गिनाए। थरूर के मुताबिक BRICS ग्लोबल साउथ के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। दुनिया में ग्लोबल साउथ के 100 से अधिक देश हैं, लेकिन BRICS में शामिल 11 प्रमुख देश अलग-अलग क्षेत्रों और विचारों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके मुताबिक मौजूदा समय में भारत की अध्यक्षता इस मंच को और महत्वपूर्ण बनाती है। थरूर ने कहा कि BRICS के 11 सदस्य देश मिलकर दुनिया की GDP के करीब 41 फीसदी हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इस सम्मेलन का अंतरराष्ट्रीय महत्व काफी बड़ा है।
हालांकि थरूर ने BRICS के सामने मौजूद चुनौतियों को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि सभी सदस्य देशों के हित और विचार एक जैसे नहीं हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर आम सहमति बनाना और साझा घोषणा जारी करना मुश्किल हो सकता है। इस बीच बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी चिदंबरम पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने कहा है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से हमें क्या हासिल होगा? उनका बयान न केवल उनकी सोच पर सवाल खड़े करता है, बल्कि ऐसा लगता है कि वह भारत आने वाले राष्ट्राध्यक्षों की समझ से ऊपर अपनी समझ को रख रहे हैं।
यूपी में नीले रंग पर सियासत
वहीं बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तंज़ करते हुए कहा है कि नीला रंग अपनाने से विपक्षी दलों की जातिवादी सोच नहीं बदलेगी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के लोग नीला रंग अपनाना चाहते हैं। वो अपने गमछे और स्टेज का रंग नीला करना चाहते हैं। लेकिन सिर्फ़ ऐसा करने से गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े और दूसरे उपेक्षित वर्ग के लोगों के प्रति उनकी जातिवादी और संकीर्ण मानसिकता नहीं बदल सकती। मायावती ने कहा समाजवादी और कांग्रेस के लोग सामंती और पूंजीवादी मानसिकता के हैं। ये लोग दिल से आंबेडकरवादी नहीं हैं।
उन्होंने लिखा, "वैसे भी ये लोग इन वर्गों के मामले में आए दिन गिरगिट की तरह ही रंग बदलते रहते हैं.अर्थात् ये कहते कुछ हैं और करते उसके ठीक विपरीत हैं। ख़ासकर सपा के पीडीए के मामले में सोच हमेशा दोग़ली और बेईमान रही है।''
मायावती ने ये टिप्पणी समाजवादी पार्टी के उस कदम के बाद की है, जिसके तहत उसने अपने छात्र संगठन समाजवादी छात्र सभा के लिए एक नया ड्रेस कोड तय किया है, जिसमें नीला रंग प्रमुखता से इस्तेमाल किया जाएगा।
नीले रंग का ख़ास राजनीतिक महत्व माना जाता है। यह लंबे समय से दलित राजनीति और डॉ. बी.आर. आंबेडकर की विचारधारा से जुड़ा रहा है।
सहारनपुर मस्जिद मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में मस्जिद ढहाने को लेकर दाखिल याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मस्जिद को हटाए जाने के खिलाफ दायर एक रिट याचिका पर राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का शुक्रवार को निर्देश दिया। यह मस्जिद सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित थी।
जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने इस मामले में अगली तारीख 12 अक्टूबर तय की और तब तक के लिए 6.41 करोड़ रुपये जुर्माने की वसूली पर रोक लगा दी। Advocate मोहम्मद तनवीर अहमद की ओर से दायर इस याचिका में सहारनपुर के नगर मजिस्ट्रेट के 16 जुलाई, 2026 को जारी आदेश और सहारनपुर के जिला न्यायाधीश द्वारा दो सितंबर, 2026 को जारी ऑर्डर को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दोनों अधिकारियों द्वारा पारित आदेश उनके न्याय एवं अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।
बता दें सहारनपुर के City Magistrateने 16 जुलाई, 2026 को परिसर खाली करने और 6.41 करोड़ रुपये जुर्माना भरने का आदेश पारित किया था। City Magistrate के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की गई थी जिसे District Judge ने दो सितंबर, 2026 को खारिज कर दिया।
District Judge के आदेश के बाद अधिकारियों ने पांच सितंबर को सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में 315 वर्ग मीटर में बनी मस्जिद को गिरा दिया था।
मस्जिद का ढहाए जाना एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था। कांग्रेस, सपा और बसपा ने मस्जिद ढहाए जाने की आलोचना की थी।
कानपुर दवा कारोबारी हत्या की जांच में नया पहलू
वहीं उत्तर प्रदेश के सनसनीखेज कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मनोचा हत्याकांड की जांच में नया पहलू जुड़ा है। पुलिस की जांच अब उस पार्टी तक पहुंच गई है, जहां हत्या वाली रात उनकी बहू शालू मौजूद थी। पुलिस को शक है कि इस पार्टी से जुड़े कई सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिले हैं। यही वजह है कि अब पार्टी में शामिल हर कपल से पूछताछ की तैयारी की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, कास्मोजिन लाउंज में हुई इस पार्टी में कुल 33 लोग शामिल थे। जांच टीम अब इन सभी से अलग-अलग जानकारी जुटाएगी। पुलिस यह जानना चाहती है कि पार्टी किस मौके पर रखी गई थी, इसे किसने आयोजित किया था और इसका खर्च किसने उठाया था। साथ ही पार्टी में कौन-कौन लोग मौजूद थे और उस दौरान क्या गतिविधियां हुईं, इसकी भी जानकारी ली जाएगी।
