एससी-एसटी की तरह ब्राह्मणों का अपमान भी असंवैधानिक: बाबा रामदेव
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एससी-एसटी की तरह ब्राह्मणों का अपमान भी असंवैधानिक: बाबा रामदेव

जंतर-मंतर पर जारी आरक्षण विरोध के बीच योगगुरु ने कहा कि देश में किसी भी वर्ग के साथ अन्याय गलत है और लोकतंत्र को सड़कों पर बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए।


Baba Ramdev: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों और सामाजिक हलचल के बीच योगगुरु बाबा रामदेव का एक बड़ा बयान सामने आया है। हरिद्वार में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने देश में सामाजिक सद्भाव, समानता और हर वर्ग के अधिकारों की वकालत की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश का कानून और संविधान सभी नागरिकों को समान सुरक्षा प्रदान करता है, इसलिए समाज के किसी भी तबके के साथ भेदभाव या उसका अपमान करना कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता।


समान अधिकार और संविधान का सम्मान

बाबा रामदेव ने जोर देकर कहा कि संविधान की नजर में हर नागरिक का आत्मसम्मान बराबर है। जिस प्रकार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्ति का अपमान या उत्पीड़न करना कानूनन गलत और असंवैधानिक माना जाता है, ठीक उसी प्रकार किसी भी उच्च जाति या ब्राह्मण समाज के व्यक्ति के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करना या उनका अपमान करना भी पूरी तरह असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक मर्यादाएं किसी एक वर्ग विशेष तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये देश के हर व्यक्ति पर समान रूप से लागू होती हैं।


अन्याय किसी भी वर्ग के साथ संभव

योगगुरु ने कहा कि अक्सर ऐसा माहौल बनाया जाता है कि देश में किसी खास समूह के साथ ही गलत हो रहा है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि किसी भी वर्ग के व्यक्ति को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। चाहे छात्र हों, मरीज हों, सीमा पर तैनात जवान हों, खेतों में काम करने वाले किसान हों या फिर एससी, एसटी और ब्राह्मण समाज के लोग हों। किसी के भी साथ होने वाला अन्याय गलत है और उसके खिलाफ आवाज उठनी चाहिए।


एक देश एक चुनाव का समर्थन

देश के राजनीतिक सुधारों पर चर्चा करते हुए रामदेव ने 'एक देश, एक चुनाव' की अवधारणा की वकालत की। उन्होंने कहा कि देश में हर कुछ महीनों में होने वाले चुनावों के कारण विकास की गति बाधित होती है। लगातार चुनावी माहौल रहने से प्रशासनिक तंत्र और नीतियां प्रभावित होती हैं। यदि पूरे देश में सभी चुनाव एक साथ कराए जाएं, तो इससे सरकारी संसाधनों और समय की भारी बचत होगी, जिसका सीधा फायदा देश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और विकास कार्यों को गति देने में मिलेगा।


आंदोलनों में बच्चों के इस्तेमाल पर रोक

सड़क से लेकर संसद तक होने वाले हंगामे पर चिंता प्रकट करते हुए रामदेव ने कहा कि विरोध जताने के नाम पर व्यवस्था को ठप्प करना लोकतंत्र को बंधक बनाने जैसा है। उन्होंने विशेष रूप से यह अपील की कि किसी भी प्रकार के आंदोलन या विरोध प्रदर्शन में छोटे और नाबालिग बच्चों को आगे नहीं किया जाना चाहिए। यदि किसी समाज या वर्ग को अपनी कोई मांग रखनी है या विरोध जताना है, तो केवल 18 वर्ष से अधिक आयु के वयस्क नागरिक ही शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात सरकार के समक्ष रखें।

वंदे मातरम और हमारी सांस्कृतिक जड़ें राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को लेकर उठने वाले विवादों पर बाबा रामदेव ने कहा कि भारत माता हमारी आस्था, ज्ञान, शक्ति और सांस्कृतिक चेतना का परम केंद्र हैं। जो लोग वंदे मातरम के गायन में धार्मिक भेद या आपत्ति तलाशते हैं, वे असल में भारत की मूल संस्कृति और संस्कृत भाषा के ज्ञान से कटे हुए हैं। उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने के लिए भारतीय दर्शन का गहराई से अध्ययन करना चाहिए।


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