Anti Paper Leak Bill Passed: राज्यसभा में भी पास, 10 साल जेल, ₹10Cr जुर्माना
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Anti Paper Leak Bill Passed: राज्यसभा में भी पास, 10 साल जेल, ₹10Cr जुर्माना

Anti Paper Leak Bill Passed in Parliament: लोकसभा के बाद राज्यसभा से पास। पेपर लीक माफिया को 10 साल जेल, ₹10 करोड़ जुर्माना और री-एग्जाम का खर्च वसूला जाएगा।


Rajyasabha: देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली और पेपर लीक नेटवर्क पर नकेल कसने के लिए केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी बहुचर्चित 'एंटी पेपर लीक बिल' (लोक परीक्षा अनुचित साधनों का निवारण विधेयक) ध्वनि मत से पारित हो गया है। मॉनसून सत्र के दौरान दोनों सदनों में लंबी और तीखी चर्चा के बाद संसद ने इस कानून पर अपनी मुहर लगा दी है। इस नए कानून के अस्तित्व में आने के बाद अब संगठित तरीके से पेपर लीक कराने और नकल गिरोह चलाने वाले माफियाओं के खिलाफ देश का सबसे सख्त कानूनी शिकंजा कसना तय हो गया है।


10 साल की जेल और ₹10 करोड़ का जुर्माना: कानून में कड़े प्रावधान
सरकार द्वारा लाए गए इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य संगठित अपराध सिंडिकेट और परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले बड़े नेटवर्क को खत्म करना है।

कड़ी सजा का प्रावधान: संगठित रूप से पेपर लीक की साजिश रचने, प्रश्नपत्र आउट कराने या परीक्षा प्रक्रिया में सेंध लगाने वाले दोषियों को अब अधिकतम 10 साल तक की जेल (कारावास) की सजा भुगतनी होगी।

भारी-भरकम आर्थिक दंड
: नकल माफिया और इससे जुड़े संस्थानों पर अब अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकेगा, ताकि वित्तीय लाभ के लिए युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों में खौफ पैदा हो सके।

री-एग्जाम का पूरा खर्च भी वसूलेगी सरकार
संसद से पास हुए इस विधेयक में केवल जेल और जुर्माने का ही प्रावधान नहीं है, बल्कि पहली बार प्रशासनिक और वित्तीय नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी भी सीधे दोषियों पर तय की गई है।

दोषियों से होगी वसूली
: अगर पेपर लीक या धांधली के कारण किसी भी सार्वजनिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा (Re-Exam) आयोजित करानी पड़ती है, तो उस री-एग्जाम का पूरा प्रशासनिक और वित्तीय खर्च भी दोषी पाए गए सिंडिकेट या व्यक्तियों से ही वसूला जाएगा।

करोड़ों युवाओं के भविष्य को सुरक्षा: पिछले कुछ समय से NEET और अन्य राष्ट्रीय-राज्य स्तरीय परीक्षाओं में हुए विवादों के बाद संसद का यह कदम देश के करोड़ों प्रतिस्पर्धी छात्रों और युवाओं के विश्वास को बहाल करने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है।


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