दिल्ली में SIR के नाम पर खेल, गर्मियों में काट दिए 14 लाख वोट: AAP
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दिल्ली में SIR के नाम पर खेल, गर्मियों में काट दिए 14 लाख वोट: AAP

सौरभ भारद्वाज और संजीव झा का बड़ा आरोप: दिल्ली में बिहार-यूपी के प्रवासियों का वोट काटने की साजिश; 48 डिग्री में 100% फॉर्म बांटने का सरकारी डेटा पूरी तरह फर्जी।


AAP allegations On SIR: दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले राजधानी में मतदाताओं की सूची को लेकर एक नया और भीषण राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग मिलकर दिल्ली में 'एसआईआर' और 'प्री-एसआईआर' की आड़ में प्रवासियों, विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) के गरीब मजदूरों के वोट काटने का एक बड़ा और सुनियोजित षड्यंत्र रच रहे हैं।


एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता व दिल्ली प्रदेश के संयोजक सौरभ भारद्वाज, विधायक संजीव झा, कुलदीप कुमार और विकास गोयल ने सरकारी आंकड़ों को झूठा बताते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।



1. प्री-एसआईआर (Pre-SIR) के नाम पर गर्मियों की छुट्टियों में कटे 14 लाख वोट

विधायक संजीव झा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि दिल्ली में आधिकारिक एसआईआर शुरू होने से पहले ही, जून के महीने में 'प्री-एसआईआर' की आड़ में लगभग 14 लाख लोगों के वोट गुपचुप तरीके से काट दिए गए हैं।


संजीव झा ने इसके पीछे की क्रोनोलॉजी समझाते हुए कहा:


"जून के महीने में दिल्ली के स्कूलों में समर वेकेशन (गर्मियों की छुट्टियां) होती हैं। इस दौरान बिहार, यूपी और अन्य राज्यों से आए प्रवासी मजदूर और किराएदार अपने परिवारों के साथ गांवों या नानी के घर चले जाते हैं। चुनाव आयोग के बीएलओ (BLO) जब उनके बंद घरों पर पहुंचे, तो उन्होंने जानबूझकर 'एब्सेंट' (Absent) या 'शिफ्टेड' (Shifted) लिखकर उनके वोट हमेशा के लिए काट दिए। अब जब वे लोग वापस आ रहे हैं, तो उनका नाम सूची में ही नहीं है।"


'आप' का आरोप है कि भाजपा को पता है कि दिल्ली का प्रवासी और मध्यम वर्ग उसके जनविरोधी शासन से त्रस्त है, इसलिए टारगेट करके उनके वोटिंग राइट्स (मतदान का अधिकार) छीने जा रहे हैं।


2. 48 डिग्री तापमान में 100% फॉर्म बांटने का सरकारी डेटा पूरी तरह फर्जी: कुलदीप कुमार

विधायक कुलदीप कुमार ने चुनाव आयोग द्वारा जारी 10 जुलाई 2026 के आंकड़ों की पोल खोलते हुए कुछ बूथों का डेटा दिखाया। उन्होंने कहा कि सरकारी कागजों में दिल्ली के उन देहाती और ग्रामीण इलाकों में भी 100% एनुमरेशन फॉर्म (Enumeration Form) बांटे और भरे जाने का दावा किया जा रहा है, जहां मकान नंबर और पते ढूंढना भी नामुमकिन होता है।


कुलदीप कुमार ने आरोप लगाया कि दिल्ली में जब 48 डिग्री का भीषण तापमान था, तब बीएलओ (जो ज्यादातर स्कूल की शिक्षिकाएं हैं) को जबरन फॉर्म थमा दिए गए। असलियत में वे घर-घर गईं ही नहीं, बल्कि एक ही बिल्डिंग या किसी एक व्यक्ति को सारे फॉर्म सौंपकर कागजों में शत-प्रतिशत काम पूरा दिखा दिया गया। आम आदमी पार्टी द्वारा लगाए गए कैंपों में रोजाना हजारों लोग बिना फॉर्म मिलने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।


3. झुग्गी उजाड़कर गरीबों का संवैधानिक हक छीनने की साजिश: विकास गोयल

'आप' नेता विकास गोयल ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में दिल्ली के भीतर भाजपा के इशारे पर हजारों झुग्गियों को बेरहमी से तोड़ा गया और गरीबों को बेघर कर दिया गया। अब जब ये गरीब मजदूर वहीं आसपास कहीं किराए पर कमरा लेकर रह रहे हैं, या जिन्हें वजीरपुर जैसी जगहों पर सरकारी फ्लैट मिले हैं, बीएलओ उन्हें यह कहकर फॉर्म देने से मना कर रहे हैं कि 'अब आपकी झुग्गी अस्तित्व में नहीं है'। यह सीधे तौर पर गरीबों को दिल्ली से भगाने और उनके मौलिक अधिकारों पर डाका डालने जैसा है।


सौरभ भारद्वाज का मुख्य चुनाव अधिकारी पर तीखा हमला

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में जब पत्रकारों ने सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग तीन बार घर जाने और नोटिस भेजने की बात कह रहा है? तो सौरभ भारद्वाज ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि कागजों में चाहे 30 बार जाने का नियम लिख दो, जमीन पर कोई नहीं जा रहा है।


चुनाव आयोग के पास डेलिगेशन ले जाने के सवाल पर भारद्वाज ने अत्यंत कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा:


"दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी (Chief Electoral Officer) ज्ञानेश कुमार निहायत ही बदतमीज आदमी हैं और वे खुद खुलकर बदतमीजी करते हैं। हम केवल आपकी तसल्ली के लिए एक बार शिकायत दर्ज कराने चले जाएंगे, लेकिन हमें पता है कि इस पक्षपाती सिस्टम से गरीबों को न्याय नहीं मिलने वाला।"


आम आदमी पार्टी ने मुख्य चुनाव आयोग से इस पूरी प्रक्रिया की तुरंत निष्पक्ष जांच कराने और प्रवासियों के फंडामेंटल राइट्स की रक्षा करने की अपील की है।


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