इस पूरे केस में कातिलों तक पहुंचने और अदालत में ताहिर हुसैन के खिलाफ जुर्म साबित करने में एक 'इंटरसेप्टेड फ़ोन कॉल' सबसे अहम और पक्का सबूत बनी।
वो खौफनाक कॉल: "काफिरों को निपटा दिया, काटकर नाले में फेंका"
इस केस में दंगे के दौरान दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की दक्षिणी रेंज में तैनात इंस्पेक्टर अतुल त्यागी की टीम( हेमेन्द्र राठी, राकेश आदि) ने कुछ संदिग्धों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाए थे। इनमें से एक नंबर हसीन मुल्ला जी नाम के शख्स का था।
25 फरवरी की इंटरसेप्टेड कॉल: दंगों के दौरान हसीन ने अपने दोस्त को फोन पर कहा, "आज काफिरों को निपटा दिया... काटकर नाले में फेंक दिया।"
कड़ियों से कड़ियां जुड़ीं: शुरुआती कॉल से हत्या की जगह और पीड़ित का नाम स्पष्ट नहीं था। लेकिन अगले दिन जैसे ही अंकित शर्मा का शव नाले से बरामद हुआ, पुलिस को साफ हो गया कि यह कॉल अंकित शर्मा की हत्या से जुड़ी है।
ताहिर हुसैन के घर का ठिकाना: पुलिस ने हसीन को दबोच लिया। पूछताछ में उसने न केवल हत्या की बात कबूली, बल्कि बताया कि उसने और उसके साथियों ने अंकित शर्मा पर चाकुओं से कहाँ-कहाँ वार किए। हसीन ने यह बड़ा खुलासा भी किया कि वे सभी वारदात के वक्त आम आदमी पार्टी के तत्कालीन पार्षद ताहिर हुसैन के घर पर ही रुके हुए थे।
51 बार चाकुओं से गोदा: कोर्ट ने कहा 'अत्यंत बर्बर'
कड़कड़डूमा कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह अपराध अत्यंत बर्बरता से भरा था।
अदालत की टिप्पणी: "क्रूरता हत्या के साथ खत्म नहीं हुई। शव को पास के नाले में इस तरह घसीटा गया मानो नफरत शांत नहीं हुई थी।"
घटनाक्रम: 25 फरवरी 2020 की शाम IB में सिक्योरिटी असिस्टेंट 26 वर्षीय अंकित शर्मा हिंसा शांत कराने की कोशिश कर रहे थे, तभी ताहिर हुसैन के घर के पास भीड़ ने उन्हें घेरकर चाकुओं, लाठियों और पत्थरों से हमला कर दिया। उनके शरीर पर 51 घाव पाए गए थे।
क्या हाईकोर्ट में फांसी की सजा की मांग हो सकती है?
हाँ, बिल्कुल की जा सकती है।
राज्य/अभियोजन (Prosecution) की अपील:
सीआरपीसी की धारा 377 (CrPC Section 377) के तहत सरकार या दिल्ली पुलिस सजा बढ़ाने (Enhancement of Sentence) के लिए हाईकोर्ट में अपील दायर कर सकती है।
पीड़ित पक्ष का रुख:
पीड़ित परिवार रिवीजन पिटीशन (Revision Petition) या सरकारी वकील के जरिए हाईकोर्ट से सजा को फांसी में बदलने की मांग कर सकता है।
बचाव पक्ष को मौका:
कानून के अनुसार, सजा बढ़ाने से पहले हाईकोर्ट दोषी को कारण बताओ नोटिस (Show Cause) और अपनी बात रखने का पूरा अवसर देता है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और बचाव पक्ष की दलील
कपिल मिश्रा (कानून मंत्री, दिल्ली): "ताहिर हुसैन को उम्रकैद इंसाफ की शुरुआत है। जिस बेरहमी से अंकित शर्मा जी की हत्या की गई, यह निश्चित रूप से रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस है। उम्मीद है कि हाईकोर्ट में यह उम्रकैद फांसी में बदलेगी।"
ताहिर हुसैन की वकील (तारा नरूला): वकील ने कहा कि ताहिर केवल भीड़ में मौजूद थे और उन्होंने चाकू का इस्तेमाल नहीं किया था। वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
ताहिर हुसैन का बयान: "देर हो सकती है, अंधेर नहीं। मुझे हाईकोर्ट से न्याय मिलेगा।"