
'2024 का कानून था तो NEET पेपर लीक कैसे हुआ?' अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा
लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने NEET पेपर लीक, NTA, स्कूल बंद और छात्रों के आंदोलन को लेकर जवाबदेही की मांग उठाई।
लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार नया कानून लाकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। अगर 2024 में बनाया गया कानून इतना प्रभावी था, तो उसके महज दो साल बाद ही NEET समेत कई परीक्षाओं के पेपर कैसे लीक हो गए? अखिलेश ने कहा कि यह केवल कानून का नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही और पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता का सवाल है।
'जिस सरकार को अडिग बताया जाता था, उसे छात्रों ने झुका दिया'
अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने छात्रों के आंदोलन को दूर से देखा और महसूस किया कि इस आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि जिस सरकार को अहंकारी और अडिग बताया जाता था, उसे छात्रों और युवाओं के जनदबाव के आगे झुकना पड़ा। उनके मुताबिक, यह किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक ताकत की जीत है।
'एक प्रधान का इस्तीफा लेकर प्रधानमंत्री को बचाया गया'
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जिक्र करते हुए अखिलेश ने सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देने के बाद संसद पहुंचे तो उनका स्वागत किया गया। स्वागत से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सत्ता पक्ष के नेताओं के चेहरों पर दिखी राहत बहुत कुछ बयां कर रही थी। उन्होंने कहा कि ऐसा लगा जैसे "प्रधानमंत्री को बचाने के लिए एक 'प्रधान' का इस्तीफा लिया गया।"
'व्यंग्य से शुरू हुआ आंदोलन सरकार को झुकाने तक पहुंच गया'
सपा प्रमुख ने कहा कि जिस संगठन की शुरुआत कभी व्यंग्य और मजाक के तौर पर हुई थी, वही आगे चलकर इतना बड़ा जनआंदोलन बन गया कि सरकार को प्रदर्शन की अनुमति देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि जब जनता किसी मुद्दे पर एकजुट हो जाती है तो लोकतंत्र में सरकारों को अपने फैसले बदलने पड़ते हैं।
किसान आंदोलन का भी किया जिक्र
अखिलेश यादव ने किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि यही सरकार एक समय किसानों को दिल्ली आने की अनुमति नहीं देती थी। किसानों को राजधानी की सीमाओं पर लंबे समय तक आंदोलन करना पड़ा, लेकिन सरकार ने उनकी बात सुनने में काफी समय लगाया। उन्होंने कहा कि मौजूदा छात्र आंदोलन ने भी साबित कर दिया कि जनदबाव के सामने आखिरकार सरकारों को झुकना पड़ता है।
'यह आंदोलन किसी पार्टी ने नहीं, छात्रों ने खड़ा किया'
उन्होंने कहा कि राजनीति में रहने के कारण वह जानते हैं कि किसी बड़े आंदोलन के लिए कितनी तैयारी करनी पड़ती है। लेकिन यह पहला ऐसा आंदोलन था, जो किसी राजनीतिक दल की रणनीति से नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं की नाराजगी से खड़ा हुआ। इसमें सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि उनके माता-पिता भी शामिल हुए, क्योंकि यह उनके बच्चों के भविष्य का सवाल था।
सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि सरकार अन्य मामलों में कथित अनियमितताओं को नहीं रोक सकी, तो परीक्षा के पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या पर प्रभावी नियंत्रण कैसे करेगी। उन्होंने कहा कि छात्रों का भरोसा केवल नए कानून से नहीं, बल्कि पारदर्शी और ठोस कार्रवाई से लौटेगा।
NTA और आउटसोर्सिंग पर सरकार को घेरा
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को लेकर भी उन्होंने कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश की प्रमुख प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं के संचालन के लिए NTA बनाई, लेकिन यदि परीक्षा प्रक्रिया का संचालन ही आउटसोर्स कर दिया गया, तो एजेंसी की जवाबदेही किस बात की रह जाती है? उन्होंने पूछा कि इतनी संवेदनशील व्यवस्था को बाहरी संस्थाओं के भरोसे क्यों छोड़ा गया।उन्होंने यह भी सवाल किया कि NTA से हटाए गए 47 अधिकारी कौन थे, उन्हें क्यों हटाया गया और परीक्षा संचालन का काम किन संस्थाओं को सौंपा गया? उनके अनुसार, सरकार को इन सभी सवालों का स्पष्ट जवाब संसद और देश के सामने रखना चाहिए।
'पेपर लीक सिर्फ NEET तक सीमित नहीं'
अखिलेश यादव ने कहा कि यह विवाद केवल NEET तक सीमित नहीं है। कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्नपत्र भी लीक हुए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 2024 में कानून बना दिया गया था, तो उसके बाद भी लगातार पेपर लीक की घटनाएं कैसे होती रहीं? यदि कानून प्रभावी था, तो उसकी सफलता जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दी?
सरकारी स्कूल और शिक्षक भर्ती का भी उठाया मुद्दा
सपा प्रमुख ने दावा किया कि पिछले वर्षों में देशभर में एक लाख से अधिक सरकारी स्कूल बंद किए गए, जिनमें सबसे अधिक उत्तर प्रदेश के 26,386 सरकारी प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। उन्होंने 69 हजार शिक्षक भर्ती विवाद का भी जिक्र करते हुए कहा कि यह मामला आज भी अदालत में लंबित है। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके बताए तथ्य गलत हैं, तो सरकार संसद में इसका जवाब दे।
'युवाओं की शिक्षा और रोजगार पर हमला क्यों?'
उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश के कई महत्वपूर्ण संस्थानों की कमान एक ही विचारधारा से जुड़े लोगों के हाथों में है। उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर युवाओं की शिक्षा और रोजगार पर लगातार चोट क्यों की जा रही है? देश के डेमोग्राफिक डिविडेंड का इस्तेमाल करने के बजाय उसे कमजोर क्यों किया जा रहा है?
'बिल का समर्थन करेंगे, लेकिन जवाब भी चाहिए'
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी इस संशोधन विधेयक का समर्थन करेगी। लेकिन उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना होगा कि जब 2024 में मूल कानून बनाया गया था, तो उसके सिर्फ दो साल बाद ही NEET पेपर लीक जैसी घटना कैसे हो गई। उनका कहना था कि कानून बनाने से ज्यादा जरूरी उसकी प्रभावी निगरानी और जवाबदेही तय करना है।
आपातकाल पर किरण रिजिजू से नोकझोंक
भाषण के दौरान केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने आपातकाल का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव से छात्र आंदोलनों पर हुई कार्रवाई को लेकर सवाल पूछा। इस पर अखिलेश ने जवाब दिया कि जब देश में आपातकाल लागू हुआ था, तब वह इतने बड़े नहीं थे कि उसकी परिस्थितियों को समझ पाते। लेकिन उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ एक सप्ताह पहले जो हुआ, उसे देखकर उन्हें दमन का वास्तविक स्वरूप समझ में आया।
उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय इलेक्ट्रिक चार्ज वाली लाठियां नहीं थीं, लेकिन इस बार उनका भी इस्तेमाल किया गया। इसी टिप्पणी के साथ उन्होंने अपना भाषण समाप्त किया।

