
राज्यसभा में आज एंटी पेपर लीक बिल, क्या बिना रुकावट मिल जाएगी मंजूरी?
लोकसभा से पारित एंटी पेपर लीक बिल आज राज्यसभा में पेश होगा। एनडीए के बहुमत के चलते इसके आसानी से पास होने की संभावना है। बिल में पेपर लीक पर 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई के लिए लाया गया 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' अब लोकसभा से पारित हो चुका है। बुधवार को सदन में तीखी बहस और विपक्ष के हंगामे के बीच यह विधेयक ध्वनि मत से पास हो गया। अब सरकार इसे गुरुवार दोपहर राज्यसभा में पेश करेगी, जहां इस पर चर्चा के बाद पारित कराने की कोशिश होगी।
लोकसभा में हंगामे के बीच पास हुआ बिल
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया था। दो दिनों तक चली चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। हालांकि, विपक्ष ने विधेयक के प्रावधानों पर कम और दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई तथा सरकार की भूमिका पर ज्यादा सवाल उठाए।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और लगातार सामने आए पेपर लीक मामलों को लेकर सरकार को घेरा। इसके बावजूद सरकार ने ध्वनि मत से विधेयक पारित करा लिया।
छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार लाई सख्त कानून
देशभर में पेपर लीक के मामलों और प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हुआ। जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन कई राज्यों तक फैल गया। बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने और पेपर लीक पर लगाम लगाने के लिए इस संशोधन विधेयक को लाने का फैसला किया।
सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, नकल और पेपर लीक पर रोक लगाना तथा छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
अब राज्यसभा में होगी अग्निपरीक्षा
लोकसभा से पारित होने के बाद अब सरकार की नजर राज्यसभा पर है। यहां भी विधेयक पर चर्चा होगी, लेकिन संख्या बल को देखते हुए सरकार के लिए इसे पारित कराना मुश्किल नहीं माना जा रहा है।विपक्ष चर्चा के दौरान सरकार को पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था और छात्रों के आंदोलन जैसे मुद्दों पर घेर सकता है, लेकिन संख्या बल के आधार पर विधेयक के पारित होने की संभावना मजबूत दिखाई दे रही है।
राज्यसभा में क्या है नंबर गेम?
राज्यसभा की कुल निर्धारित सदस्य संख्या 245 है, लेकिन फिलहाल तीन सीटें खाली हैं। यानी वर्तमान प्रभावी सदस्य संख्या 242 है। किसी सामान्य विधेयक को पारित कराने के लिए 122 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है।
एनडीए के पास लगभग 152 सांसदों का समर्थन है।
इंडिया गठबंधन के पास 63 सांसद हैं।
अन्य दलों के पास करीब 29 सांसद हैं।
ऐसे में विपक्ष पूरी तरह एकजुट भी हो जाए, तब भी सरकार के पास सामान्य विधेयक पारित कराने के लिए पर्याप्त बहुमत मौजूद है।
बिल में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?
सरकार ने पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए कई कड़े प्रावधान शामिल किए हैं।पेपर लीक या परीक्षा में धोखाधड़ी के दोषियों को कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल।
दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना।
संगठित पेपर लीक गिरोहों के मामलों में कम से कम 7 वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान। जांच एजेंसियों को 60 दिनों के भीतर जांच पूरी करनी होगी।मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे, जहां रोजाना सुनवाई होगी ताकि मामलों का जल्द निपटारा हो सके।
सरकार की रणनीति और विपक्ष का रुख
लोकसभा की बहस से संकेत मिले कि विपक्ष ने विधेयक के मूल प्रावधानों का व्यापक विरोध नहीं किया, बल्कि सरकार की परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक की घटनाओं और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को मुख्य मुद्दा बनाया। ऐसे में राज्यसभा में भी तीखी राजनीतिक बहस की संभावना है, लेकिन संख्या बल के चलते सरकार के लिए विधेयक पारित कराना अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है।
यदि राज्यसभा से भी यह विधेयक पारित हो जाता है, तो पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के खिलाफ केंद्र सरकार का यह सबसे सख्त कानूनी ढांचा लागू होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

