
एअर इंडिया हादसा: 4 सेकंड के लिए फेल हुए कंट्रोल, 250 फीट गिरा विमान
फुकेट-दिल्ली एअर इंडिया फ्लाइट में भयानक टर्बुलेंस का सच। एयरबस जांच में 4 सेकंड के हाइड्रोलिक फेलियर का खुलासा, फ्रांस की BEA टीम जांच में जुटी।
Air India Turbulance: फुकेट से नई दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट (AI-2379) में हुए भयानक टर्बुलेंस और विमान के अचानक 250 फीट नीचे आ जाने के मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। जहाँ एक तरफ पायलट के गांजा (मारिजुआना) के नशे में होने के आरोपों की जांच चल रही है, वहीं दूसरी तरफ विमान निर्माता कंपनी एयरबस (Airbus) की शुरुआती जांच रिपोर्ट में किसी बड़े गंभीर तकनीकी फेलियर का खुलासा हुआ है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, उड़ान के दौरान 4 सेकंड के लिए ए-320 नियो (A-320 NEO) विमान के पूरे कंट्रोल सर्फेसेज (Control Surfaces) ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया था, जिससे कॉकपिट का नियंत्रण खत्म हो गया और भयानक झटके के कारण यात्री उछलकर घायल हो गए।
4 सेकंड के लिए फेल हुए कंट्रोल सर्फेसेज, बिना कमांड हिले विंग्स
ब्लैक बॉक्स (Digital Flight Data Recorder) और एयरबस की शुरुआती जांच में पता चला है कि विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में एक साथ तकनीकी खराबी आ गई थी।
अनियंत्रित हुए एलिवेटर और एलरॉन: इस हाइड्रोलिक फेलियर के कारण एलिवेटर और एलरॉन समेत विमान के सभी कंट्रोल सर्फेसेज 4 सेकंड के लिए बिना किसी पायलट इनपुट के अपने आप हिलने लगे।
ऑटो-पायलट हुआ बंद: हाइड्रोलिक पावर ठप होते ही एयरलाइनर का ऑटो-पायलट सिस्टम तुरंत बंद हो गया। फ्लाइट ऑपरेशन के इतिहास में इस तरह की दुर्लभ घटना पहली बार देखी गई है।
कैसे 250 फीट नीचे गिरा विमान?
कॉकपिट में मौजूद सिस्टम ने संभावित 'स्टॉल' (Stall) की चेतावनी दी। 'स्टॉल' वह खतरनाक स्थिति होती है जब विमान के पंख उड़ने के लिए जरूरी हवा का दबाव (Lift) बनाना बंद कर देते हैं।
को-पायलट का प्रयास: जेट पर से कंट्रोल खोने के डर से को-पायलट ने मानक प्रक्रिया (Standard Procedure) का पालन करते हुए जेट के अगले हिस्से (Nose) को नीचे लाने के लिए अपनी साइड-स्टिक आगे की तरफ पुश की।
हाइड्रोलिक का वापस आना: हाइड्रोलिक प्रेशर न होने के कारण शुरुआत में साइड-स्टिक का कोई असर नहीं हुआ, लेकिन जैसे ही कुछ ही सेकंड में तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम अचानक ठीक हुए, को-पायलट का इनपुट लागू हो गया।
तेजी से झुका विमान: इसके असर से विमान का अगला हिस्सा बेहद तेजी से नीचे की ओर झुक गया और विमान लगभग 250 फीट नीचे आ गिरा। इस जोरदार झटके (Turbulence) से केबिन क्रू और यात्री सीट से ऊपर उछले और चोटिल हो गए।
फ्रांस से एक्सपर्ट्स पहुंचे दिल्ली, AAIB कर रही जांच
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार एअर इंडिया के इस 7 साल पुराने विमान का डेटा विश्लेषण के लिए फ्रांस के टूलूज स्थित एयरबस के परमानेंट सपोर्ट सेंटर (AIRTAC) भेजा गया था।
एयरबस की शुरुआती रिपोर्ट: 5 अगस्त की मध्यरात्रि को एयरबस ने अपनी फाइल वापस भेजी, जिसमें प्रेशर सेंसर (Hydraulic Pressure Switch) में गड़बड़ी की बात कही गई है। हालांकि, खराबी की अंतिम वजह अभी पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है।
फ्रांस की BEA टीम दिल्ली में: फिलहाल एयरबस और फ्रांस की एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी BEA के एक्सपर्ट्स दिल्ली में मौजूद हैं। उन्होंने विमान की फिजिकल जांच कर नई जानकारी भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को सौंप दी है।
पायलट के नशे की जांच और एअर इंडिया का बड़ा एक्शन
तकनीकी खराबी के अलावा, फ्लाइट के कैप्टन सुदीप वशिष्ठ के व्यवहार और नशे में होने के आरोपों की भी समानांतर जांच चल रही है।
यूरिन टेस्ट में पुष्टि: केबिन क्रू के एक सदस्य की शिकायत के बाद फ्लाइट लैंड होने पर कैप्टन के दो यूरिन सैंपल लिए गए थे, जिनमें मारिजुआना (गांजा) की पुष्टि हुई है।
ड्रग टेस्ट का आदेश: इस घटना के बाद एअर इंडिया ने अपने और एअर इंडिया एक्सप्रेस के सभी पायलटों के लिए अनिवार्य ड्रग व ब्लड टेस्ट कराने के सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।
हालांकि, जांच एजेंसियों का कहना है कि अब तक ऐसा कोई सीधा लिंक नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि विमान का 4 सेकंड के लिए कंट्रोल खोना सीधे तौर पर पायलट के आचरण से जुड़ा था।
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