
‘खेल फिक्स है तो खेलना बंद करो’, विपक्ष पर अभिजीत दीपके
अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों से चुनावी प्रक्रिया पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर एक समान और स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की है। उनका कहना है कि राजनीतिक अस्तित्व से पहले देश और लोकतंत्र को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों से चुनावी रणनीति पर बड़ा सवाल पूछा है। दीपके का कहना है कि अगर विपक्ष मानता है कि चुनाव प्रक्रिया में धांधली हो रही है, तो उसे ऐसे चुनावों में हिस्सा लेना बंद कर देना चाहिए। उनके मुताबिक चुनाव लड़ते रहने से उसी चुनावी प्रक्रिया को वैधता मिलती है, जिस पर विपक्ष खुद सवाल उठा रहा है।
विपक्ष के सामने रखा सवाल
25 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में दीपके ने कहा कि विपक्ष एक तरफ चुनावों में कथित धांधली की बात करता है और दूसरी तरफ उन्हीं चुनावों में हिस्सा भी लेता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या विपक्ष को डर है कि चुनाव नहीं लड़ने पर उसका राजनीतिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा?
दीपके ने विधायकों और सांसदों के दल बदलने और राजनीतिक दलों में टूट का मुद्दा भी उठाया। उनका तर्क है कि विपक्ष को केवल अपने राजनीतिक अस्तित्व के बजाय चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों पर एक स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
अलग-अलग राज्यों में अलग रुख क्यों?
दीपके ने विपक्ष पर चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों को चुनिंदा तरीके से उठाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर किसी राज्य में चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठता है, तो विपक्ष का रुख इस आधार पर नहीं बदलना चाहिए कि वहां किस राजनीतिक दल का हित जुड़ा हुआ है।
चुनाव की तुलना 'फिक्स मैच' से
अपनी बात समझाने के लिए दीपके ने क्रिकेट के कथित फिक्स मैच का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि फिक्स मैच में हर कैच नहीं छोड़ा जाता और मुकाबले को आखिरी ओवर तक भी ले जाया जा सकता है, ताकि वह वास्तविक दिखाई दे।
इसी तरह दीपके का दावा है कि विपक्ष को कुछ चुनावी जीत मिलने से पूरी चुनाव प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल अपने आप खत्म नहीं हो जाते। इसी आधार पर उन्होंने विपक्षी दलों से कथित तौर पर धांधली वाले चुनावों में हिस्सा न लेने की अपील की।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग
इससे एक दिन पहले दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी और मांग पूरी नहीं होने पर 'जंतर-मंतर 2.0' आंदोलन की चेतावनी दी थी।
यह पूरा विवाद उस मीडिया रिपोर्ट की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। इनमें मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और दोबारा शामिल करने तथा वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया से जुड़े विषय शामिल बताए गए।
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विषयों पर विचार रखे गए, लेकिन SIR समेत चुनाव आयोग के फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए।

