ट्विशा शर्मा मौत मामला, दूसरे पोस्टमार्टम ने सुलझाई फंदे की गुत्थी
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ट्विशा शर्मा मौत मामला, दूसरे पोस्टमार्टम ने सुलझाई फंदे की गुत्थी

ट्विशा शर्मा के दूसरे पोस्टमार्टम में कथित फंदे पर त्वचा के ऊतक मिलने की पुष्टि हुई। AIIMS की सीलबंद रिपोर्ट CBI को सौंप दी गई है, जो जांच में अहम सबूत मानी जा रही है।


भोपाल में 12 मई को अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में दूसरे पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में अहम वैज्ञानिक तथ्य सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, एम्स (AIIMS) दिल्ली की मेडिकल बोर्ड द्वारा किए गए दूसरे पोस्टमार्टम में कथित फंदे के रूप में इस्तेमाल किए गए जिम्नास्टिक बेल्ट पर त्वचा के ऊतक (स्किन टिश्यू) मिलने की पुष्टि हुई है। जांच में यह भी पाया गया कि यह बेल्ट ट्विशा की गर्दन पर मिले फंदे के निशान और चोटों के पैटर्न से मेल खाती है।

AIIMS ने CBI को सौंपी सीलबंद रिपोर्ट

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित एम्स दिल्ली के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने 10 जुलाई को अपनी 11 पन्नों की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। इसके साथ ही अनुपालन रिपोर्ट हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेज दी गई है।

फंदे को लेकर विवाद हुआ साफ

फॉरेंसिक जांच से उस महत्वपूर्ण विवाद का समाधान होने की बात सामने आई है, जिसमें यह सवाल उठाया जा रहा था कि धातु की रिंग वाले जिम्नास्टिक बेल्ट का इस्तेमाल वास्तव में फंदे के रूप में हुआ था या नहीं, और क्या वही ट्विशा की गर्दन पर मिले निशानों का कारण था।एम्स में हुई हिस्टोपैथोलॉजिकल और प्रयोगशाला जांच में बेल्ट पर त्वचा के ऊतक पाए गए, जिससे यह स्थापित हुआ कि कथित फंदा और गर्दन पर मिले चोटों के निशान आपस में मेल खाते हैं।

पहले पोस्टमार्टम में नहीं हो सकी थी पुष्टि

पहले पोस्टमार्टम के दौरान कथित फंदे की सामग्री मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं की गई थी। इसी वजह से उस समय यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि मौत में इस्तेमाल हुआ फंदा वही बेल्ट थी या नहीं। बाद में ट्विशा के परिजनों की याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एम्स दिल्ली से दूसरा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया।

'वैज्ञानिक आधार पर दिया गया स्पष्ट निष्कर्ष'

एम्स दिल्ली के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने रिपोर्ट की सामग्री सार्वजनिक करने से इनकार किया, लेकिन कहा कि मेडिकल बोर्ड ने लगभग एक महीने तक इस मामले का हर पहलू वैज्ञानिक तरीके से जांचा।उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रों का अध्ययन करने के बाद विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया और जो निष्कर्ष निकाला गया है, वह CBI और न्यायपालिका के लिए "पूरी तरह स्पष्ट" (Crystal Clear) है, ताकि मामले में सत्य और न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

घटना स्थल का भी किया गया निरीक्षण

एम्स की मेडिकल टीम ने 24 मई को दूसरा पोस्टमार्टम किया था। इसके अलावा जांच के दौरान टीम ने घटना स्थल का भी निरीक्षण किया। कोर्ट के निर्देशों के अनुसार विस्तृत रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंपी गई है, जबकि दूसरे पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी जांच एजेंसी के पास सुरक्षित रखी गई है।

CBI जांच में अहम सबूत बनेगी रिपोर्ट

ट्विशा शर्मा, सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू थीं। वह 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं।प्रारंभिक जांच और पहले पोस्टमार्टम में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए ट्विशा के परिवार ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद अदालत ने दूसरा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया और बाद में पूरे मामले की जांच CBI को सौंप दी।अब एम्स की फॉरेंसिक रिपोर्ट को CBI की जांच में सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्यों में से एक माना जा रहा है, जिससे मामले की जांच और आगे बढ़ने की उम्मीद है।

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