
पेट्रोल के बाद अब CNG और PNG में भी होगी मिलावट, जानिए मोदी सरकार ने क्यों लिया ये फैसला?
पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग (E-20) को लेकर चल रहे देशव्यापी विवाद और सियासत के बीच, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 'राष्ट्रीय एकीकृत गोबरधन योजना' को मंजूरी दे दी है।
देशभर में पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग (E-20) की नीति को लेकर बहस और विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एक और बड़ा रणनीतिक कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने देश में बायोगैस उत्पादन को गति देने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के मकसद से 23,731 करोड़ रुपये की 'राष्ट्रीय एकीकृत गोबरधन योजना' (GOBARdhan Scheme) को मंजूरी दे दी है।
इस महत्वाकांक्षी योजना को अगले 10 वर्षों की अवधि में लागू किया जाएगा। इसके तहत अब घरेलू और औद्योगिक स्तर पर इस्तेमाल होने वाली संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) और पाइप प्राकृतिक गैस (PNG) में चरणबद्ध तरीके से 5 फीसदी तक बायोगैस (Bio-CNG) मिलाई जाएगी।
क्या है 'गोबरधन योजना' और कैसे काम करेगी ब्लेंडिंग?
कैबिनेट बैठक के बाद फैसलों की जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि अपशिष्ट, गोबर, जैविक कचरे और अन्य बायोमास संसाधनों का सही इस्तेमाल करके उन्हें स्वच्छ ईंधन और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद में बदलना है।
इस योजना के तहत शहरी गैस वितरण कंपनियों (CGD Companies) के लिए घरेलू स्तर पर उत्पादित कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को खरीदना अनिवार्य किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए एक स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की है:
वित्त वर्ष 2026-27: CNG और PNG में 3 प्रतिशत बायोगैस मिलाई जाएगी।
वित्त वर्ष 2027-28: बायोगैस की ब्लेंडिंग बढ़ाकर 4 प्रतिशत की जाएगी।
वित्त वर्ष 2028-29 से आगे: गैस नेटवर्क में अनिवार्य रूप से 5 प्रतिशत बायोगैस मिलाई जाएगी।
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि इस पहल का दूरगामी लक्ष्य घरेलू बायोगैस उत्पादन को वर्तमान स्तर से दस गुना से भी अधिक बढ़ाना है, जिससे देश की आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भरता काफी कम होगी और पर्यावरण को भी लाभ पहुंचेगा।
इथेनॉल ब्लेंडिंग पर सियासत गरम: कांग्रेस ने उठाए सवाल
जहां एक तरफ सरकार गैस सेक्टर में बायोगैस ब्लेंडिंग को मास्टरस्ट्रोक बता रही है, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की योजना पर राजनीतिक घमासान जारी है। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर ई-20 (20% एथेनॉल) नीति को बिना पूरी तैयारी और जल्दबाजी में लागू करने के संगीन आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि दुनिया के कई विकसित देश कृषि अवशेषों और वेस्ट बायोमास से एथेनॉल बनाते हैं, लेकिन भारत सरकार इसके लिए गन्ना, चावल और मक्के जैसी खाद्य फसलों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि गन्ना और धान की फसलें मिलकर देश के कुल उपलब्ध सिंचाई जल का लगभग 70 प्रतिशत उपयोग कर लेती हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा और जल संसाधनों के अति-दोहन को नजरअंदाज करके एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना देश के लिए घातक साबित हो सकता है।
विमान ईंधन (ATF) में एथेनॉल का विवाद: सरकार ने दी सफाई
पेट्रोल और गैस में ब्लेंडिंग के अलावा बीते कुछ दिनों से एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी विमान ईंधन में भी एथेनॉल मिलाए जाने की खबरें सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तैर रही थीं। आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सरकार पर आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार हवाई जहाजों के ईंधन में भी एथेनॉल मिलाने की गुपचुप तैयारी कर रही है।
इस पूरे मामले पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कड़ा संज्ञान लेते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि विमान ईंधन (ATF) में एथेनॉल मिलाने का न तो सरकार का कोई प्रस्ताव है और न ही कोई योजना है। केंद्रीय मंत्री ने केजरीवाल के आरोपों को पूरी तरह से तथ्यहीन और भ्रामक करार देते हुए खारिज कर दिया।
भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा बनाम उपभोक्ता असंतोष
एक तरफ जहां गाड़ियों में एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से इंजन को होने वाले नुकसान और माइलेज में गिरावट को लेकर वाहन चालक सड़कों पर उतर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार 'नेट ज़ीरो' कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बायोगैस और बायो-फ्यूल के इस मॉडल को तेजी से आगे बढ़ाना चाहती है। अब देखना यह होगा कि 23,731 करोड़ रुपये की 'गोबरधन योजना' आने वाले वर्षों में देश के हरित ऊर्जा तंत्र को कितना मजबूती दे पाती है और क्या सरकार उपभोक्ताओं की आशंकाओं को दूर करने में सफल होती है।