इस मामले में पुलिस शालू और दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। शालू पर आरोप है कि उसने अपने ससुर की हत्या के लिए छह लाख रुपये की सुपारी दी थी। हालांकि पुलिस की जांच अभी जारी है और हत्या की साजिश से जुड़े कई पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच के दौरान शालू की पारिवारिक जिंदगी को लेकर भी कई बातें सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक, विनीत मनोचा अपने बेटे सुब्रत और बहू शालू को हर महीने पैसे देते थे। लेकिन शालू को खर्च किए गए पैसे का पूरा हिसाब देना पड़ता था। घर के सामान से लेकर दूध और सब्जी तक के खर्च का बिल दिखाने के बाद ही उसे आगे के पैसे मिलते थे।
शालू ने पूछताछ में यह भी कहा कि घर में लगे कैमरों की वजह से उसे अपनी निजता खत्म होने का एहसास होता था। उसका कहना था कि कई बार कैमरों की रिकॉर्डिंग बंद करने पर भी उससे सवाल किए जाते थे। अब पुलिस पार्टी में मौजूद सभी लोगों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि हत्या की साजिश से पहले और बाद में घटनाक्रम क्या था। जांच एजेंसियों की नजर खास तौर पर पार्टी से जुड़े उन पहलुओं पर है, जो विनीत मनोचा हत्याकांड की अनसुलझी कड़ियों को जोड़ सकते हैं।
राघव चड्ढा बनाम आप
पंजाब में वोटर लिस्ट में नाम कटने और दिल्ली के वोटर लिस्ट में जुड़ने के बाद राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच सियासी तकरार बढ़ती ही जा रही है। वोटर लिस्ट में नाम जुड़ने को लेकर AAP के सवालों के जवाब में बीजेपी सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी की तुलना ‘एक्स गर्लफ्रेंड’ से कर दी। चड्ढा ने तंज कसते हुए कहा कि AAP अब भी दिन-रात उनका नाम लेती है। बता दें पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम गायब होने के बाद बीजेपी सांसद राघव चड्ढा ने नाराजगी जाहिर की थी। चड्ढा ने कहा थी कि पंजाब की आप सरकार ने राजनीतिक नफरत के कारण वोटर लिस्ट में उनका नाम Shifted category में डाल दिया। चड्ढा ने आरोप लगाया था कि उनके पार्टी छोड़ने के बाद से आप उन्हें लगातार निशाना बना रही हैं।
वहीं आप के प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने दावा किया कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक 26 अगस्त को राघव चड्ढा ने दिल्ली में वोट बनवाने के लिए फॉर्म 6 दाखिल किया। 2 सितंबर को उनका वोट अप्रूव होकर जुड़ गया। लेकिन 3 सितंबर को राघव चड्ढा छाती पीट-पीटकर कहने लगे कि पंजाब सरकार ने मेरा वोट कटवा दिया। ढांडा ने कहा, "26 अगस्त को दिल्ली में वोट के लिए आवेदन और 3 सितंबर को पंजाब सरकार पर आरोप। राघव चड्ढा और बीजेपी का बेशर्म चेहरा आज सबके सामने बेनकाब हो गया है।"
आप के इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग की सभी लागू गाइडलाइंस और तय प्रक्रिया का पालन किया है।
पश्चिम बंगाल में नॉन वेज पर राजनीति
पश्चिम बंगाल में इस वक्त सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि खाने की थाली भी सियासी बहस का हिस्सा बन गई है। मामला मछली और मांस को लेकर चल रही उस बहस का है, जो हाल में कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अपील के बाद तेज हुई थी।
इसी बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कालीघाट मंदिर पहुंचकर इस बहस का जवाब अपने अंदाज में दिया। कौशिकी अमावस्या के मौके पर उन्होंने मां काली की पूजा की और मंदिर में चढ़ाए गए भोग को प्रसाद के तौर पर ग्रहण किया। उनकी थाली में मछली का सिर, बासंती पुलाव और मिठाई थी। इससे पहले उन्होंने मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं को पेड़े का प्रसाद भी बांटा।
शुभेंदु अधिकारी ने इस पूरे मामले को किसी विवाद की तरह देखने के बजाय इसे बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा से जोड़कर दिखाया। उनका कहना था कि किसी संत की बात से सहमत होना या असहमत होना अलग बात है, लेकिन उस विचार के आधार पर विवाद खड़ा करना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वह अष्टमी पर सात्विक भोजन करते हैं, लेकिन इसके बावजूद काली पूजा की परंपरा में मिलने वाले बलि के प्रसाद को स्वीकार करते हैं। उनके मुताबिक कालीघाट में मछली और बासंती पुलाव का भोग ग्रहण करना बंगाल की परंपरा का हिस्सा है और इससे सनातन संस्कृति कमजोर नहीं होती।
दरअसल, विवाद की शुरुआत धीरेंद्र शास्त्री की उस अपील से हुई थी, जिसमें उन्होंने बंगाली हिंदुओं से दुर्गापूजा पंडालों में नॉनवेज भोजन से दूरी बनाने और शाकाहारी भोजन को बढ़ावा देने की बात कही थी। इसके बाद टीएमसी और कांग्रेस नेताओं की ओर से इसका विरोध किया गया।
बीजेपी के भीतर से भी बंगाल की खान-पान की परंपरा के समर्थन में आवाजें उठीं। प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि मछली-चावल और मीट करी बंगाली विरासत और जीवनशैली का हिस्सा हैं और लोग अपनी पसंद का खाना खाने के लिए स्वतंत्र हैं।

